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Auraiya News: बीमार पुत्री को पैदल चलाकर देवकली मंदिर तक पहुंची मां
Thu, 31 Jul 2025 12:50 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
Updated Thu, 31 Jul 2025 12:50 AM IST
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बीमार पुत्री को पैदल लेकर जातीं मां व बहन।
- फोटो : बीमार पुत्री को पैदल लेकर जातीं मां व बहन।
औरैया। मरम्मत के कारण यमुना नदी पर बंद हुए आवागमन से मरीजों को दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। यमुना पार के एक गांव की युवती आठ दिन से बीमार है।
उसे उपचार के लिए मां औरैया लाना चाहती थी, लेकिन बंद होने के कारण चार दिन तक वह पुल से नहीं निकल पाईं। बुधवार को वह किसी तरह मिन्नत कर बीमार बेटी को पैदल चलाकर देवकली मंदिर तक पहुंचीं।
जालौन जनपद के कुठौंद क्षेत्र के सीपुरा बघौली गांव निवासी प्रीती (19) को पेट की बीमारी है। कुठौंद व आसपास के अस्पतालों में इलाज के बाद भी उसे राहत नहीं मिली। परिजन उसे औरैया के डॉक्टर के यहां उपचार कराने के लिए निकले, लेकिन पुल का रास्ता बंद होने से किसी ने उसे पुल पार करने नहीं दिया।
प्रीती व उनकी मां सुनीता ने बताया कि वह लोग सात दिन से लगातार गांव से पुल तक आ रही थीं, लेकिन सनगढ़ बैरियर पर बैठे पुलिस वाले वापस कर देते थे। बुधवार को तकलीफ ज्यादा बढ़ने पर वह पुत्री को लेकर फिर पुल पर पहुंचीं।
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वहां मौजूद पुलिस वालों से मिन्नत की। तब उन्होंने उसे किसी तरह पैदल जाने दिया। वह पैदल बीमार पुत्री को देवकली मंदिर तक लेकर आईं। इसके बाद ऑटो से शहर के डॉक्टर के पास पहुंचीं।
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उसे उपचार के लिए मां औरैया लाना चाहती थी, लेकिन बंद होने के कारण चार दिन तक वह पुल से नहीं निकल पाईं। बुधवार को वह किसी तरह मिन्नत कर बीमार बेटी को पैदल चलाकर देवकली मंदिर तक पहुंचीं।
जालौन जनपद के कुठौंद क्षेत्र के सीपुरा बघौली गांव निवासी प्रीती (19) को पेट की बीमारी है। कुठौंद व आसपास के अस्पतालों में इलाज के बाद भी उसे राहत नहीं मिली। परिजन उसे औरैया के डॉक्टर के यहां उपचार कराने के लिए निकले, लेकिन पुल का रास्ता बंद होने से किसी ने उसे पुल पार करने नहीं दिया।
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प्रीती व उनकी मां सुनीता ने बताया कि वह लोग सात दिन से लगातार गांव से पुल तक आ रही थीं, लेकिन सनगढ़ बैरियर पर बैठे पुलिस वाले वापस कर देते थे। बुधवार को तकलीफ ज्यादा बढ़ने पर वह पुत्री को लेकर फिर पुल पर पहुंचीं।
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वहां मौजूद पुलिस वालों से मिन्नत की। तब उन्होंने उसे किसी तरह पैदल जाने दिया। वह पैदल बीमार पुत्री को देवकली मंदिर तक लेकर आईं। इसके बाद ऑटो से शहर के डॉक्टर के पास पहुंचीं।