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Auraiya News: पुलिस पर हमले के आरोपी को किशोर घोषित करने का आदेश निरस्त
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औरैया। पॉक्सो कोर्ट ने छह साल पहले हुए दोहरे हत्याकांड और पुलिस पर फायरिंग के मामले में एक आरोपी को किशोर अपचारी घोषित करने का आदेश खारिज कर दिया है। अदालत ने पाया कि आरोपी को किशोर मानने का आधार बना जन्म प्रमाण पत्र फर्जी था। यह प्रमाण पत्र सक्षम प्राधिकारी की ओर से पहले ही निरस्त किया जा चुका था।
शहर के नारायनपुर मोहल्ले में 15 मार्च 2020 को मंजुल चौबे और उसकी चचेरी बहन सुधा की हत्या कर दी गई थी। हत्या की सूचना पर उपनिरीक्षक नीरज त्रिपाठी बल के साथ मौके पर पहुंचे तो पूर्व एमएलसी कमलेश पाठक, पूर्व ब्लॉक प्रमुख संतोष पाठक और रामू पाठक सहित नौ नामजद व 10 से 15 आरोपियों ने पुलिस पर फायरिंग की। मामले में कोतवाली पुलिस ने उपनिरीक्षक की तहरीर पर मुकदमा दर्ज किया था। किशोर न्याय बोर्ड ने 12 अक्तूबर 2021 को फायरिंग मामले के एक आरोपी को घटना के दिन 16 वर्ष एक दिन का मानकर किशोर अपचारी घोषित किया था।
राज्य सरकार ने इस आदेश के खिलाफ जिला शासकीय अधिवक्ता (दंड) के माध्यम से दांडिक अपील प्रस्तुत की। अपील की सुनवाई में सामने आया कि आरोपी की मां ने बेटे को नाबालिग साबित करने के लिए विट्टा प्राथमिक स्कूल नारायनपुर का फर्जी जन्म प्रमाण पत्र बनवाया था। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया कि इस नाम से कोई विद्यालय संचालित नहीं है। नगर पालिका परिषद से मिलीभगत कर बनवाए गए जन्म प्रमाण पत्र को उपजिलाधिकारी की जांच के बाद शासन ने निरस्त कर दिया था। मामले में किशोर की मां व अन्य के खिलाफ थाना कोतवाली में मुकदमा भी दर्ज कराया गया था।
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विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो एक्ट) अखिलेश्वर प्रसाद मिश्र ने गुरुवार को दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद राज्य की अपील स्वीकार की। अदालत ने 12 अक्तूबर 2021 के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसके तहत आरोपी को किशोर घोषित किया गया था। पत्रावली किशोर न्याय बोर्ड को वापस भेजी गई है। बोर्ड को जेजे एक्ट की धारा 94 के तहत दो महीनों में नए सिरे से आयु निर्धारण का आदेश पारित करने का निर्देश दिया गया है।
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शहर के नारायनपुर मोहल्ले में 15 मार्च 2020 को मंजुल चौबे और उसकी चचेरी बहन सुधा की हत्या कर दी गई थी। हत्या की सूचना पर उपनिरीक्षक नीरज त्रिपाठी बल के साथ मौके पर पहुंचे तो पूर्व एमएलसी कमलेश पाठक, पूर्व ब्लॉक प्रमुख संतोष पाठक और रामू पाठक सहित नौ नामजद व 10 से 15 आरोपियों ने पुलिस पर फायरिंग की। मामले में कोतवाली पुलिस ने उपनिरीक्षक की तहरीर पर मुकदमा दर्ज किया था। किशोर न्याय बोर्ड ने 12 अक्तूबर 2021 को फायरिंग मामले के एक आरोपी को घटना के दिन 16 वर्ष एक दिन का मानकर किशोर अपचारी घोषित किया था।
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राज्य सरकार ने इस आदेश के खिलाफ जिला शासकीय अधिवक्ता (दंड) के माध्यम से दांडिक अपील प्रस्तुत की। अपील की सुनवाई में सामने आया कि आरोपी की मां ने बेटे को नाबालिग साबित करने के लिए विट्टा प्राथमिक स्कूल नारायनपुर का फर्जी जन्म प्रमाण पत्र बनवाया था। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया कि इस नाम से कोई विद्यालय संचालित नहीं है। नगर पालिका परिषद से मिलीभगत कर बनवाए गए जन्म प्रमाण पत्र को उपजिलाधिकारी की जांच के बाद शासन ने निरस्त कर दिया था। मामले में किशोर की मां व अन्य के खिलाफ थाना कोतवाली में मुकदमा भी दर्ज कराया गया था।
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विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो एक्ट) अखिलेश्वर प्रसाद मिश्र ने गुरुवार को दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद राज्य की अपील स्वीकार की। अदालत ने 12 अक्तूबर 2021 के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसके तहत आरोपी को किशोर घोषित किया गया था। पत्रावली किशोर न्याय बोर्ड को वापस भेजी गई है। बोर्ड को जेजे एक्ट की धारा 94 के तहत दो महीनों में नए सिरे से आयु निर्धारण का आदेश पारित करने का निर्देश दिया गया है।