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Auraiya News: महंगाई से बुराहाल, मिड डे मील से कैसे पनपे नौनिहाल
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उन्नाव। बजट कम, खर्च अधिक की व्यवस्था होने से परिषदीय विद्यालयों के बच्चों को मिड-डे-मील में पौष्टिक भोजन देना, शिक्षकों की परेशानी का कारण बन गया है। दो साल में महंगाई डेढ़ से दो गुना बढ़ गई, लेकिन मध्याह्न भोजन योजना की कनवर्जन कास्ट में आवश्यक इजाफा नहीं हुआ। कई-कई महीने कनवर्जन कास्ट नहीं मिल पाती। दो महीने से खाते में नहीं आई। शिक्षकों को अपने पास से खर्च करना पड़ता है। मालूम हो कि प्राथमिक स्कूलों में प्रति छात्र के हिसाब से 5.45 रुपये और उच्च प्राथमिक में प्रति छात्र 8.17 रुपये की दर से कनवर्जन कास्ट मिलती है।
जिले के कुल 2709 परिषदीय स्कूलों में 1833 प्राथमिक, 451 उच्च प्राथमिक और 375 कंपोजिट स्कूल हैं। इनमें 1.20 लाख छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं। मिड-डे मील के गेहूं और चावल की आपूर्ति गांव के कोटे की दुकान से होती है। जबकि सब्जी, दाल, तेल, मसाले, दूध व फल की खरीदारी महंगाई के चलते कठिन हो गई है। बाजार में इनके दाम काफी बढ़ गए हैं। प्राथमिक स्तर पर प्रति बच्चे 5.45 और उच्च प्राथमिक स्कूलों को प्रति बच्चे के हिंसाब से 8.17 रुपये कनवर्जन कास्ट दी जा रही है। वर्तमान में सरसों तेल 190 से 200 रुपये प्रति किलोग्राम में मिल रहा है। वहीं सब्जी के भाव भी आसमान छू रहे हैं। छात्रों को सोमवार को फल और बुधवार को बच्चों को दूध भी देना होता है।
मौजूदा समय में एक फल की कीमत तीन से चार रुपये होती है। वहीं दूध का मूल्य 50 रुपये प्रति लीटर है। गैस सिलिंडर भी 850 रुपये का हो चुका है। बुधवार को दूध के साथ तहरी भी देनी है। दूध के लिए पैसा अलग से नहीं आता। इससे हर सप्ताह यह पैसा कम पड़ जाता है। शिक्षकों का कहना है कि एक बच्चे पर 12 से 14 रुपये का खर्च आता है। शिक्षकों का कहना है कि वह अच्छा भोजन बनवाने का प्रयास करते हैं लेकिन किसी तरह काम चलाना पड़ रहा है। अक्सर कनवर्जन कास्ट समय पर नहीं आती। इससे महीने अपने पास से खर्च करना पड़ता है।
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एमडीएम प्रभारी रामजी ने बताया कि सरकार से जो धनराशि मिल रही है वह भेजी जाती है। कभी कभार लेट लतीफी होती है। दो महीने की कास्ट भेज दी गई है। अभी दो महीने की कनवर्जन कास्ट भेजनी है। जल्द ही भेजी जाएगी।
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जिले के कुल 2709 परिषदीय स्कूलों में 1833 प्राथमिक, 451 उच्च प्राथमिक और 375 कंपोजिट स्कूल हैं। इनमें 1.20 लाख छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं। मिड-डे मील के गेहूं और चावल की आपूर्ति गांव के कोटे की दुकान से होती है। जबकि सब्जी, दाल, तेल, मसाले, दूध व फल की खरीदारी महंगाई के चलते कठिन हो गई है। बाजार में इनके दाम काफी बढ़ गए हैं। प्राथमिक स्तर पर प्रति बच्चे 5.45 और उच्च प्राथमिक स्कूलों को प्रति बच्चे के हिंसाब से 8.17 रुपये कनवर्जन कास्ट दी जा रही है। वर्तमान में सरसों तेल 190 से 200 रुपये प्रति किलोग्राम में मिल रहा है। वहीं सब्जी के भाव भी आसमान छू रहे हैं। छात्रों को सोमवार को फल और बुधवार को बच्चों को दूध भी देना होता है।
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मौजूदा समय में एक फल की कीमत तीन से चार रुपये होती है। वहीं दूध का मूल्य 50 रुपये प्रति लीटर है। गैस सिलिंडर भी 850 रुपये का हो चुका है। बुधवार को दूध के साथ तहरी भी देनी है। दूध के लिए पैसा अलग से नहीं आता। इससे हर सप्ताह यह पैसा कम पड़ जाता है। शिक्षकों का कहना है कि एक बच्चे पर 12 से 14 रुपये का खर्च आता है। शिक्षकों का कहना है कि वह अच्छा भोजन बनवाने का प्रयास करते हैं लेकिन किसी तरह काम चलाना पड़ रहा है। अक्सर कनवर्जन कास्ट समय पर नहीं आती। इससे महीने अपने पास से खर्च करना पड़ता है।
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एमडीएम प्रभारी रामजी ने बताया कि सरकार से जो धनराशि मिल रही है वह भेजी जाती है। कभी कभार लेट लतीफी होती है। दो महीने की कास्ट भेज दी गई है। अभी दो महीने की कनवर्जन कास्ट भेजनी है। जल्द ही भेजी जाएगी।