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गेहूं खरीद का अंतिम दिन आज, 23 केंद्रों पर बोहनी तक नहीं
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औरैया। गेहूं खरीद में एक दिन शेष रह गया है। खरीद शुरू हुए 75 दिन बीतने के बाद सिर्फ 1.55 फीसदी गेहूं की खरीद हो सकी है। वहीं 23 केंद्रों पर बोहनी तक नहीं हुई। अधिकारी गेहूं खरीद की खराब प्रगति के लिए समर्थन मूल्य से बाजार भाव अधिक होना बता रहे हैं।
जिले को इस वर्ष 55 हजार एमटी गेहूं की खरीद का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। इसके लिए विभिन्न संस्थाओं के कुल 65 क्रय केंद्र खोले गए। इनमें खाद्य विभाग के सात, पीसीएफ के 45, पीसीयू के 12 व एक एफसीआई केंद्र पर केंद्र थे। जिले में एक अप्रैल को गेहूं खरीद शुरू हुई थी।
शासन से 51 हजार मीट्रिक टन गेहूं खरीद का लक्ष्य दिया गया था। 75 दिनों की कड़ी मशक्कत के बाद जिलेभर के 301 किसानों से 790.37 मीट्रिक टन गेहूं की खरीद हो सकी है। गेहूं खरीद की स्थिति कैसी है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि मंगलवार तक जिले के 65 क्रय केंद्रों में से 42 में ही खरीद हुुई। जबकि पीसीएफ के 16, पीसीयू के छह, एफसीआई के एक केंद्र कुल 23 केंद्रों पर बोहनी तक नहीं हुई।
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शासन ने समर्थन मूल्य में 40 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी कर 2015 रुपये प्रति क्विंटल तय किया था, लेकिन गेहूं खरीद के समय से ही बाजार भाव 2050 से 2200 तक रहे। जिससे किसानों ने आढ़तों में जमकर गेहूं की बिक्री की। गेहूं की आसमान छूती कीमतों के मद्देनजर केंद्र सरकार ने गेहूं के निर्यात पर रोक लगा दी, लेकिन तब तक अधिकांश किसान बाजार में गेहूं बेच चुके थे। जिससे सरकारी क्रय केंद्रों पर नाममात्र के लिए ही खरीद हुई।
जिला खाद्य एवं विपणन अधिकारी सुधांशु चौबे ने कहा कि केंद्र पर पहुंचने वाले किसानों का गेहूं प्राथमिकता के आधार पर खरीदा गया। पिछले वर्षों की तुलना में इस बार गेहूं की खरीद बहुत कम रही है। विभाग को पूरा ध्यान क्रय किए गए गेहूं को एफसीआई के गोदाम तक पहुंचाने की है। 790.37 मीट्रिक टन के सापेक्ष 407 मीट्रिक टन गेहूं एफसीआई पहुंचाया जा चुका है।
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जिले को इस वर्ष 55 हजार एमटी गेहूं की खरीद का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। इसके लिए विभिन्न संस्थाओं के कुल 65 क्रय केंद्र खोले गए। इनमें खाद्य विभाग के सात, पीसीएफ के 45, पीसीयू के 12 व एक एफसीआई केंद्र पर केंद्र थे। जिले में एक अप्रैल को गेहूं खरीद शुरू हुई थी।
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शासन से 51 हजार मीट्रिक टन गेहूं खरीद का लक्ष्य दिया गया था। 75 दिनों की कड़ी मशक्कत के बाद जिलेभर के 301 किसानों से 790.37 मीट्रिक टन गेहूं की खरीद हो सकी है। गेहूं खरीद की स्थिति कैसी है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि मंगलवार तक जिले के 65 क्रय केंद्रों में से 42 में ही खरीद हुुई। जबकि पीसीएफ के 16, पीसीयू के छह, एफसीआई के एक केंद्र कुल 23 केंद्रों पर बोहनी तक नहीं हुई।
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शासन ने समर्थन मूल्य में 40 रुपये प्रति क्विंटल की बढ़ोतरी कर 2015 रुपये प्रति क्विंटल तय किया था, लेकिन गेहूं खरीद के समय से ही बाजार भाव 2050 से 2200 तक रहे। जिससे किसानों ने आढ़तों में जमकर गेहूं की बिक्री की। गेहूं की आसमान छूती कीमतों के मद्देनजर केंद्र सरकार ने गेहूं के निर्यात पर रोक लगा दी, लेकिन तब तक अधिकांश किसान बाजार में गेहूं बेच चुके थे। जिससे सरकारी क्रय केंद्रों पर नाममात्र के लिए ही खरीद हुई।
जिला खाद्य एवं विपणन अधिकारी सुधांशु चौबे ने कहा कि केंद्र पर पहुंचने वाले किसानों का गेहूं प्राथमिकता के आधार पर खरीदा गया। पिछले वर्षों की तुलना में इस बार गेहूं की खरीद बहुत कम रही है। विभाग को पूरा ध्यान क्रय किए गए गेहूं को एफसीआई के गोदाम तक पहुंचाने की है। 790.37 मीट्रिक टन के सापेक्ष 407 मीट्रिक टन गेहूं एफसीआई पहुंचाया जा चुका है।