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Auraiya News: लोकार्पण के दो साल बाद भी ट्रॉमा सेंटर पर ताला
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संवाद न्यूज एजेंसी
औरैया। हाईवे से सटे भगौतीपुर में 2.64 करोड़ की लागत से ट्रॉमा सेंटर बनाया गया था। लोकार्पण के दो साल से ज्यादा होने के बावजूद भी अभी तक इसका संचालन नहीं हो पाया। वहीं स्वास्थ्य अधिकारी कागजों में चार चिकित्सकों की तैनाती का दावा कर रहे हैं।
हाल यह है कि ट्राॅमा सेंटर गंदगी व झाड़ियों के बीच सन्नाटे की चादर ओढ़े हुए हैं। यहां शिफ्ट में महज चौकीदारों की चाकरी बजवाई जा रही है। यहां तक कि उपकरण भी नहीं जुटाए जा सके हैं जबकि पिछले दिनों स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों ने दो सप्ताह में ओपीडी शुरू कराए जाने का दावा भी किया था।
ट्राॅमा सेंटर का भवन वर्ष 2019 में बनना शुरू हुआ। छह नवंबर 2021 को सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ट्राॅमा सेंटर के भवन का वर्चुअल तरीके से ऑनलाइन लोकार्पण किया था। साल दर साल बीते जा रहे हैं। यहां जरूरी चिकित्सक व स्टाफ से लेकर उपकरण न होने के चलते पिछले ढाई साल से संचालन अटका हुआ है।
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जिले के स्वास्थ्य अधिकारी मामले में कागजी कवायद से लेकर चार चिकित्सकों की तैनाती का हवाला देकर जल्द संचालन की उम्मीद बढ़ा देते हैं, लेकिन इस सब के बावजूद ट्राॅमा सेंटर पर झाड़ियों के बीच पसरा सन्नाटा खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। सड़क पर हो रहे हादसों में गंभीर घायल मरीजों को सैफई व कानपुर हाॅयर सेंटर रेफर करने की परंपरा लगातार चलती जा रही है।
जिले में दुर्घटनाग्रस्त मरीजों के उपचार को लेकर ट्राॅमा सेंटर के संचालन की फिलहाल कोई ठोस प्रयास जमीन पर नजर नहीं आ रहे हैं। यहां तैनात किए गए चिकित्सक कागजों तक ही सीमित हैं। हालांकि शासन स्तर से पिछले दिनों ट्राॅमा सेंटर के लिए 50 पदों के सृजन की स्वीकृति दे दी गई है।
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बोले जिम्मेदार-- -- -
शासन स्तर से दो दिन बाद संवाद किया जाना है। इसमें ट्राॅमा सेंटर के संचालन को लेकर आगे की रणनीति पर चर्चा की जाएगी। शासन से स्वीकृत 50 पदों में तैनात किए गए चार चिकित्सकों को भी शामिल रखा गया है।
-डॉ. सुनील कुमार वर्मा, मुख्य चिकित्साधिकारी
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औरैया। हाईवे से सटे भगौतीपुर में 2.64 करोड़ की लागत से ट्रॉमा सेंटर बनाया गया था। लोकार्पण के दो साल से ज्यादा होने के बावजूद भी अभी तक इसका संचालन नहीं हो पाया। वहीं स्वास्थ्य अधिकारी कागजों में चार चिकित्सकों की तैनाती का दावा कर रहे हैं।
हाल यह है कि ट्राॅमा सेंटर गंदगी व झाड़ियों के बीच सन्नाटे की चादर ओढ़े हुए हैं। यहां शिफ्ट में महज चौकीदारों की चाकरी बजवाई जा रही है। यहां तक कि उपकरण भी नहीं जुटाए जा सके हैं जबकि पिछले दिनों स्वास्थ्य विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों ने दो सप्ताह में ओपीडी शुरू कराए जाने का दावा भी किया था।
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ट्राॅमा सेंटर का भवन वर्ष 2019 में बनना शुरू हुआ। छह नवंबर 2021 को सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने ट्राॅमा सेंटर के भवन का वर्चुअल तरीके से ऑनलाइन लोकार्पण किया था। साल दर साल बीते जा रहे हैं। यहां जरूरी चिकित्सक व स्टाफ से लेकर उपकरण न होने के चलते पिछले ढाई साल से संचालन अटका हुआ है।
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जिले के स्वास्थ्य अधिकारी मामले में कागजी कवायद से लेकर चार चिकित्सकों की तैनाती का हवाला देकर जल्द संचालन की उम्मीद बढ़ा देते हैं, लेकिन इस सब के बावजूद ट्राॅमा सेंटर पर झाड़ियों के बीच पसरा सन्नाटा खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है। सड़क पर हो रहे हादसों में गंभीर घायल मरीजों को सैफई व कानपुर हाॅयर सेंटर रेफर करने की परंपरा लगातार चलती जा रही है।
जिले में दुर्घटनाग्रस्त मरीजों के उपचार को लेकर ट्राॅमा सेंटर के संचालन की फिलहाल कोई ठोस प्रयास जमीन पर नजर नहीं आ रहे हैं। यहां तैनात किए गए चिकित्सक कागजों तक ही सीमित हैं। हालांकि शासन स्तर से पिछले दिनों ट्राॅमा सेंटर के लिए 50 पदों के सृजन की स्वीकृति दे दी गई है।
बोले जिम्मेदार
शासन स्तर से दो दिन बाद संवाद किया जाना है। इसमें ट्राॅमा सेंटर के संचालन को लेकर आगे की रणनीति पर चर्चा की जाएगी। शासन से स्वीकृत 50 पदों में तैनात किए गए चार चिकित्सकों को भी शामिल रखा गया है।
-डॉ. सुनील कुमार वर्मा, मुख्य चिकित्साधिकारी