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Auraiya News: औरैया जिले के गठन से 37 दिन पहले बने थे कारोबारी भाइयों के शस्त्र लाइसेंस

Tue, 09 Dec 2025 12:00 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया Updated Tue, 09 Dec 2025 12:00 AM IST
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The brothers' arms licenses were issued 37 days before the formation of Auraiya district.
औरैया। एनआईए जांच की जद में आए सराफा कारोबारी तीन भाइयों में से दो के लाइसेंस औरैया जिले के गठन से ठीक पहले बने थे। शस्त्र लाइसेंस स्वीकृत होने के बाद महज 37 दिन बाद ही औरैया जिले का गठन हो गया। ये महज एक संयोग था या इसके पीछे भी कोई कहानी है, ये तो स्वीकृत पत्रावलियां मिलने के बाद ही सामने आ सकता है।
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इटावा से काटकर 17 सितंबर 1997 को औरैया जिले का गठन किया गया था। इसके बाद से यहां जिला प्रशासन भी अलग हो गया। इससे पहले इटावा जिला प्रशासन ही सभी कार्य देखता था। जिले के गठन से ठीक पहले ही एनआईए जांच में फंसे कारोबारी भाइयों के शस्त्र लाइसेंस इटावा जिला मजिस्ट्रेट कार्यालय से जारी किए गए थे। इसमें अजयकांत वर्मा उर्फ शशि का लाइसेंस आठ अगस्त 1997 को तो वहीं कमलकांत वर्मा का लाइसेंस 10 अगस्त 1997 को जारी किया गया था।
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जिले के गठन से ठीक पहले इन लाइसेंसों का जारी होना कहीं न कहीं संदेह पैदा करता है। हालांकि मामला 28 वर्ष पुराना है, ऐसे में शस्त्र लाइसेंस स्वीकृति की पत्रावलियों को ढूंढना बहुत मुश्किल काम है। इटावा से औरैया जिले को केवल शस्त्र लाइसेंस के थानावार रजिस्टर ही सौंपे गए थे, पत्रावलियां उपलब्ध नहीं कराई गईं थीं। ऐसे में अब औरैया जिला प्रशासन को इटावा से मदद लेनी होगी।
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विवाद के दौरान लाइसेंस जारी होना खड़े करता है सवाल
वर्ष 1997 के दौरान सराफा कारोबारी भाइयों का परिवार बड़ी उथल-पुथल से जूझ रहा था। पिता महेश चंद्र वर्मा का नाम पुरुलिया कांड से जुड़ने के संदेह के बाद वे पुलिस के रडार पर थे। इसके बाद उनके पिता ने खुदकुशी कर ली। ऐसे में इसी साल दोनों भाइयों के शस्त्र लाइसेंस जारी होने कहीं न कहीं सवाल खड़े कर रहा है।

एनआईए जांच की जद में आए कारोबारी भाइयों के शस्त्र लाइसेंसों की जांच की जा रही है। कहीं भी संदेह होने पर जांच कर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
-डॉ. इंद्रमणि त्रिपाठी, डीएम।
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