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Auraiya News: पुस्तक लेखन में कैलाश नाथ द्विवेदी का पुरस्कार के लिए चयन
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संवाद न्यूज एजेंसी
अजीतमल। कस्बे के मोहल्ला सूर्यनगर निवासी पूर्व प्राचार्य डॉ. कैलाश नाथ द्विवेदी को सरकार की ओर से संस्कृति साहित्य की पुस्तक कालिदासीयम लेखन में विशेष पुरस्कार के लिए चयनित किया गया है। सरकार के इस निर्णय पर सेवानिवृत शिक्षक ने जहां खुशी जताई।
साहित्य की पुस्तक कालिदासीयम के लिए सरकार से 21 लाख रुपये के विशेष पुरस्कार से सम्मानित सेवानिवृत शिक्षक और संस्कृत के विद्वान डॉ. कैलाश नाथ द्विवेदी से अमर उजाला ने बातचीत की। उन्होंने बताया कि उनका सफर अजीतमल कस्बा के जनता महाविद्यालय में संस्कृति विभाग के विभागाध्यक्ष के रूप में 1966 से शुरू होकर 1990 तक रहा।
बताया कि इसके बाद उनका चयन प्राचार्य पद के लिए जनपद जालौन के कोंच कस्बे मेंं स्थित मथुरा प्रसाद स्नातकोत्तर महाविद्यालय के लिए हुआ। वहां पर वह 1990 से लेकर 2002 तक शिक्षण कार्य देखते रहे। वहीं से वह सेवानिवृत्त भी हुए। उन्होंने बताया कि कालिदासीयम पुस्तक में भारत की स्थिति का विशेष वर्णन किया गया है। इस पुस्तक में भारत की आर्थिक, राजनैतिक, धार्मिक, भौगोलिक, तथा सांस्कृतिक स्थितियों का शोधपूर्ण निरूपण किया गया है।
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उन्होंने बताया कि 1970 से लगातार वह शोधकार्य व पुस्तकें लिखने का कार्य कर रहे हैं। उनके द्वारा अभी तक कानपुर तथा बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के 24 छात्र शोधकार्य कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि संस्कृत भाषा के प्रति लोगों में दिलचस्पी न के बराबर है। उन्होंने बताया कि आज के परिपेक्ष्य में संस्कृत हो या हिंदी साहित्य प्रेमियों के प्रति सरकार भी उतना ध्यान नहीं दे रही है। जितना उसे देना चाहिए।
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अजीतमल। कस्बे के मोहल्ला सूर्यनगर निवासी पूर्व प्राचार्य डॉ. कैलाश नाथ द्विवेदी को सरकार की ओर से संस्कृति साहित्य की पुस्तक कालिदासीयम लेखन में विशेष पुरस्कार के लिए चयनित किया गया है। सरकार के इस निर्णय पर सेवानिवृत शिक्षक ने जहां खुशी जताई।
साहित्य की पुस्तक कालिदासीयम के लिए सरकार से 21 लाख रुपये के विशेष पुरस्कार से सम्मानित सेवानिवृत शिक्षक और संस्कृत के विद्वान डॉ. कैलाश नाथ द्विवेदी से अमर उजाला ने बातचीत की। उन्होंने बताया कि उनका सफर अजीतमल कस्बा के जनता महाविद्यालय में संस्कृति विभाग के विभागाध्यक्ष के रूप में 1966 से शुरू होकर 1990 तक रहा।
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बताया कि इसके बाद उनका चयन प्राचार्य पद के लिए जनपद जालौन के कोंच कस्बे मेंं स्थित मथुरा प्रसाद स्नातकोत्तर महाविद्यालय के लिए हुआ। वहां पर वह 1990 से लेकर 2002 तक शिक्षण कार्य देखते रहे। वहीं से वह सेवानिवृत्त भी हुए। उन्होंने बताया कि कालिदासीयम पुस्तक में भारत की स्थिति का विशेष वर्णन किया गया है। इस पुस्तक में भारत की आर्थिक, राजनैतिक, धार्मिक, भौगोलिक, तथा सांस्कृतिक स्थितियों का शोधपूर्ण निरूपण किया गया है।
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उन्होंने बताया कि 1970 से लगातार वह शोधकार्य व पुस्तकें लिखने का कार्य कर रहे हैं। उनके द्वारा अभी तक कानपुर तथा बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के 24 छात्र शोधकार्य कर चुके हैं। उन्होंने कहा कि संस्कृत भाषा के प्रति लोगों में दिलचस्पी न के बराबर है। उन्होंने बताया कि आज के परिपेक्ष्य में संस्कृत हो या हिंदी साहित्य प्रेमियों के प्रति सरकार भी उतना ध्यान नहीं दे रही है। जितना उसे देना चाहिए।