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Auraiya News: खेतों में भरा पानी देखकर बह रहे किसानों के असमान
Tue, 11 Aug 2026 12:14 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
Updated Tue, 11 Aug 2026 12:14 AM IST
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मुलायम
बिधूना। पांडु नदी के बढ़े जलस्तर ने आधा दर्जन से अधिक गांवों के दर्जनों किसानों को तबाही के मुहाने पर खड़ा कर दिया है। भरा पानी देखकर किसानों के अरमान बह रहे हैं। प्रशासन साइफन की सफाई कराकर जलनिकासी तो करा रहा है, लेकिन धीमी रफ्तार से पानी निकलने से धान की फसल के चौपट होने के आसार बन रहे हैं। उनके सामने फसल चौपट होने से रोटी के लाले पड़ते दिख रहे हैं।
दरअसल, किसी ने खेत में धान की रोपाई के लिए कर्ज लिया था तो किसी ने महंगे डीजल और मजदूरी का इंतजाम किया था। कई किसानों ने महीनों की मेहनत के बाद फसल को लहलहाते देखने का सपना संजोया था। ऐसे में पांडु नदी के बढ़े जलस्तर ने उनकी उम्मीदों पर ही पानी फेरना शुरू कर दिया है। रायपुर, कैथावा, पुरवा विधि, बरहार व अजीत पुरवा में 400 से 500 बीघा तक धान की फसल पानी में डूब गई है। खेतों में खड़ी फसल को डूबा देख किसानों का पसीना नहीं सूख रहा है।
रायपुर गांव की स्थिति सबसे ज्यादा खराब है। गांव के चारों ओर पानी भरा है और खेत तालाब जैसे नजर आ रहे हैं। धान के पौधे पानी में डूबे हैं। किसानों की नजरें अब आसमान से ज्यादा साइफन की ओर टिकी हैं कि कब पानी तेजी से निकलना शुरू होगा और कब उनकी मेहनत बच सकेगी। किसानों का कहना है कि हर साल बारिश के दौरान जलभराव की समस्या सामने आती है। इसके बावजूद समय पर साइफन की सफाई न होने से खामियाजा भुगतना पड़ रहा है।
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पांच दिन और पानी भरा रहा तो बर्बाद हो जाएगी फसल
करीब 15 बीघा धान की फसल पानी में डूबी है। किसान बड़ी मुश्किल से फसल तैयार करता है। खाद, बीज, मजदूरी और सिंचाई में हजारों रुपये खर्च हो जाते हैं। यदि पांच-छह दिन और खेतों में पानी भरा रहा तो धान की फसल पूरी तरह खराब हो सकती है।
-मुलायम सिंह, रायपुर
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करीब 70 बीघा धान की फसल जलमग्न है। एसडीएम दो दिन तक मौके पर रहे और पानी निकलवाने का प्रयास किया गया। इससे कुछ पानी निकला भी है, लेकिन अभी भी खेतों में पानी भरा है। किसी भी तरह तेजी से जल निकासी कराई जाए।
-मोहन सिंह
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क्षेत्र में करीब 500 बीघा धान की फसल पानी में डूबी है। साइफन की थोड़ी सफाई होने से कुछ जगह पानी निकलना शुरू हुआ है, लेकिन पूरी सफाई के बिना खेतों का पानी निकलना मुश्किल है। इससे फसल खराब होने का खतरा बढ़ गया है।
-अशोक
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किसानों की फसल से पानी की निकासी के लिए हर संभव प्रयास किया जा रहा है। साइफन और नदी की सफाई लगातार कराई जा रही है। पोकलेन मशीन बराबर काम कर रही और कुछ पानी कम हुआ है।
-कमल कुमार सिंह, एसडीएम
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दरअसल, किसी ने खेत में धान की रोपाई के लिए कर्ज लिया था तो किसी ने महंगे डीजल और मजदूरी का इंतजाम किया था। कई किसानों ने महीनों की मेहनत के बाद फसल को लहलहाते देखने का सपना संजोया था। ऐसे में पांडु नदी के बढ़े जलस्तर ने उनकी उम्मीदों पर ही पानी फेरना शुरू कर दिया है। रायपुर, कैथावा, पुरवा विधि, बरहार व अजीत पुरवा में 400 से 500 बीघा तक धान की फसल पानी में डूब गई है। खेतों में खड़ी फसल को डूबा देख किसानों का पसीना नहीं सूख रहा है।
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रायपुर गांव की स्थिति सबसे ज्यादा खराब है। गांव के चारों ओर पानी भरा है और खेत तालाब जैसे नजर आ रहे हैं। धान के पौधे पानी में डूबे हैं। किसानों की नजरें अब आसमान से ज्यादा साइफन की ओर टिकी हैं कि कब पानी तेजी से निकलना शुरू होगा और कब उनकी मेहनत बच सकेगी। किसानों का कहना है कि हर साल बारिश के दौरान जलभराव की समस्या सामने आती है। इसके बावजूद समय पर साइफन की सफाई न होने से खामियाजा भुगतना पड़ रहा है।
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पांच दिन और पानी भरा रहा तो बर्बाद हो जाएगी फसल
करीब 15 बीघा धान की फसल पानी में डूबी है। किसान बड़ी मुश्किल से फसल तैयार करता है। खाद, बीज, मजदूरी और सिंचाई में हजारों रुपये खर्च हो जाते हैं। यदि पांच-छह दिन और खेतों में पानी भरा रहा तो धान की फसल पूरी तरह खराब हो सकती है।
-मुलायम सिंह, रायपुर
करीब 70 बीघा धान की फसल जलमग्न है। एसडीएम दो दिन तक मौके पर रहे और पानी निकलवाने का प्रयास किया गया। इससे कुछ पानी निकला भी है, लेकिन अभी भी खेतों में पानी भरा है। किसी भी तरह तेजी से जल निकासी कराई जाए।
-मोहन सिंह
क्षेत्र में करीब 500 बीघा धान की फसल पानी में डूबी है। साइफन की थोड़ी सफाई होने से कुछ जगह पानी निकलना शुरू हुआ है, लेकिन पूरी सफाई के बिना खेतों का पानी निकलना मुश्किल है। इससे फसल खराब होने का खतरा बढ़ गया है।
-अशोक
किसानों की फसल से पानी की निकासी के लिए हर संभव प्रयास किया जा रहा है। साइफन और नदी की सफाई लगातार कराई जा रही है। पोकलेन मशीन बराबर काम कर रही और कुछ पानी कम हुआ है।
-कमल कुमार सिंह, एसडीएम

मुलायम

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