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Auraiya News: एआरटीओ में गबन की जांच रिपोर्ट पहुंची उप परिवहन आयुक्त के पास

Sun, 28 Apr 2024 11:40 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sun, 28 Apr 2024 11:40 PM IST
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The investigation report of embezzlement in ARTO reached the Deputy Transport Commissioner
संवाद न्यूज एजेंसी
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औरैया। पांच जनवरी को भाऊपुर निवासी शिवकांत पाठक व उनकी पत्नी के आत्महत्या करने के बाद मिले सुसाइड नोट में एआरटीओ कार्यालय चालान गबन का मामला सामने आया। लगभग चार माह बाद कानपुर आरटीओ के अधिकारियों ने जांच पूरी कर उप परिवहन आयुक्त डॉ. विजय कुमार को रिपोर्ट सौंपी।
ककोर स्थित एआरटीओ कार्यालय में नकद जमा होने वाले चालान की धनराशि बैंक में जमा न करते हुए जेब में डाली गई। इसके लिए शहर के दिबियापुर रोड स्थित बैंक में भी एआरटीओ कार्यालय के कर्मचारियों ने सांठगांठ की। यहां पर जब मामला बढ़ा तो कुछ लोगों ने भाऊपुर गांव निवासी शिवकांत पर गबन की धनराशि जमा करने का दबाव बनाया। शिवकांत बैंक में आउट सोर्सिंग पर तैनात थे।
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शिवकांत व उनकी पत्नी के आत्महत्या के बाद परिजनों ने पूरा मामला पुलिस को बताते हुए एआरटीओ कार्यालय के लेखाकार ललितकांत व नेता मिश्रा पर दबाव बनाने का आरोप लगाया। पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर ललितकांत को जेल भेज दिया। वहीं गबन की तस्वीर धुंधली रही। चार माह कानपुर आरटीओ के अधिकारियों ने ककोर मुख्यालय के एआरटीओ कार्यालय की खाक छानी। दस्तावेज जुटाए। इसी बीच गबन की धनराशि चोरी छिपे किसी ने बैंक में जमा भी कर दी। इसे जांच टीम के अधिकारियों ने भी स्वीकारा है।
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आखिरकार वह कौन है जिसने यह धनराशि जमा कराई। कई पहलु अभी भी धुंधले हैं। इस कड़ी में एक कर्मचारी लगातार शंका के घेरे में है। चर्चा है कि अगस्त में सेवानिवृत्त होने जा रहे इस कर्मचारी ने मामला दबाने के लिए सभी पैतरें आजमाए हैं। हालांकि जांच रिपोर्ट उप परिवहन आयुक्त के पास पहुंच चुकी है। अब कार्रवाई की तलवार लटक रही है। सूत्रों की माने तो इस रिपोर्ट में देर-सवेर गबन की धनराशि जमा हो जाने का भी जिक्र है। ऐसे में वह कौन था जिसने यह धनराशि जमा की। अभी तस्वीर स्पष्ट होना बाकी है।
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जांच टीम के मुताबिक तीन लेखाकार व संबंधित अधिकारी कार्रवाई की जद में हैं
वर्ष 2023 में एक साल के चालान अदायगी के जांच टीम द्वारा जुटाए गए दस्तावेज में काफी कुछ अनियमितता मिली हैं। इस दौरान एआरटीओ कार्यालय के तीन लेखाकार बदले गए। मामला अधिकारियों के भी संज्ञान में रहा। सात से आठ लोगों पर कार्रवाई की तलवार लटक रही है। सबसे बड़ी बात धनराशि को जमा करने में किसका हाथ है यह भी स्पष्ट हो जाएगा। विभागीय अधिकारियों व उच्चाधिकारियों की कार्रवाई भविष्य के लिए नजीर भी पेश कर सकती है।
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चर्चा यह भी रही कि गबन की धनराशि जमा कराने के लिए हुआ चंदा
एआरटीओ कार्यालय में हुए गबन को लेकर तमाम तरह की चर्चाएं चल रही हैं। एक चर्चा यह भी है कि एक कर्मचारी ने गबन की धनराशि जमा करने के लिए कई लोगों से संपर्क किया। इसमें अधिकारियों से लेकर कर्मचारियों से भी मदद ली गई। एक पूर्व अधिकारी से भी रुपयों की मांग हुई। मंशा बस एक किसी तरह मामला दब जाए।

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बोले जिम्मेदार-----
‘जांच रिपोर्ट उप परिवहन आयुक्त को सौंप दी गई है। देर सवेर चालान की धनराशि जमा करना पाया गया है। तीन लेखाकार इस अनियमितता के दौरान बदले हैं। अब उच्चाधिकारी ही मामले में दोषी का निर्धारण व कार्रवाई करेंगे।’-प्रदीप कुमार, लेखाधिकारी आरटीओ कानपुर कार्यालय
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