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गांव के बाहर डेरा जमाए हैं ठीक होकर लौटे कोरोना मरीज
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बिधूना तहसील के मुकुटपुर गांव की महिला समेत तीन कोरोना पॉजिटिव शुक्रवार को इटावा के जसवंतनगर अस्पताल से स्वस्थ होकर गांव लौटे। तीनों ने घर जाने के बजाए गांव के बाहर ही एक मड़ैया में डेरा डाल डाल दिया है।
इनमें शामिल दो भाई और एक महिला ने बताया कि उन्होंने यह कदम स्वेच्छा से उठाया है। उन्हें होम क्वारंटीन होने के निर्देश थे। घर अथवा पंचायत घर में रुकने के लिए कहा गया था। लेकिन उन्होंने गांव के बाहर ही रुकना मुनासिब समझा।
अहमदाबाद से आठ मई को निजी साधनों से लौटे मुकुटपुर गांव के 29 लोगों के जत्थे में से पांच की रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव आई थी। इन सभी को पहले कन्नौज के तिर्वा और बाद में इटावा के जसवंतनगर अस्पताल में शिफ्ट किया गया था। इनमें अब पांचों ठीक हो चुके हैं।
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दो पहले ही ठीक होकर अपने गांव आ चुके हैं। जबकि तीन बुधवार की रात जसवंतनगर से ठीक होकर अपने गांव मुकुटपुर पहुंचे।
गांव पहुंचने पर गांव के अंदर न जाकर गांव के बाहर ही एक खेत में बनी मड़ैया में डेरा डाल दिया है। वहां पर इनके परिजन इनके खाने और रहने का इंतजाम किए हुए हैं। ग्राम प्रधान मिथलेश ने बताया कि उन्होंने यह कदम स्वेच्छा से उठाया है।
पिता के साथ अहमदाबाद में साड़ी की छपाई करने वाले नाबालिग दोनों भाइयों ने बताया कि पहली बार जब वह अस्पताल में जांच के लिए 10 मई को ले जाए गए थे, तब उन्हें बहुत डर लग रहा था।
बाद मेें सैंपल की जांच संक्रमित आने पर उन्हें कन्नौज के तिर्वा अस्पताल में शिफ्ट किया गया। वहां कुछ दिन इलाज के बाद उन्हें इटावा के जसवंतनगर में शिफ्ट कर दिया गया। दोबारा जांच हुई तो उसमें वह निगेटिव आए। इस पर उन्हें गांव वापस भेज दिया गया। अब वह यहीं पर रहकर क्वारंटीन अवधि पूरी होने पर पिता के साथ काम देखेंगे।
महिला ने बताया कि उसके पति अहमदाबाद में साड़ी की छपाई का काम करते थे। लॉकडाउन होने की वजह से वह गांव के अन्य लोगों के साथ निजी साधनों से किसी तरह से औरैया पहुंचे।
यहां वह ट्रैक्टर से गांव जा रहे थे, तभी उन्हें पकड़ लिया गया। सैंपल लिए गए, जिसमें उसकी 13 मई को कोरोना संक्रमित की रिपोर्ट आई। उसे जसवंतनगर भेज दिया गया। ठीक होकर लौटने के बाद प्रशासन ने उन्हें राशन नहीं दिया। अब वह गांव के बाहर रहकर क्वारंटीन की अवधि पूरी करेगी।
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इनमें शामिल दो भाई और एक महिला ने बताया कि उन्होंने यह कदम स्वेच्छा से उठाया है। उन्हें होम क्वारंटीन होने के निर्देश थे। घर अथवा पंचायत घर में रुकने के लिए कहा गया था। लेकिन उन्होंने गांव के बाहर ही रुकना मुनासिब समझा।
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अहमदाबाद से आठ मई को निजी साधनों से लौटे मुकुटपुर गांव के 29 लोगों के जत्थे में से पांच की रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव आई थी। इन सभी को पहले कन्नौज के तिर्वा और बाद में इटावा के जसवंतनगर अस्पताल में शिफ्ट किया गया था। इनमें अब पांचों ठीक हो चुके हैं।
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दो पहले ही ठीक होकर अपने गांव आ चुके हैं। जबकि तीन बुधवार की रात जसवंतनगर से ठीक होकर अपने गांव मुकुटपुर पहुंचे।
गांव पहुंचने पर गांव के अंदर न जाकर गांव के बाहर ही एक खेत में बनी मड़ैया में डेरा डाल दिया है। वहां पर इनके परिजन इनके खाने और रहने का इंतजाम किए हुए हैं। ग्राम प्रधान मिथलेश ने बताया कि उन्होंने यह कदम स्वेच्छा से उठाया है।
पिता के साथ अहमदाबाद में साड़ी की छपाई करने वाले नाबालिग दोनों भाइयों ने बताया कि पहली बार जब वह अस्पताल में जांच के लिए 10 मई को ले जाए गए थे, तब उन्हें बहुत डर लग रहा था।
बाद मेें सैंपल की जांच संक्रमित आने पर उन्हें कन्नौज के तिर्वा अस्पताल में शिफ्ट किया गया। वहां कुछ दिन इलाज के बाद उन्हें इटावा के जसवंतनगर में शिफ्ट कर दिया गया। दोबारा जांच हुई तो उसमें वह निगेटिव आए। इस पर उन्हें गांव वापस भेज दिया गया। अब वह यहीं पर रहकर क्वारंटीन अवधि पूरी होने पर पिता के साथ काम देखेंगे।
महिला ने बताया कि उसके पति अहमदाबाद में साड़ी की छपाई का काम करते थे। लॉकडाउन होने की वजह से वह गांव के अन्य लोगों के साथ निजी साधनों से किसी तरह से औरैया पहुंचे।
यहां वह ट्रैक्टर से गांव जा रहे थे, तभी उन्हें पकड़ लिया गया। सैंपल लिए गए, जिसमें उसकी 13 मई को कोरोना संक्रमित की रिपोर्ट आई। उसे जसवंतनगर भेज दिया गया। ठीक होकर लौटने के बाद प्रशासन ने उन्हें राशन नहीं दिया। अब वह गांव के बाहर रहकर क्वारंटीन की अवधि पूरी करेगी।