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Auraiya News: सहजन से बने पौष्टिक आहार का स्वाद चख रहे नौनिहाल और गर्भवती
Mon, 13 Oct 2025 11:08 PM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
Updated Mon, 13 Oct 2025 11:08 PM IST
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फोटो-13एयूआरपी07- बगीचे में सहजन का पेड़। संवाद
औरैया। बदलते दौर में लोग जंक फूड की ओर लालायित हैं। हर कोई इसका स्वाद चखने में जुटा है। बच्चे भी इसमें पीछे नहीं है। हालांकि यह उनकी सेहत के लिए नुकसानदायक है। ऐसे में आंगनबाड़ी केंद्रों में आने वाले पौष्टिक आहार को नया रूप दिया जा रहा है। यह पौष्टिक आहार न सिर्फ बच्चों बल्कि गर्भवती के लिए सेहतमंद है। औरैया जिले में बाल एवं पुष्टाहार विभाग में पौष्टिक आहार नए-नए लजीज व्यंजन तैयार कर बच्चों को परोस रहा है। इसमें सहजन से बने आहार लड्डू, पारा व अचार भी शामिल हैं। इस कार्य में स्वयं सेवी समूह की महिलाएं अपनी भागीदारी निभा रही हैं।
जिले के सात ब्लॉकों में 1300 से ज्यादा आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं। इन केंद्रों पर तीन साल तक के बच्चे आते हैं। वहां पर इन्हें उठने, बैठने, खेलने की आदत डाली जा रही है। साथ ही अक्षर ज्ञान किट के जरिए कराया जा रहा है। विभाग में आने वाले पौष्टिक आहार को बच्चे खाने से परहेज करते हैं। क्योंकि उनके अंदर जंक फूड पहली पसंद बन चुका है। इसे देखते हुए विभाग में आने वाले पौष्टिक आहार को नए लजीज व्यंजनों को आकार देकर बच्चों को परोस रहा है। इस कार्य में स्वयं सेवी समूह की महिलाएं सहयोग कर रही हैं।
जन जागृति सेवा समिति की सुमन चतुर्वेदी बताती हैं कि आज का समाज जंक फूड की ओर भाग रहा है। ऐसे निवाले से पौष्टिकता खत्म होती जा रही है। इसे देखते हुए सहजन एक महत्वपूर्ण विकल्प मिला है। यह बच्चों की पर्याप्त पोषण देता है। वह बताती हैं कि उनका समूह सहजन की पत्तियों को सुखाकर पाउडर बना रहा है। इससे लड्डू, पारा, मालपुआ व अचार समेत अन्य सामग्री तैयार की जा रही है। बाद में इसे आंगनबाड़ी केंद्रों पर भेजा जा रहा है। बच्चों व गर्भवती को ये व्यंजन परोसे जा रहे हैं। इससे उन्हें पर्याप्त पोषण मिल सके। साथ ही इस कार्य में लगी महिलाओं को रोजगार भी मिल रहा है।
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सहजन का बगीचा किया तैयार, प्रत्येक गांव तक रोपण
औतों गांव की रहने वाली सुमन चतुर्वेदी बताती हैं कि उन्होंने इस प्रयोग को सफल बनाने के लिए सहजन का बगीचा तैयार किया है। जिसमें 25 से ज्यादा सहजन के पेड़ तैयार हो चुके हैं। अच्छी खासी पत्तियां इन पेड़ों से निकल रही हैं। कुपोषण को रोकने के लिए इस पौधे की पत्तियों का आहार महत्वपूर्ण है। प्रत्येक गांव में सहजन का पौधारोपण कर महिलाओं को जागरूक किया जा रहा है। इसकी शुरुआत गांव के आंगनबाड़ी केंद्र से की जा रही है।
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ऑनलाइन शॉपिंग वेबसाइट पर जल्द बिकेगा सहजन चूर्ण
सुमन चतुर्वेदी ने बताया कि उन्होंने व्यापारिक साइट अमेजान, फ्लिपकार्ट समेत अन्य प्लेटफार्म पर संपर्क किया है। जहां पर उनके सहजन पाउडर को जगह दी जाएगी। लोग इन साइटों के जरिए सहजन पाउडर घरों पर मंगवा सकेंगे। समूह की महिलाएं इस काम में जुटी हैं।
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क्या है सहजन के फायदे
सहजन का सेवन करने से कई फायदे होते हैं। यह रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है। ब्लड शुगर नियंत्रित करता है। दिल के स्वास्थ्य का समर्थन करता है। पाचन में सुधार करता है। इसके अलावा, इसमें मौजूद कैल्शियम और फास्फोरस हड्डियों को मजबूत बनाते हैं जबकि विटामिन ए और एंटीऑक्सीडेंट त्वचा और बालों के लिए फायदेमंद हैं। सहजन में प्रोटीन, विटामिन (A, C, B2, B3) और खनिज (आयरन, कैल्शियम, पोटैशियम, मैग्नीशियम) भरपूर मात्रा में होते हैं।
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जिले के सात ब्लॉकों में 1300 से ज्यादा आंगनबाड़ी केंद्र संचालित हैं। इन केंद्रों पर तीन साल तक के बच्चे आते हैं। वहां पर इन्हें उठने, बैठने, खेलने की आदत डाली जा रही है। साथ ही अक्षर ज्ञान किट के जरिए कराया जा रहा है। विभाग में आने वाले पौष्टिक आहार को बच्चे खाने से परहेज करते हैं। क्योंकि उनके अंदर जंक फूड पहली पसंद बन चुका है। इसे देखते हुए विभाग में आने वाले पौष्टिक आहार को नए लजीज व्यंजनों को आकार देकर बच्चों को परोस रहा है। इस कार्य में स्वयं सेवी समूह की महिलाएं सहयोग कर रही हैं।
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जन जागृति सेवा समिति की सुमन चतुर्वेदी बताती हैं कि आज का समाज जंक फूड की ओर भाग रहा है। ऐसे निवाले से पौष्टिकता खत्म होती जा रही है। इसे देखते हुए सहजन एक महत्वपूर्ण विकल्प मिला है। यह बच्चों की पर्याप्त पोषण देता है। वह बताती हैं कि उनका समूह सहजन की पत्तियों को सुखाकर पाउडर बना रहा है। इससे लड्डू, पारा, मालपुआ व अचार समेत अन्य सामग्री तैयार की जा रही है। बाद में इसे आंगनबाड़ी केंद्रों पर भेजा जा रहा है। बच्चों व गर्भवती को ये व्यंजन परोसे जा रहे हैं। इससे उन्हें पर्याप्त पोषण मिल सके। साथ ही इस कार्य में लगी महिलाओं को रोजगार भी मिल रहा है।
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सहजन का बगीचा किया तैयार, प्रत्येक गांव तक रोपण
औतों गांव की रहने वाली सुमन चतुर्वेदी बताती हैं कि उन्होंने इस प्रयोग को सफल बनाने के लिए सहजन का बगीचा तैयार किया है। जिसमें 25 से ज्यादा सहजन के पेड़ तैयार हो चुके हैं। अच्छी खासी पत्तियां इन पेड़ों से निकल रही हैं। कुपोषण को रोकने के लिए इस पौधे की पत्तियों का आहार महत्वपूर्ण है। प्रत्येक गांव में सहजन का पौधारोपण कर महिलाओं को जागरूक किया जा रहा है। इसकी शुरुआत गांव के आंगनबाड़ी केंद्र से की जा रही है।
ऑनलाइन शॉपिंग वेबसाइट पर जल्द बिकेगा सहजन चूर्ण
सुमन चतुर्वेदी ने बताया कि उन्होंने व्यापारिक साइट अमेजान, फ्लिपकार्ट समेत अन्य प्लेटफार्म पर संपर्क किया है। जहां पर उनके सहजन पाउडर को जगह दी जाएगी। लोग इन साइटों के जरिए सहजन पाउडर घरों पर मंगवा सकेंगे। समूह की महिलाएं इस काम में जुटी हैं।
क्या है सहजन के फायदे
सहजन का सेवन करने से कई फायदे होते हैं। यह रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है। ब्लड शुगर नियंत्रित करता है। दिल के स्वास्थ्य का समर्थन करता है। पाचन में सुधार करता है। इसके अलावा, इसमें मौजूद कैल्शियम और फास्फोरस हड्डियों को मजबूत बनाते हैं जबकि विटामिन ए और एंटीऑक्सीडेंट त्वचा और बालों के लिए फायदेमंद हैं। सहजन में प्रोटीन, विटामिन (A, C, B2, B3) और खनिज (आयरन, कैल्शियम, पोटैशियम, मैग्नीशियम) भरपूर मात्रा में होते हैं।

फोटो-13एयूआरपी07- बगीचे में सहजन का पेड़। संवाद