{"_id":"6a63bb7d07430db5d401ad4c","slug":"you-will-get-fertilizer-only-if-you-buy-zinc-zyme-and-sulphur-auraiya-news-c-211-1-aur1006-148651-2026-07-25","type":"story","status":"publish","title_hn":"Auraiya News: जिंक-जाइम और सल्फर खरीदो तभी मिलेगा खाद","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Auraiya News: जिंक-जाइम और सल्फर खरीदो तभी मिलेगा खाद
Sat, 25 Jul 2026 12:52 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
Updated Sat, 25 Jul 2026 12:52 AM IST
विज्ञापन
फोटो-29- खेत में लहलहाती धान की फसल। संवाद
औरैया। सरकारी तंत्र यूरिया और डीएपी की बोरी के साथ जिंक, जाइम, सल्फर, रीजेंट समेत अन्य उत्पादों की टैगिंग पर रोक लगाने का दावा कर रही है।
वहीं जमीनी हकीकत कुछ और ही है। किसानों को प्राइवेट दुकानों पर खाद तभी दी जा रही है जब वो जिंक, जाइम, सल्फर के थैले साथ में खरीद रहे हैं। हालांकि खाद कारोबारी इसका हवाला दे रहे हैं कि उर्वरक कंपनियों ने इस रोक का तोड़ निकालते हुए डमी कंपनियों के नाम से सप्लाई दे रहे हैं।
क्षेत्र के निजी उर्वरक विक्रेताओं ने बताया कि कंपनियां अपने डिस्ट्रीब्यूटरों के माध्यम से डीलरों पर अतिरिक्त उत्पाद लेने का दबाव बना रही हैं। इसके बाद डीलरों को यूरिया और डीएपी के साथ किसानों को जिंक, जाइम और अन्य उत्पाद लेने के लिए मजबूर करना पड़ रहा है। इससे किसानों की खेती की लागत बढ़ रही है।
विक्रेताओं का आरोप है कि सरकारी सख्ती के बाद भी पिछले दरवाजे से यूरिया-डीएपी के साथ टैगिंग का खेल जारी है। कुछ कंपनियां अपने उत्पादों पर अलग-अलग नामों का इस्तेमाल कर रही हैं। वहीं, कुछ उर्वरक कंपनियों द्वारा डीलरों को जरूरत से अधिक पेस्टीसाइड और अन्य उत्पाद दिए जाने की बात भी सामने आई है।
विज्ञापन
उर्वरक विक्रेताओं का कहना है कि यदि सरकार वास्तव में किसानों को जबरन टैगिंग से राहत दिलाना चाहती है तो केवल डीलरों पर कार्रवाई करने के बजाय कंपनियों और डिस्ट्रीब्यूटरों की सप्लाई व्यवस्था की भी जांच करनी होगी। तभी किसानों पर पड़ने वाले अतिरिक्त आर्थिक बोझ और कथित शोषण पर रोक लग सकेगी। किसान खाद के साथ दिए जा रहे पेस्टीसाइड व जिंक के थैले को लेकर खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं।
-- --
बोले किसान-यूरिया संग जिंक खरीदनी पड़ी
10 दिन पहले पांच बीघा खेत में धान रोपाई की थी। समिति पर खाद न मिलने की वजह से प्राइवेट दुकान पर खाद लेने गए थे। यूरिया की बोरी के साथ 150 रुपये की जिंक का पैकेट दुकानदार अनिवार्य तौर पर खरीदने का दबाव बनाया। मजबूरी में यूरिया के साथ जिंक खरीदनी पड़ी है।-राजेश आर्य, एरवाकटरा
-- -- -
सरकारी गोदाम में खाद न मिलने पर कस्बा की प्राइवेट दुकान पर गए थे। बिना टैगिंग के दुकानदार खाद नहीं दे रहे हैं। ज्यादातर दुकानदार यही कह रहे हैं। ऐसे में अब समिति पर खाद मिलने का इंतजार कर रहे हैं। इससे फसल के काम में देर हो रही है। खाद नहीं मिल पा रही है। -राजवीर, एरवा टीकुर
-- -- -- -- -
वर्जन
जिस किसी भी किसान से खाद के दुकानदार जबरन टैगिंग करने का प्रयास करता है तो किसान इसकी सूचना कृषि विभाग को जरूर दें। ताकि उनके खिलाफ कार्रवाई तय की जाए। प्रशासन के साथ ही कृषि विभाग की टीम भी लगातार दुकानों की चेकिंग कर रही है। नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर कार्रवाई हो रही है।-दुर्गेश कुमार सिंह, जिला कृषि अधिकारी
विज्ञापन
वहीं जमीनी हकीकत कुछ और ही है। किसानों को प्राइवेट दुकानों पर खाद तभी दी जा रही है जब वो जिंक, जाइम, सल्फर के थैले साथ में खरीद रहे हैं। हालांकि खाद कारोबारी इसका हवाला दे रहे हैं कि उर्वरक कंपनियों ने इस रोक का तोड़ निकालते हुए डमी कंपनियों के नाम से सप्लाई दे रहे हैं।
क्षेत्र के निजी उर्वरक विक्रेताओं ने बताया कि कंपनियां अपने डिस्ट्रीब्यूटरों के माध्यम से डीलरों पर अतिरिक्त उत्पाद लेने का दबाव बना रही हैं। इसके बाद डीलरों को यूरिया और डीएपी के साथ किसानों को जिंक, जाइम और अन्य उत्पाद लेने के लिए मजबूर करना पड़ रहा है। इससे किसानों की खेती की लागत बढ़ रही है।
विज्ञापन
विक्रेताओं का आरोप है कि सरकारी सख्ती के बाद भी पिछले दरवाजे से यूरिया-डीएपी के साथ टैगिंग का खेल जारी है। कुछ कंपनियां अपने उत्पादों पर अलग-अलग नामों का इस्तेमाल कर रही हैं। वहीं, कुछ उर्वरक कंपनियों द्वारा डीलरों को जरूरत से अधिक पेस्टीसाइड और अन्य उत्पाद दिए जाने की बात भी सामने आई है।
विज्ञापन
उर्वरक विक्रेताओं का कहना है कि यदि सरकार वास्तव में किसानों को जबरन टैगिंग से राहत दिलाना चाहती है तो केवल डीलरों पर कार्रवाई करने के बजाय कंपनियों और डिस्ट्रीब्यूटरों की सप्लाई व्यवस्था की भी जांच करनी होगी। तभी किसानों पर पड़ने वाले अतिरिक्त आर्थिक बोझ और कथित शोषण पर रोक लग सकेगी। किसान खाद के साथ दिए जा रहे पेस्टीसाइड व जिंक के थैले को लेकर खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं।
बोले किसान-यूरिया संग जिंक खरीदनी पड़ी
10 दिन पहले पांच बीघा खेत में धान रोपाई की थी। समिति पर खाद न मिलने की वजह से प्राइवेट दुकान पर खाद लेने गए थे। यूरिया की बोरी के साथ 150 रुपये की जिंक का पैकेट दुकानदार अनिवार्य तौर पर खरीदने का दबाव बनाया। मजबूरी में यूरिया के साथ जिंक खरीदनी पड़ी है।-राजेश आर्य, एरवाकटरा
सरकारी गोदाम में खाद न मिलने पर कस्बा की प्राइवेट दुकान पर गए थे। बिना टैगिंग के दुकानदार खाद नहीं दे रहे हैं। ज्यादातर दुकानदार यही कह रहे हैं। ऐसे में अब समिति पर खाद मिलने का इंतजार कर रहे हैं। इससे फसल के काम में देर हो रही है। खाद नहीं मिल पा रही है। -राजवीर, एरवा टीकुर
वर्जन
जिस किसी भी किसान से खाद के दुकानदार जबरन टैगिंग करने का प्रयास करता है तो किसान इसकी सूचना कृषि विभाग को जरूर दें। ताकि उनके खिलाफ कार्रवाई तय की जाए। प्रशासन के साथ ही कृषि विभाग की टीम भी लगातार दुकानों की चेकिंग कर रही है। नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर कार्रवाई हो रही है।-दुर्गेश कुमार सिंह, जिला कृषि अधिकारी