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Auraiya News: पोर्टल से नहीं हटाया गया पांच साल के वाहनों के चालान का डाटा
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संवाद न्यूज एजेंसी
औरैया।
शासन के अध्यादेश लाकर पूरे प्रदेश के वाहनों के एक जनवरी 2017 से 31 दिसंबर 2021 तक के चालानों को समाप्त कर दिया है। बावजूद इसके जिले के पोर्टल पर इस अवधि के हजारों की संख्या में मौजूद चालानों को नहीं हटाया जा सका है। जिससे लगभग 20 हजार वाहन चालान को लेकर वाहन स्वामी भटकने को मजबूर हैं।
उप्र यातायात निदेशालय की ओर से चार अगस्त 2023 को प्रदेश के सभी जिलों के पुलिस अधिकारियों को आदेश जारी कर उप्र दंड विधि (अपराधों का शमन एवं विचारणों का उप शमन संशोधन अध्यादेश 2023) के प्रभाव में आने के उपरांत एक जनवरी 2017 से 31 दिसंबर 2021 तक वाहन चालान उप शमित किए जा चुके हैं। अर्थात ये चालान अब अस्तित्व में नहीं हैं। इसलिए इस अवधि के लंबित चालानों को पोर्टल से डिलीट किया जाना अनिवार्य हो गया है।
अहम बात यह है कि इस आदेश को जारी हुए लगभग डेढ़ माह का समय बीत चुका है। बावजूद इसके जिले के यातायात विभाग ने अभी तक इस आदेश का पालन करने की जरूरत नहीं समझी है। फलस्वरुप इस अवधि के वाहन चालान अभी भी पोर्टल पर दिखाई दे रहे हैं। जिसके कारण वाहन स्वामी इन चालानों को लेकर यातायात विभाग व न्यायालय के चक्कर लगा रहे हैं। क्योंकि जब तक चालान पोर्टल से डिलीट नहीं होता, तब तक उनके वाहन संबंधी कार्य लॉक लगे होने से पूर्ण नहीं हो सकते।
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वरिष्ठ अधिवक्ता महावीर शर्मा का कहना है कि एक जानकारी के अनुसार एक जनवरी 2017 से 31 दिसंबर 2021 तक के पूरे जनपद में 20 हजार से अधिक वाहन चालान लंबित हैं। जिन्हें यातायात विभाग पोर्टल से डिलीट न करके शासन व यातायात निदेशालय के आदेश को धता बता रहा है।
यातायात निदेशालय की ओर से आदेश मिलने के बाद निर्धारित अवधि के पोर्टल पर मौजूद 65 हजार चालानों को हटाए जाने का काम किया जा रहा है। सभी जगहों से पोर्टल पर काम किए जाने के चलते एक दिन में तीन से चार सौ चालान ही हटाया जाना संभव हो पा रहा है। इस वजह से अभी भी पोर्टल पर काफी संख्या में उस अवधि के चालानों का ब्यौरा दिखाई दे रहा है। शासन के निर्देश पर एक जनवरी 2017 से 31 दिसंबर 2021 तक के चालानों पर कोई चालान शुल्क नहीं लिया जा रहा है। न्यायालय से भी निर्धारित अवधि की चालान की फाइलों को वापस मंगाए जाने के लिए अनुरोध किया जा चुका है। - रवि श्रीवास्तव, जिला यातायात प्रभारी, औरैया।
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औरैया।
शासन के अध्यादेश लाकर पूरे प्रदेश के वाहनों के एक जनवरी 2017 से 31 दिसंबर 2021 तक के चालानों को समाप्त कर दिया है। बावजूद इसके जिले के पोर्टल पर इस अवधि के हजारों की संख्या में मौजूद चालानों को नहीं हटाया जा सका है। जिससे लगभग 20 हजार वाहन चालान को लेकर वाहन स्वामी भटकने को मजबूर हैं।
उप्र यातायात निदेशालय की ओर से चार अगस्त 2023 को प्रदेश के सभी जिलों के पुलिस अधिकारियों को आदेश जारी कर उप्र दंड विधि (अपराधों का शमन एवं विचारणों का उप शमन संशोधन अध्यादेश 2023) के प्रभाव में आने के उपरांत एक जनवरी 2017 से 31 दिसंबर 2021 तक वाहन चालान उप शमित किए जा चुके हैं। अर्थात ये चालान अब अस्तित्व में नहीं हैं। इसलिए इस अवधि के लंबित चालानों को पोर्टल से डिलीट किया जाना अनिवार्य हो गया है।
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अहम बात यह है कि इस आदेश को जारी हुए लगभग डेढ़ माह का समय बीत चुका है। बावजूद इसके जिले के यातायात विभाग ने अभी तक इस आदेश का पालन करने की जरूरत नहीं समझी है। फलस्वरुप इस अवधि के वाहन चालान अभी भी पोर्टल पर दिखाई दे रहे हैं। जिसके कारण वाहन स्वामी इन चालानों को लेकर यातायात विभाग व न्यायालय के चक्कर लगा रहे हैं। क्योंकि जब तक चालान पोर्टल से डिलीट नहीं होता, तब तक उनके वाहन संबंधी कार्य लॉक लगे होने से पूर्ण नहीं हो सकते।
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वरिष्ठ अधिवक्ता महावीर शर्मा का कहना है कि एक जानकारी के अनुसार एक जनवरी 2017 से 31 दिसंबर 2021 तक के पूरे जनपद में 20 हजार से अधिक वाहन चालान लंबित हैं। जिन्हें यातायात विभाग पोर्टल से डिलीट न करके शासन व यातायात निदेशालय के आदेश को धता बता रहा है।
यातायात निदेशालय की ओर से आदेश मिलने के बाद निर्धारित अवधि के पोर्टल पर मौजूद 65 हजार चालानों को हटाए जाने का काम किया जा रहा है। सभी जगहों से पोर्टल पर काम किए जाने के चलते एक दिन में तीन से चार सौ चालान ही हटाया जाना संभव हो पा रहा है। इस वजह से अभी भी पोर्टल पर काफी संख्या में उस अवधि के चालानों का ब्यौरा दिखाई दे रहा है। शासन के निर्देश पर एक जनवरी 2017 से 31 दिसंबर 2021 तक के चालानों पर कोई चालान शुल्क नहीं लिया जा रहा है। न्यायालय से भी निर्धारित अवधि की चालान की फाइलों को वापस मंगाए जाने के लिए अनुरोध किया जा चुका है। - रवि श्रीवास्तव, जिला यातायात प्रभारी, औरैया।