{"_id":"667c6d2ecbfc9646c6091ce4","slug":"students-are-turning-towards-professional-courses-to-make-a-career-auraiya-news-c-211-1-aur1005-113739-2024-06-27","type":"story","status":"publish","title_hn":"Auraiya News: कॅरियर बनाने के लिए व्यासायिक कोर्सों की ओर छात्र कर रहे रुख","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Auraiya News: कॅरियर बनाने के लिए व्यासायिक कोर्सों की ओर छात्र कर रहे रुख
विज्ञापन
औरैया। इंटर पास करने वाले छात्र-छात्राएं करियर को लेकर अधिक चिंतित है। शायद यही कारण है कि परंपरागत कोर्स से अधिक व्यावसायिक कोर्सों में प्रवेश देखने को मिल रहे हैं। एक जुलाई से कक्षाएं शुरू होने है लेकिन अधिकांश कॉलेज में परंपरागत कोर्सों की 40 से 50 फीसदी भी सीटें ही भरी जा सकी है।
जनपद में 75 के करीब डिग्री कॉलेज संचालित हो रहे है। इनमें बीए, बीएससी, बीकॉम की लगभग 21 हजार के करीब सीटें है जबकि वर्ष 2024-25 में यूपी बोर्ड से परीक्षा पास करने वाले इंटर के छात्रों की संख्या लगभग 16 हजार से अधिक है। वहीं सीबीएसई बोर्ड के परीक्षार्थियों की संख्या भी एक हजार से अधिक ही होगी।
परीक्षा परिणाम घोषित होने के बाद निजी डिग्री कॉलेजों के संचालकों द्वारा काफी प्रयास किए जा रहे है, लेकिन आज भी वह सीटें भरने में कामयाब नहीं होते दिखे है। इंटर पास करने वाले अधिकांश छात्रों का परंपरागत कोर्स से मोहभंग हो गया है। अच्छी नौकरी पानी की चाह में वह व्यापारिक कोर्सों की ओर रुख करने लगे हैं। निजी और एडेड कॉलेजों में व्यावसायिक कोर्सों में अधिक आवेदन देखने को मिल रहे है।
विज्ञापन
कारण यह है कि व्यापारिक कोर्स करने के बाद युवाओं को नौकरी के लिए अधिक भटकना नहीं पड़ता है। वहीं व्यापारिक कोर्स करने के बाद कॉलेज स्तर पर आयोजित होने वाले रोजगार मेले में आसानी से प्लेसमेंट हो जाता है। अजीतमल डिग्री कॉलेज की बात करें तो इस बार भी एग्रीकल्चर में प्रवेश तेजी से हो रहे हैं। इधर, निजी कॉलेजों की बात करें तो वहां बीए, बीएससी की सीटें 50 प्रतिशत से अधिक खाली है। इस कारण संचालक चिंतित दिखाई देने लगे है।
तिलक महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. रवि कुमार ने बताया कि यह बात सही है कि रोजगार को लेकर युवा चिंतित है। इस कारण व्यावसायिक कोर्सों की ओर युवा रुख कर रहे है। हालांकि बीए, बीएससी की बात करें तो स्थिति बहुत अच्छी नहीं, लेकिन कमजोर भी नहीं कही जा सकती है। बीएड की सीटें तो स्वत: ही भर जाती है। एक एक निजी कॉलेज संचालक ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि इस बार सभी उन निजी डिग्री कॉलेजों की हालत बहुत खराअ है, जिनके पास व्यावसायिक कोर्स नहीं है। बीए, बीएससी की सीटें भरने के लिए किए गए प्रयास सफल होते नहीं दिखे है।
-- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -- -
गांव-गांव गईं थी कॉलेजों की टीमें
सीटों को भरने के लिए निजी कॉलेजों ने इस बार इंटर के परिणाम घोषित होते ही टीमें तैयार कर उनके क्षेत्र बांटते हुए रवाना किया था। गांव-गांव, घर-घर जाकर इंटर पास छात्रों से मुलाकात की थी। सुविधाएं बताते हुए निशुल्क प्रवेश पत्र दिए थे। वहीं फीस में छूट का आश्वासन दिया था। इसके बाद भी प्रवेश नहीं देखने को मिल रहे हैं।
विज्ञापन
जनपद में 75 के करीब डिग्री कॉलेज संचालित हो रहे है। इनमें बीए, बीएससी, बीकॉम की लगभग 21 हजार के करीब सीटें है जबकि वर्ष 2024-25 में यूपी बोर्ड से परीक्षा पास करने वाले इंटर के छात्रों की संख्या लगभग 16 हजार से अधिक है। वहीं सीबीएसई बोर्ड के परीक्षार्थियों की संख्या भी एक हजार से अधिक ही होगी।
विज्ञापन
परीक्षा परिणाम घोषित होने के बाद निजी डिग्री कॉलेजों के संचालकों द्वारा काफी प्रयास किए जा रहे है, लेकिन आज भी वह सीटें भरने में कामयाब नहीं होते दिखे है। इंटर पास करने वाले अधिकांश छात्रों का परंपरागत कोर्स से मोहभंग हो गया है। अच्छी नौकरी पानी की चाह में वह व्यापारिक कोर्सों की ओर रुख करने लगे हैं। निजी और एडेड कॉलेजों में व्यावसायिक कोर्सों में अधिक आवेदन देखने को मिल रहे है।
विज्ञापन
कारण यह है कि व्यापारिक कोर्स करने के बाद युवाओं को नौकरी के लिए अधिक भटकना नहीं पड़ता है। वहीं व्यापारिक कोर्स करने के बाद कॉलेज स्तर पर आयोजित होने वाले रोजगार मेले में आसानी से प्लेसमेंट हो जाता है। अजीतमल डिग्री कॉलेज की बात करें तो इस बार भी एग्रीकल्चर में प्रवेश तेजी से हो रहे हैं। इधर, निजी कॉलेजों की बात करें तो वहां बीए, बीएससी की सीटें 50 प्रतिशत से अधिक खाली है। इस कारण संचालक चिंतित दिखाई देने लगे है।
तिलक महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ. रवि कुमार ने बताया कि यह बात सही है कि रोजगार को लेकर युवा चिंतित है। इस कारण व्यावसायिक कोर्सों की ओर युवा रुख कर रहे है। हालांकि बीए, बीएससी की बात करें तो स्थिति बहुत अच्छी नहीं, लेकिन कमजोर भी नहीं कही जा सकती है। बीएड की सीटें तो स्वत: ही भर जाती है। एक एक निजी कॉलेज संचालक ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि इस बार सभी उन निजी डिग्री कॉलेजों की हालत बहुत खराअ है, जिनके पास व्यावसायिक कोर्स नहीं है। बीए, बीएससी की सीटें भरने के लिए किए गए प्रयास सफल होते नहीं दिखे है।
गांव-गांव गईं थी कॉलेजों की टीमें
सीटों को भरने के लिए निजी कॉलेजों ने इस बार इंटर के परिणाम घोषित होते ही टीमें तैयार कर उनके क्षेत्र बांटते हुए रवाना किया था। गांव-गांव, घर-घर जाकर इंटर पास छात्रों से मुलाकात की थी। सुविधाएं बताते हुए निशुल्क प्रवेश पत्र दिए थे। वहीं फीस में छूट का आश्वासन दिया था। इसके बाद भी प्रवेश नहीं देखने को मिल रहे हैं।