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पंचनद बैराज परियोजना एक कदम आगे बढ़ी

Tue, 23 Feb 2021 11:44 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Tue, 23 Feb 2021 11:44 PM IST
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pachnad bairaj yojna badhi
औरैया। पंचनद बैराज के लिए प्रदेश सरकार ने बजट में 102 करोड़ 74 लाख 16 हजार रुपये की पहली किस्त स्वीकृत कर दी है। इसके साथ बैराज बनने की दिशा में एक कदम और बढ़ गया है। इससे औरैया, इटावा, जालौन, कानपुर देहात, बुंदेलखंड का विकास होगा। बैराज के साथ 19 किलोमीटर लंबी अंडरग्राउंड नहर भी बनेगी। करीब 80 हजार हेक्टेयर भूमि को पानी मिलेगा।
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सिंधु, क्वारी, यमुना, चंबल और पहुंज नदी का संगम औरैया, जालौन और इटावा को जोड़ता है। उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश की सीमाओं को भी जोड़ता है। 1976 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने पंचनद बैराज की घोषणा की थी। केंद्र में कांग्रेस की सरकारें रहीं लेकिन पंचनद बैराज को मंजूरी नहीं मिल सकी। सांसद डॉ. रामशंकर कठेरिया ने संसद में इस मुद्दे को उठाया और मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश को परियोजना के संबंध में बताकर पहल की। अंजाम ये रहा कि सालों से लंबित इस परियोजना पर भाजपा सरकार में तेजी से काम हुआ। निरीक्षण के बाद डीपीआर भी बन गया है। डीपीआर में परियोजना की लागत 2700 करोड़ रुपये आंकी गई है।
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पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा
परियोजना के सहायक अभियंता अवनीश यादव ने बताया कि पंचनद बैराज से 19 किमी लंबी नहर निकलेगी। इसकी चौड़ाई 20-25 मीटर होगी। नहर से इटावा, औरैया, कानपुर देहात व जालौन की हजारों हेक्टेयर भूमि सिंचित होगी। इससे किसान लाभान्वित होंगे और उनकी आय में भी वृद्धि होगी। पंचनद का धार्मिक महत्व भी है। पंचनद बैराज और अंडरग्राउंड नहर बनने से बीहड़ के लोगों का जीवन सुधरेगा और पर्यटन को भी बढ़ावा मिल जाएगा।
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सिंचाई की समस्या से निजात मिलेगी
क्षेत्रीय सांसद डॉ. रामशंकर कठेरिया ने बताया कि बजट स्वीकृति से पहले पंचनद परियोजना के संबंध में मुख्यमंत्री से मुलाकात की थी। परियोजना की पहली किस्त स्वीकृत हो चुकी है। परियोजना एक कदम आगे बढ़ चुकी है। जल्द ही बैराज बनने की प्रक्रिया शुरू होगी। जिससे न केवल औरैया जनपद बल्कि इटावा के अलावा बुंदेलखंड के जिलों का भी विकास होगा और सिंचाई की समस्या से किसानों को निजात मिलेगी।

शिक्षा की दृष्टि से भी लाभकारी
पर्यावरणविद ब्रजेश दीक्षित ने बताया कि बैराज शिक्षा की दृष्टि से भी लाभकारी होगा। प्रोजेक्ट बनाने के लिए जिन छात्रों को बाहर जाना पड़ता था, पंचनद बैराज बनने के बाद उन्हें बाहर जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। सिंचाई की समस्या भी समाप्त होगी।
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