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अल्ट्रासाउंड व एक्स-रे सुविधा ठप, भटक रहे मरीज
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50 शैया अस्पताल में स्थित अल्ट्रासाउंड कक्ष के गेट पर लगा ताला। संवाद
- फोटो : AURAIYA
औरैया। जिले में स्वास्थ्य सेवाएं बेहतर होने के बजाए दिनोंदिन बिगड़ती जा रही है। शहर के 50 शैया संयुक्त जिला चिकित्सालय में 20 दिन से अल्ट्रासाउंड और 100 शैया अस्पताल में एक सप्ताह से एक्स-रे की सुविधा ठप पड़ी है। यहां पहुंचने वाले मरीजों को डाक्टर बाहर से जांच कराने की सलाह दे रहे है। मरीज मजबूरी में अधिक रुपये खर्च कर प्राइवेट जांचें कराने पर मजबूर हैं।
प्रदेश सरकार भले ही जिला अस्पतालों में बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं देने का दम भर रही हो, लेकिन हालत इसके विपरीत है। औरैया शहर में स्थित 50 शैया संयुक्त जिला चिकित्सालय में अल्ट्रासाउंड जांच करीब 20 दिनों से ठप पड़ी है। अस्पताल में प्रतिदिन करीब 400 के करीब मरीज आते हैं। इनमें से 100 के करीब लोग जिसमें गर्भवती महिलाएं व अन्य बीमारियों से ग्रसित लोगों को चिकित्सक अल्ट्रासाउंड कराने की सलाह देते हैं।
अल्ट्रासाउंड मशीन खराब होने से अस्पताल में आने वाली गर्भवतियों को सबसे अधिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। वहीं, पेट की समस्या से पीड़ित अन्य मरीजों को भी अल्ट्रासाउंड के लिए प्राइवेट सेंटरों का सहारा लेना पड़ रहा है। इसके अलावा 100 शैया अस्पताल में एक सप्ताह से एक्स-रे की सुविधा बंद पड़ी है। यहां पर भी सड़क हादसे में घायल होने के साथ जिले भर के लोग काफी संख्या में एक्स-रे कराने पहुंचते हैं। इन दिनों मरीजों को मायूस होकर लौटना पड़ रहा है।
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अल्ट्रासाउंड और एक्स-रे की सुविधा बंद पड़े होने से अस्पताल आने वाले मरीजों को डाक्टर प्राइवेट पैथोलॉजी सेंटरों में भेज रहे हैं। जानकारों की मानें तो एक्स-रे के लिए 200 रुपये से लेकर 400 रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं। जबकि अल्ट्रासाउंड के लिए 600 से 800 तक। मरीजों की समस्या पर अधिकारी ध्यान नहीं दे रहे हैं।
50 शैया अस्पताल के सीएमएस डॉ. राजेश मोहन गुप्ता ने कहा कि अल्ट्रासाउंड की सुविधा कुछ दिन पहले ही शुरू की गई थी। कुछ तकनीकी खराबी आ गई है, इसके साथ ही पूर्व में इसके संचालन के लिए तैयार की गई पत्रावली नहीं मिल रही है। इसलिए संचालन बंद कर दिया गया है। इसे चालू कराने के लिए उच्चाधिकारियों को पत्र लिखा गया है।
100 शैया अस्पताल के सीएमएस डॉ. कुलदीप यादव ने कहा कि एक्स-रे मशीन चलते-चलते बंद हो गई है। मशीन में तकनीकी खराबी की जानकारी दी गई है। इसे ठीक कराने के लिए टेक्नीशियन बुलाए गए हैं। जल्द ही मशीन ठीक करा कर सेवाएं शुरू की जाएंगी।
एक माह से नहीं टिटनेस का इंजेक्शन
शहर के 50 शैया अस्पताल में सबसे ज्यादा मरीज आते हैं। इसके बाद भी यहां की सुविधाएं बेहतर करने में जिम्मेदार अधिकारी रुचि नहीं दिखा रहे हैं। हालात यह है कि एक माह से टिटनेस का इंजेक्शन व कुछ अन्य दवाइयां नहीं है। बंदर, कुत्तों के काटने के अलावा हादसे में घायल लोगों को बाहर से इंजेक्शन लेकर लगवाना पड़ रहा है।
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प्रदेश सरकार भले ही जिला अस्पतालों में बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं देने का दम भर रही हो, लेकिन हालत इसके विपरीत है। औरैया शहर में स्थित 50 शैया संयुक्त जिला चिकित्सालय में अल्ट्रासाउंड जांच करीब 20 दिनों से ठप पड़ी है। अस्पताल में प्रतिदिन करीब 400 के करीब मरीज आते हैं। इनमें से 100 के करीब लोग जिसमें गर्भवती महिलाएं व अन्य बीमारियों से ग्रसित लोगों को चिकित्सक अल्ट्रासाउंड कराने की सलाह देते हैं।
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अल्ट्रासाउंड मशीन खराब होने से अस्पताल में आने वाली गर्भवतियों को सबसे अधिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। वहीं, पेट की समस्या से पीड़ित अन्य मरीजों को भी अल्ट्रासाउंड के लिए प्राइवेट सेंटरों का सहारा लेना पड़ रहा है। इसके अलावा 100 शैया अस्पताल में एक सप्ताह से एक्स-रे की सुविधा बंद पड़ी है। यहां पर भी सड़क हादसे में घायल होने के साथ जिले भर के लोग काफी संख्या में एक्स-रे कराने पहुंचते हैं। इन दिनों मरीजों को मायूस होकर लौटना पड़ रहा है।
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अल्ट्रासाउंड और एक्स-रे की सुविधा बंद पड़े होने से अस्पताल आने वाले मरीजों को डाक्टर प्राइवेट पैथोलॉजी सेंटरों में भेज रहे हैं। जानकारों की मानें तो एक्स-रे के लिए 200 रुपये से लेकर 400 रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं। जबकि अल्ट्रासाउंड के लिए 600 से 800 तक। मरीजों की समस्या पर अधिकारी ध्यान नहीं दे रहे हैं।
50 शैया अस्पताल के सीएमएस डॉ. राजेश मोहन गुप्ता ने कहा कि अल्ट्रासाउंड की सुविधा कुछ दिन पहले ही शुरू की गई थी। कुछ तकनीकी खराबी आ गई है, इसके साथ ही पूर्व में इसके संचालन के लिए तैयार की गई पत्रावली नहीं मिल रही है। इसलिए संचालन बंद कर दिया गया है। इसे चालू कराने के लिए उच्चाधिकारियों को पत्र लिखा गया है।
100 शैया अस्पताल के सीएमएस डॉ. कुलदीप यादव ने कहा कि एक्स-रे मशीन चलते-चलते बंद हो गई है। मशीन में तकनीकी खराबी की जानकारी दी गई है। इसे ठीक कराने के लिए टेक्नीशियन बुलाए गए हैं। जल्द ही मशीन ठीक करा कर सेवाएं शुरू की जाएंगी।
एक माह से नहीं टिटनेस का इंजेक्शन
शहर के 50 शैया अस्पताल में सबसे ज्यादा मरीज आते हैं। इसके बाद भी यहां की सुविधाएं बेहतर करने में जिम्मेदार अधिकारी रुचि नहीं दिखा रहे हैं। हालात यह है कि एक माह से टिटनेस का इंजेक्शन व कुछ अन्य दवाइयां नहीं है। बंदर, कुत्तों के काटने के अलावा हादसे में घायल लोगों को बाहर से इंजेक्शन लेकर लगवाना पड़ रहा है।

50 शैया अस्पताल में जांच के लिए बैठी महिलाएं। संवाद- फोटो : AURAIYA