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Auraiya News: सर्दी के साथ नवजात बच्चों में हाइपोथर्मिया का खतरा बढ़ा

Sat, 20 Jan 2024 02:59 AM IST
कानपुर ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया Updated Sat, 20 Jan 2024 02:59 AM IST
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Risk of hypothermia in newborns increases with cold
फोटो19एयूआरपी 02- 100 शैया में इमरजेंसी वार्ड में भर्ती नवजात के स्वास्थ्य का आकलन करते चिकित्सक। संवाद
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फोटो19एयूआरपी 03 जानकारी देते मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. अरविंद कुशवाहा। संवाद

सर्दी के साथ नवजात बच्चों में हाइपोथर्मिया का खतरा बढ़ा
- मां-बच्चे के साथ खुद का रखें ख्याल, दूध पर भी पड़ता असर, नवजात शिशु से लेकर एक साल के बच्चों को ठंड लगने के बढ़े मामले

संवाद न्यूज एजेंसी



औरैया। सर्दी बढ़ने के साथ ही बच्चों में हाइपोथर्मिया का खतरा बढ़ा है। चिकित्सक इसे चिंताजनक बता रहे हैं। डॉक्टरों के अनुसार जरा सी अनदेखी नवजात शिशु के लिए जानलेवा साबित हो सकती है। सर्दियों के मौसम में हाइपोथर्मिया का खतरा बढ़ जाता है। मां को बच्चों के साथ-साथ खुद को भी ठंड से बचाने की चिकित्सक सलाह दे रहे हैं।

बच्चों और बुजुर्गों के शरीर का तापमान जब बहुत कम हो जाता है तो हार्ट, नर्वस सिस्टम समेत कई अंग ढंग से काम नहीं करते हैं। हाइपोथर्मिया की स्थिति उस समय उत्पन्न होती है जब शरीर तेजी से गर्मी खो देता है। ठंडे पानी में रहने के कारण भी यह स्थिति पैदा होती है। एक स्थिति ऐसी आती है जब ब्लड प्रेशर पूरी तरह से गिर जाता है। इससे बचने के लिए बच्चों को गर्माहट की जरूरत होती है। समय पर बच्चों को यदि अस्पताल लाया जाए तो दवाओं के माध्यम से उपचार के जरिए इस तापमान को बढ़ाया जा सकता है। यदि समय पर उपचार न मिले तो यह स्थिति जानलेवा भी साबित हो जाती है। मेडिकल कालेज के प्राचार्य डॉ. अरविंद कुशवाहा ने बताया कि निमोनिया के तीन बच्चे इन दिनों भर्ती हैं। सर्दी में बच्चों की देखभाल में जरा सी लापरवाही परेशानी का सबब बनती है। बच्चों को जन्म देने वाली महिलाओं को कपड़े धोने से लेकर अन्य कामों से परहेज करना जरूरी है। चिकित्सकों का कहना है कि ठंड लगने से मां के दूध की गुणवत्ता प्रभावित होती है। ऐसे में मां का स्तनपान करने वाले बच्चे पर भी असर पड़ता है।
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ये हैं लक्षण



- सांस लेने की गति कम होना
- बेहोशी जैसा लगना



- शिशुओं का चेहरा लाल और त्वचा ठंडी पड़ जाना

ऐसी स्थिति में कंगारू मदर केयर विधि है संजीवनी

जिला अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. पंकज राजपूत ने बताया कि हल्के हाइपोथर्मिया में शरीर का तापमान 32 से 35 डिग्री सेल्सियस होता है। 28 डिग्री सेल्सियस से नीचे के तापमान पर बेहद गंभीर स्थिति मानी जाती है। शिशुओं में हाइपोथर्मिया की स्थिति होने पर कंगारू मदर केयर विधि शिशु का तापमान व्यवस्थित करने में मददगार साबित होती है। इस तकनीक में नवजात शिशु (बगैर कपड़े के) को मां के सीने पर कंगारू की तरह चिपकाकर लिटाया जाता है। करीब एक घंटे रोजाना यह किया जाता है। जिससे शिशु को मां के शरीर की गर्माहट मिल सके। इसमें शिशु के हाथ-पैर व पीठ को साफ कपड़ों से ढंकना चाहिए। शिशु को गर्माहट मिलती रहे और तापमान का संतुलन बना रहे।
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