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सद्कर्म से आंकी जाती है कमाई- आचार्य
अमर उजाला ब्यूरो औरैया
Updated Sun, 27 Dec 2015 10:57 PM IST
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व्यक्ति की कमाई कागज के टुकड़ों से नहीं उसके सद्कर्म (पाप और पुण्य) से आंकी जाती है। जीवन में जैसी कमाई करोगे उसका फल भी वैसा ही मिलेगा। अपने कर्म को प्रधानता में लाओ, भगवन अपने आप मिल जाएंगे। यह बात भागवतकथा के दौरान कथावाचक आचार्य संजय ने भक्तों से कही।
नगर के पुराना बरधायी बाजार में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा महोत्सव के पांचवे दिन आचार्य पंडित संजय द्विवेदी भक्तों से कहा कि व्यक्ति को जीवन में चार चीजों को ध्यान रखना चाहिए। मनुष्य को जहां काई लगी हो वहां नहीं जाना चाहिए। वृक्ष में लगे गोंद को नहीं तोड़ना चाहिए।
ऊसर भूमि पर कभी नहीं बैठना चाहिए और न ही मासिक धर्म के दौरान माताओं को भोजन बनाना चाहिए। जीवन को बेहतर बनाने के लिए जो भी संभव है कृत्य करना चाहिए। कभी किसी का अनादर न करें। भगवान सभी के पाप-पुण्य का हिसाब रखता है।
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उन्होंने कहा कि जैसा आंखों में चश्मा लगाओगे वैसा ही दिखाई देगा। जिसने भगवान की भक्ति का चश्मा लगा लिया उसका जीवन धन्य हो जाएगा। उन्होंने कहाकि व्यक्ति भले ही भगवान को भूल जाए लेकिन भगवान अपने भक्त को कभी नहीं भूलते है। कथा श्रवण के दौरान सैकड़ों की संख्या में भक्तगण मौजूद रहे।
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नगर के पुराना बरधायी बाजार में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा महोत्सव के पांचवे दिन आचार्य पंडित संजय द्विवेदी भक्तों से कहा कि व्यक्ति को जीवन में चार चीजों को ध्यान रखना चाहिए। मनुष्य को जहां काई लगी हो वहां नहीं जाना चाहिए। वृक्ष में लगे गोंद को नहीं तोड़ना चाहिए।
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ऊसर भूमि पर कभी नहीं बैठना चाहिए और न ही मासिक धर्म के दौरान माताओं को भोजन बनाना चाहिए। जीवन को बेहतर बनाने के लिए जो भी संभव है कृत्य करना चाहिए। कभी किसी का अनादर न करें। भगवान सभी के पाप-पुण्य का हिसाब रखता है।
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उन्होंने कहा कि जैसा आंखों में चश्मा लगाओगे वैसा ही दिखाई देगा। जिसने भगवान की भक्ति का चश्मा लगा लिया उसका जीवन धन्य हो जाएगा। उन्होंने कहाकि व्यक्ति भले ही भगवान को भूल जाए लेकिन भगवान अपने भक्त को कभी नहीं भूलते है। कथा श्रवण के दौरान सैकड़ों की संख्या में भक्तगण मौजूद रहे।