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Auraiya News: यमुना किनारे हैचरी बनाकर कछुओं का होगा संरक्षण, नदी भी होगी स्वच्छ
Thu, 23 Oct 2025 10:46 PM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
Updated Thu, 23 Oct 2025 10:46 PM IST
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फोटो-23एयूआरपी20- यमुना का प्रवाह। संवाद
औरैया। डब्ल्यूडब्ल्यूएफ संस्था की ओर से यमुना नदी किनारे कछुआ का संरक्षण किया जाएगा। इसके लिए जिले में पहली बार कछुआ संरक्षण की हैचरी बनाई जा रही है। इसमें कछुआ के अंडों को संरक्षित होंगे। उनसे बच्चे निकलने पर उन्हें नदी में छोड़ा जाएगा जोकि नदी को भी स्वच्छ बनाएंगे।
डब्ल्यूडब्ल्यूएफ की ओर से कई सालों से गंगा, यमुना और चंबल नदी में जलीय जीव जंतुओं के संरक्षण का कार्य किया जा रहा है। जलीय जंतुओं की संख्या बढ़ाने का यह प्रयास पहली बार औरैया में शुरू किया गया है। खास बात तो यह है कि जलीय जंतुओं की संख्या बढ़ने से नदी की सफाई भी प्राकृतिक रूप से हो जाती है। संस्था के स्टेट कोऑर्डिनेटर हरिमोहन मीणा ने बताया कि जिले में पहली पर कछुआ संरक्षण की पहल की गई है। गूंज गांव में यमुना नदी के किनारे काम भी शुरू कर दिया गया है। इस संरक्षण केंद्र में चित्रा इंडिका, इंडियन टेंट तुर्टल सहित अन्य प्रजाति के कछुआ के अंडों को संरक्षित किया जाएगा। जब इनमें से शावक निकलेंगे। इन्हें यमुना नदी में छोड़ दिया जाएगा।
पचनंद क्षेत्र में पांच नदियों का संगम है। इस कारण चंबल से घड़ियाल, कछुआ व डाल्फिन मछली बड़ी संख्या में यमुना में आ जाती है। जिनके संरक्षण की जरूरत है। स्थानीय लोगों को भी इन जलीय जंतुओं की जानकारी दी जा रही है ताकि वो भी इनका महत्व समझें। नमामि गंगे की जिला परियोजना अधिकारी साक्षी शुक्ला ने बताया कि डब्ल्यूडब्ल्यूएफ संस्था की तरफ से कछुआ संरक्षण यमुना के किनारे किया जा रहा है। इससे कछुआ और घड़ियाल आदि की संरक्षण होगा और संख्या बढ़ेगी। इससे नदी का ईको सिस्टम ठीक होगा और फ्लो आदि अच्छा होगा।
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डब्ल्यूडब्ल्यूएफ की ओर से कई सालों से गंगा, यमुना और चंबल नदी में जलीय जीव जंतुओं के संरक्षण का कार्य किया जा रहा है। जलीय जंतुओं की संख्या बढ़ाने का यह प्रयास पहली बार औरैया में शुरू किया गया है। खास बात तो यह है कि जलीय जंतुओं की संख्या बढ़ने से नदी की सफाई भी प्राकृतिक रूप से हो जाती है। संस्था के स्टेट कोऑर्डिनेटर हरिमोहन मीणा ने बताया कि जिले में पहली पर कछुआ संरक्षण की पहल की गई है। गूंज गांव में यमुना नदी के किनारे काम भी शुरू कर दिया गया है। इस संरक्षण केंद्र में चित्रा इंडिका, इंडियन टेंट तुर्टल सहित अन्य प्रजाति के कछुआ के अंडों को संरक्षित किया जाएगा। जब इनमें से शावक निकलेंगे। इन्हें यमुना नदी में छोड़ दिया जाएगा।
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पचनंद क्षेत्र में पांच नदियों का संगम है। इस कारण चंबल से घड़ियाल, कछुआ व डाल्फिन मछली बड़ी संख्या में यमुना में आ जाती है। जिनके संरक्षण की जरूरत है। स्थानीय लोगों को भी इन जलीय जंतुओं की जानकारी दी जा रही है ताकि वो भी इनका महत्व समझें। नमामि गंगे की जिला परियोजना अधिकारी साक्षी शुक्ला ने बताया कि डब्ल्यूडब्ल्यूएफ संस्था की तरफ से कछुआ संरक्षण यमुना के किनारे किया जा रहा है। इससे कछुआ और घड़ियाल आदि की संरक्षण होगा और संख्या बढ़ेगी। इससे नदी का ईको सिस्टम ठीक होगा और फ्लो आदि अच्छा होगा।
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