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Auraiya News: ककराही में कुटीर उद्योग के लिए आवंटित हुई जमीन पर कर दी गई प्लाटिंग
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औरैया। वैसुंधरा के अलावा सात अन्य पंचायतें ककराही, जमुहा, जमुही, लखनापुर, कैंजरी, सेहुद और उमरी में भी मानकों को ताक पर रखकर फर्जी पट्टे दिए गए थे।
वैसुंधरा में फर्जी पट्टों को लेकर सदर तहसील की सात सदस्यीय टीम की जांच रिपोर्ट ने सभी को चौंकाया लेकिन इससे कहीं ज्यादा गड़बड़झाला सात अन्य पंचायतों में है। सूत्रों की मानें तो ककराही ग्राम पंचायत में छह एकड़ जमीन को कुटीर उद्योग के लिए आवंटित किया गया था। लेकिन यहां उद्योग लगाने की जगह प्लाटिंग करा दी गई। भवन किराए पर उठा दिए गए। इसमें बैंक तक संचालित हो रहे हैं। पेट्रोल पंप भी चल रहे हैं। प्लाटिंग के जरिए मोटा मुनाफा कमाया गया। सरकारी संपत्ति की बोली लगाकर बेशकीमती जमीन की बिक्री कर दी गई।
सात सदस्यीय जांच टीम ने वैसुंधरा में जमीन का फर्जीवाड़ा 150 करोड़ का आंका है। इस बीच सूत्रों की मानें तो वैसुंधरा ग्राम पंचायत की तरह सात अन्य पंचायतों में भी फर्जीवाड़ा हुआ था। यहां भी भूमाफिया हरकत में आए और कई पट्टे मानकों को ताक पर रखकर कर दिए गए। सूत्रों की माने तो इन पंचायतों की जमीनों के अभिलेखों की जांच भी शुरू हो सकती है। हो सकता है कि यह एक हजार करोड़ रुपये से ज्यादा का घोटाला बैठे।
सुरक्षित जमीन फर्जी पट्टे कर आवंटित कर दी गई
यहां जमीन को संक्रमणीय करते हुए प्लाटिंग का धंधा खूब परवान चढ़ा, लेकिन यह सब महज गिने-चुने लोगों तक ही सीमित रहा। इन लोगों ने फर्जीवाड़ा कर करोड़ों रुपये की जमीन हथिया ली। इसमें कहीं न कहीं तत्कालीन अधिकारी व कर्मचारी भी शामिल थे। सात पंचायतों में सुरक्षित जमीन जैसे चरागाह, खलिहान, मरघट, कब्रिस्तान व खाद के गड्ढों को फर्जी पट्टे दिखाकर आवंटित कर दिया गया।
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धनबल से मजबूत इन लोगों ने मामले को कभी उजागर नहीं होने दिया गया। सरकारी तंत्र में वैसुंधरा ग्राम पंचायत के मामले जैसा गठजोड़ रहा। सूत्रों की मानें तो इन सात पंचायतों में फर्जी पट्टों की जांच हुई तो मामला कई बड़ा निकलेगा। इन पंचायतों में सैंकड़ों एकड़ जमीन पर प्लॉटिंग किए जाने की बात सामने आई है।
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पूर्व के फर्जीवाड़ों में जिला प्रशासन ने कसा था मजबूत शिकंजा
2022 में ही सेहुद में पकड़ी गई थी सरकारी जमीन पर अवैध प्लाॅटिंग, चला था बुलडोजर
सदर तहसील की पांच सदस्यीय टीम ने साल 2022 में सेहुद ग्राम पंचायत में सरकारी जमीन पर अवैध प्लाॅटिंग का मामला पकड़ा था। कड़ी कार्रवाई करते हुए तत्कालीन अधिकारियों ने जेसीबी से अवैध निर्माण तुड़वाए थे। यह मामला तब उजागर हुआ था, जब सेहुद ग्राम पंचायत में पुलिस के मालखाना व ककोर थाना के लिए जमीन आवंटित की गई थी। इसके बाद सरकारी जमीन की पैमाइश के दौरान अवैध प्लाॅटिंग पकड़ी गई थी। इसमें कई भूमाफिया भी सामने आए थे। हालांकि यह मामला अब ठंडे बस्ते में है। जबकि मामला करोड़ों का था। कई लोगों ने प्लाॅट खरीदे थे। उन्हें भूमाफिया ने चूना लगाया था।
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फोटो-08एयूआरपी 18- 27 फरवरी 2023 के अंक में सेहुद व उमरी में पकड़े गए फर्जीवाड़े की प्रकाशित खबर। संवाद
साल 2023 में 30 करोड़ की 17 एकड़ जमीन का पकड़ा गया था फर्जीवाड़ा
दिबियापुर से सटी ग्राम पंचायत सेहुद और उमरी में सरकारी जमीन पर अवैध पट्टों का मामला सामने आया। 30 करोड़ रुपये कीमत वाली 17 एकड़ जमीन पर फर्जी आख्या लगा लोगों ने लाभ लिया। साल 2023 में मामला उजागर होने पर जमीन पर दोबारा से ग्राम पंचायत के नाम दर्ज कराया गया। इस कवायद में कब्जा करने वालों को नोटिस दिए गए थे। इसके बाद जिला प्रशासन की प्रभावी पहल ने फर्जीवाड़े के ताबूत में कील ठोक दी थी। हालांकि मामले में दोषी तत्कालीन अधिकारियों को लेकर अभी तक कुछ खास देखने को नहीं मिला है।
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कंचौसी व सेहुद में यूएम पावर लिमिटेड के स्थापना की कवायद में खुला फर्जीवाड़ा
वैसुंधरा की तरह भाग्यनगर ब्लाक की ग्राम पंचायत कंचौसी व सेहुद में खूब फर्जीवाड़े का खेल चला था। यहां यूएम पावर लिमिटेड के स्थापना को लेकर कवायद शुरू हुई थी। इसी दौरान साल 2011 में एक चकबंदी सीओ ने सेहुद ग्राम सभा की 54 एकड़ भूमि और कंचौसी ग्राम सभा की 52 एकड़ भूमि 10 लोगों के नाम फर्जी प्रविष्टि में अंकित कर दी थी। साल 2012 में यह मामला तब खुला था जब इन ग्राम पंचायतों के लोगों ने धरना-प्रदर्शन किया था। जिला प्रशासन की संजीदगी के बीच दोनों ग्राम सभाओं की चकबंदी को निरस्त कर दिया गया था। उस समय चकबंदी सीओ के खिलाफ रिपोर्ट कराने के साथ ही बर्खास्तगी की कार्रवाई भी की गई थी। 10 कब्जेदारों के खिलाफ मुकदमा भी दर्ज कराया गया था।
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वैसुंधरा में फर्जी पट्टों को लेकर सदर तहसील की सात सदस्यीय टीम की जांच रिपोर्ट ने सभी को चौंकाया लेकिन इससे कहीं ज्यादा गड़बड़झाला सात अन्य पंचायतों में है। सूत्रों की मानें तो ककराही ग्राम पंचायत में छह एकड़ जमीन को कुटीर उद्योग के लिए आवंटित किया गया था। लेकिन यहां उद्योग लगाने की जगह प्लाटिंग करा दी गई। भवन किराए पर उठा दिए गए। इसमें बैंक तक संचालित हो रहे हैं। पेट्रोल पंप भी चल रहे हैं। प्लाटिंग के जरिए मोटा मुनाफा कमाया गया। सरकारी संपत्ति की बोली लगाकर बेशकीमती जमीन की बिक्री कर दी गई।
सात सदस्यीय जांच टीम ने वैसुंधरा में जमीन का फर्जीवाड़ा 150 करोड़ का आंका है। इस बीच सूत्रों की मानें तो वैसुंधरा ग्राम पंचायत की तरह सात अन्य पंचायतों में भी फर्जीवाड़ा हुआ था। यहां भी भूमाफिया हरकत में आए और कई पट्टे मानकों को ताक पर रखकर कर दिए गए। सूत्रों की माने तो इन पंचायतों की जमीनों के अभिलेखों की जांच भी शुरू हो सकती है। हो सकता है कि यह एक हजार करोड़ रुपये से ज्यादा का घोटाला बैठे।
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सुरक्षित जमीन फर्जी पट्टे कर आवंटित कर दी गई
यहां जमीन को संक्रमणीय करते हुए प्लाटिंग का धंधा खूब परवान चढ़ा, लेकिन यह सब महज गिने-चुने लोगों तक ही सीमित रहा। इन लोगों ने फर्जीवाड़ा कर करोड़ों रुपये की जमीन हथिया ली। इसमें कहीं न कहीं तत्कालीन अधिकारी व कर्मचारी भी शामिल थे। सात पंचायतों में सुरक्षित जमीन जैसे चरागाह, खलिहान, मरघट, कब्रिस्तान व खाद के गड्ढों को फर्जी पट्टे दिखाकर आवंटित कर दिया गया।
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धनबल से मजबूत इन लोगों ने मामले को कभी उजागर नहीं होने दिया गया। सरकारी तंत्र में वैसुंधरा ग्राम पंचायत के मामले जैसा गठजोड़ रहा। सूत्रों की मानें तो इन सात पंचायतों में फर्जी पट्टों की जांच हुई तो मामला कई बड़ा निकलेगा। इन पंचायतों में सैंकड़ों एकड़ जमीन पर प्लॉटिंग किए जाने की बात सामने आई है।
पूर्व के फर्जीवाड़ों में जिला प्रशासन ने कसा था मजबूत शिकंजा
2022 में ही सेहुद में पकड़ी गई थी सरकारी जमीन पर अवैध प्लाॅटिंग, चला था बुलडोजर
सदर तहसील की पांच सदस्यीय टीम ने साल 2022 में सेहुद ग्राम पंचायत में सरकारी जमीन पर अवैध प्लाॅटिंग का मामला पकड़ा था। कड़ी कार्रवाई करते हुए तत्कालीन अधिकारियों ने जेसीबी से अवैध निर्माण तुड़वाए थे। यह मामला तब उजागर हुआ था, जब सेहुद ग्राम पंचायत में पुलिस के मालखाना व ककोर थाना के लिए जमीन आवंटित की गई थी। इसके बाद सरकारी जमीन की पैमाइश के दौरान अवैध प्लाॅटिंग पकड़ी गई थी। इसमें कई भूमाफिया भी सामने आए थे। हालांकि यह मामला अब ठंडे बस्ते में है। जबकि मामला करोड़ों का था। कई लोगों ने प्लाॅट खरीदे थे। उन्हें भूमाफिया ने चूना लगाया था।
फोटो-08एयूआरपी 18- 27 फरवरी 2023 के अंक में सेहुद व उमरी में पकड़े गए फर्जीवाड़े की प्रकाशित खबर। संवाद
साल 2023 में 30 करोड़ की 17 एकड़ जमीन का पकड़ा गया था फर्जीवाड़ा
दिबियापुर से सटी ग्राम पंचायत सेहुद और उमरी में सरकारी जमीन पर अवैध पट्टों का मामला सामने आया। 30 करोड़ रुपये कीमत वाली 17 एकड़ जमीन पर फर्जी आख्या लगा लोगों ने लाभ लिया। साल 2023 में मामला उजागर होने पर जमीन पर दोबारा से ग्राम पंचायत के नाम दर्ज कराया गया। इस कवायद में कब्जा करने वालों को नोटिस दिए गए थे। इसके बाद जिला प्रशासन की प्रभावी पहल ने फर्जीवाड़े के ताबूत में कील ठोक दी थी। हालांकि मामले में दोषी तत्कालीन अधिकारियों को लेकर अभी तक कुछ खास देखने को नहीं मिला है।
कंचौसी व सेहुद में यूएम पावर लिमिटेड के स्थापना की कवायद में खुला फर्जीवाड़ा
वैसुंधरा की तरह भाग्यनगर ब्लाक की ग्राम पंचायत कंचौसी व सेहुद में खूब फर्जीवाड़े का खेल चला था। यहां यूएम पावर लिमिटेड के स्थापना को लेकर कवायद शुरू हुई थी। इसी दौरान साल 2011 में एक चकबंदी सीओ ने सेहुद ग्राम सभा की 54 एकड़ भूमि और कंचौसी ग्राम सभा की 52 एकड़ भूमि 10 लोगों के नाम फर्जी प्रविष्टि में अंकित कर दी थी। साल 2012 में यह मामला तब खुला था जब इन ग्राम पंचायतों के लोगों ने धरना-प्रदर्शन किया था। जिला प्रशासन की संजीदगी के बीच दोनों ग्राम सभाओं की चकबंदी को निरस्त कर दिया गया था। उस समय चकबंदी सीओ के खिलाफ रिपोर्ट कराने के साथ ही बर्खास्तगी की कार्रवाई भी की गई थी। 10 कब्जेदारों के खिलाफ मुकदमा भी दर्ज कराया गया था।