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Auraiya News: गड्ढा खोदकर बना दिए स्वीमिंग पूल, लोगों की जिंदगी से कर रहे खिलवाड़
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दिबियापुर। ब्लू है पानी पानी पानी....तेज म्यूजिक पर युवा और बच्चे अक्सर क्षेत्र के स्वीमिंग पूलों में मस्ती करते दिखाई देते हैं। गड्ढा खोदकर बनाए गए इन पूलों के संचालन में एनओसी से लेकर सुरक्षा के मानकों का पालन नहीं हो रहा। मोटा मुनाफा कमाने के चक्कर में स्वीमिंग पूल संचालक लोगों की जिंदगियों से खिलवाड़ करने में लगे हुए हैं।
गर्मियों के कारण पारा काफी ऊपर चढ़ गया है। क्षेत्र में कई स्थानों पर मानक विहीन स्वीमिंग पूलों का संचालन किया जा रहा है। मोटी कमाई के लिए बकायदा सोशल मीडिया पर प्रचार-प्रसार किया जा रहा है। इन स्वीमिंग पूलों में न तो कोई सुरक्षा के मानकों का पालन हो रहा है और न ही इनमें कोई सुरक्षा के इंतजाम हैं। यहां तक कि कोई हादसा होने पर बचाव के इंतजाम तक नहीं हैं।
भीषण गर्मी के बीच बच्चे गांवों में नहरों और बंबों में करतब दिखाते नजर आते हैं। गर्मी में युवाओं और बच्चों को अब कस्बों और गांवों में बने स्वीमिंग पूल आकर्षित करते नजर आ रहे हैं। उत्साह को दोगुना करने के लिए स्वीमिंग पूल संचालकों की ओर से डीजे की तेज धुन पर पानी में झूमने की व्यवस्था भी कर रखी गई है।
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स्लाइडर पर फिसलकर पानी में गोते लगाने की व्यवस्था उत्साह को चरम पर पहुंचा देती है, लेकिन सुरक्षा मानकों को ताक पर रखकर स्वीमिंग पूल के संचालक मोटे मुनाफे के लिए पूल में एक साथ 50 से 100 युवाओं और बच्चों के तैरने की अनुमति दे देते हैं। एक घंटे की मस्ती के लिए प्रवेश शुल्क के नाम पर 100 रुपये तक लिए जा रहे हैं।
स्वीमिंग पूलों में पानी की सफाई और दुर्घटना होने पर लाइफ गार्ड की सुविधा भी नहीं है। बस गड्ढा खोदकर पानी भर दिया गया है। बताते हैं कि गड्ढे में भरा पानी सप्ताह में एक बार बदलकर इतिश्री कर ली जाती है। सोशल मीडिया पर अक्सर आने वाली जानकारी के बावजूद जिले के अधिकारी संचालित हो रहे स्वीमिंग पूलों की जानकारी होने से इन्कार करते नजर आते हैं।
स्वीमिंग पूल संचालित करने के लिए लेनी होती है एनओसी
स्वीमिंग पूल संचालित करने के लिए फायर ब्रिगेड और पुलिस कार्यालय से अनापत्ति प्रमाण पत्र लेना होता है। इन विभागों से एनओसी मिलने के बाद जिला स्पोर्ट्स स्टेडियम से संबंधित विभाग को निर्धारित पंजीयन का शुल्क जमा करना होता है। इसके बाद विभागीय अधिकारियों की ओर से मानकों की जांच होती है और जांच में सभी मानक पूरे पाए जाने पर अनुमति मिल जाती है।
इंसेट-- --
ये हैं स्वीमिंग पूल संचालित करने के मानक
- खेल निदेशालय से पूल का संचालन शुरू करने के पूर्व अनुमति लेनी जरूरी।
- स्वीमिंग पूल में दो आक्सीजन सिलिंडर, दो आर्टीफिशियल ब्रीथिंग मशीन भी होने चाहिए।
- पूल में फिल्टर प्लांट होना चाहिए, जो प्रत्येक दिन चार से पांच घंटे तक चलाया जाए।
- पूल चलाने के लिए सबसे पहले स्वीमिंग कोच की जरूरत होती है। स्वीमिंग कोच को राष्ट्रीय या राज्य स्तर का खिलाड़ी होना आवश्यक है।
- प्रत्येक स्वीमिंग पूल के लिए भारतीय खेल प्राधिकरण से प्रमाणित दो लाइफ गार्ड होने चाहिए।
वर्जन
जिले में स्वीमिंग पूल संचालन को लेकर न तो किसी ने एनओसी के लिए आवेदन किया है और न ही फायर विभाग से किसी ने एनओसी ली है। बिना एनओसी के यदि कोई संचालित कर रहा है तो वह अवैध माना जाएगा।
- तेजवीर सिंह, सीएफओ, औरैया।
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गर्मियों के कारण पारा काफी ऊपर चढ़ गया है। क्षेत्र में कई स्थानों पर मानक विहीन स्वीमिंग पूलों का संचालन किया जा रहा है। मोटी कमाई के लिए बकायदा सोशल मीडिया पर प्रचार-प्रसार किया जा रहा है। इन स्वीमिंग पूलों में न तो कोई सुरक्षा के मानकों का पालन हो रहा है और न ही इनमें कोई सुरक्षा के इंतजाम हैं। यहां तक कि कोई हादसा होने पर बचाव के इंतजाम तक नहीं हैं।
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भीषण गर्मी के बीच बच्चे गांवों में नहरों और बंबों में करतब दिखाते नजर आते हैं। गर्मी में युवाओं और बच्चों को अब कस्बों और गांवों में बने स्वीमिंग पूल आकर्षित करते नजर आ रहे हैं। उत्साह को दोगुना करने के लिए स्वीमिंग पूल संचालकों की ओर से डीजे की तेज धुन पर पानी में झूमने की व्यवस्था भी कर रखी गई है।
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स्लाइडर पर फिसलकर पानी में गोते लगाने की व्यवस्था उत्साह को चरम पर पहुंचा देती है, लेकिन सुरक्षा मानकों को ताक पर रखकर स्वीमिंग पूल के संचालक मोटे मुनाफे के लिए पूल में एक साथ 50 से 100 युवाओं और बच्चों के तैरने की अनुमति दे देते हैं। एक घंटे की मस्ती के लिए प्रवेश शुल्क के नाम पर 100 रुपये तक लिए जा रहे हैं।
स्वीमिंग पूलों में पानी की सफाई और दुर्घटना होने पर लाइफ गार्ड की सुविधा भी नहीं है। बस गड्ढा खोदकर पानी भर दिया गया है। बताते हैं कि गड्ढे में भरा पानी सप्ताह में एक बार बदलकर इतिश्री कर ली जाती है। सोशल मीडिया पर अक्सर आने वाली जानकारी के बावजूद जिले के अधिकारी संचालित हो रहे स्वीमिंग पूलों की जानकारी होने से इन्कार करते नजर आते हैं।
स्वीमिंग पूल संचालित करने के लिए लेनी होती है एनओसी
स्वीमिंग पूल संचालित करने के लिए फायर ब्रिगेड और पुलिस कार्यालय से अनापत्ति प्रमाण पत्र लेना होता है। इन विभागों से एनओसी मिलने के बाद जिला स्पोर्ट्स स्टेडियम से संबंधित विभाग को निर्धारित पंजीयन का शुल्क जमा करना होता है। इसके बाद विभागीय अधिकारियों की ओर से मानकों की जांच होती है और जांच में सभी मानक पूरे पाए जाने पर अनुमति मिल जाती है।
इंसेट
ये हैं स्वीमिंग पूल संचालित करने के मानक
- खेल निदेशालय से पूल का संचालन शुरू करने के पूर्व अनुमति लेनी जरूरी।
- स्वीमिंग पूल में दो आक्सीजन सिलिंडर, दो आर्टीफिशियल ब्रीथिंग मशीन भी होने चाहिए।
- पूल में फिल्टर प्लांट होना चाहिए, जो प्रत्येक दिन चार से पांच घंटे तक चलाया जाए।
- पूल चलाने के लिए सबसे पहले स्वीमिंग कोच की जरूरत होती है। स्वीमिंग कोच को राष्ट्रीय या राज्य स्तर का खिलाड़ी होना आवश्यक है।
- प्रत्येक स्वीमिंग पूल के लिए भारतीय खेल प्राधिकरण से प्रमाणित दो लाइफ गार्ड होने चाहिए।
वर्जन
जिले में स्वीमिंग पूल संचालन को लेकर न तो किसी ने एनओसी के लिए आवेदन किया है और न ही फायर विभाग से किसी ने एनओसी ली है। बिना एनओसी के यदि कोई संचालित कर रहा है तो वह अवैध माना जाएगा।
- तेजवीर सिंह, सीएफओ, औरैया।