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Auraiya News: 10 करोड़ की सड़क के चक्कर में फंसीं 400 करोड़ से ज्यादा की औद्योगिक इकाइयां
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औरैया। प्लास्टिक सिटी में 10 करोड़ की लागत से बनने वाली सड़क के फेर में 400 करोड़ से ज्यादा की 10 औद्योगिक इकाइयों का संचालन अटका है। उद्यमी सड़क जर्जर होने के चलते इकाइयों के संचालन की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं। महज एक सड़क बनने के इंतजार में एक दशक से अधिक समय बीत गया है। सरकारी मशीनरी केवल पत्राचार में ही बंधकर रह गई है।
औरैया-दिबियापुर रोड से कंचौसी के बीच सड़क के पास उप्र राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण (तत्कालीन यूपीएसआईडीसी) ने वर्ष 2006 में 331.58 एकड़ जमीन औद्योगिक क्षेत्र के लिए निर्धारित की थी। वर्ष 2012 में तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने इसे प्लास्टिक सिटी का नाम दिया। सूबे में औद्योगीकरण का माहौल बनने पर यहां इकाइयों की स्थापना शुरू हुई। परियोजना की शुरुआत के 19 साल बाद करीब 10 इकाइयां उत्पादन के लिए तैयार हो चुकी हैं। वहीं कुछ में अभी काम चल रहा है लेकिन प्लास्टिक सिटी की मुख्य सड़क गहरे गड्ढों में तब्दील है। तकरीबन एक किलोमीटर लंबी सड़क इतनी बदहाल है कि उद्यमी इकाइयों के संचालन की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं। उन्हें डर है कि इस बदहाल सड़क से फैक्टरी तक कच्चे माल की आपूर्ति और फिर तैयार उत्पादों को भेजना कड़ी चुनौती होगी।
यूपीएसआईडीसी ने प्लास्टिक सिटी की स्थापना के दौरान एक दशक पहले इस सड़क का निर्माण कराया था। साल दर साल वाहनों के आवागमन के बीच सड़क जर्जर हो गई। उद्योग बंधु की बैठकों में उद्यमियों की ओर से लगातार इस सड़क की बदहाली का मुद्दा उठाया जा रहा था। इस मसले को लेकर एक साल पहले नवंबर 2024 में उद्यमियों की मांग पर पीडब्ल्यूडी की ओर से शासन में सड़क निर्माण का प्रस्ताव भेजा गया था। हालांकि आज तक यह प्रस्ताव स्वीकृत नहीं हो सका।
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प्लास्टिक सिटी में स्टील फैबि्रकेशन की बड़ी इकाइयां लग चुकी हैं। हर्षिता इंटरप्राइजेज की ओर से लगी 40 करोड़ लागत वाली इस इकाई में 70 से ज्यादा कर्मचारी काम करेंगे। इस इकाई में स्टील फैबि्रकेशन का काम होगा। ग्रिल से लेकर बर्तन, खिड़कियां व घरेलू सामग्री इस इकाई में तैयार होगी। वहीं फार्मा क्राफ्ट इंडिया की ओर से 48 करोड़ की इकाई भी तैयार हो चुकी है। यहां पर भी 100 के करीब लोगों को रोजगार मुहैया होगा। इलेक्ट्रॉनिक कचरे के निस्तारण के लिए तैयार हो रही 40 करोड़ की इकाई एएमएस कंप्लीट आईटी सॉल्यूशन कंपनी में ई-वेस्ट को रिसाइकिल किया जाएगा। धरातल पर इस कंपनी की बुनियाद तैयार हो चुकी है। फर्नीचर की 10 करोड़ की कंपनी एमबीएफ इंडस्ट्रीज बनकर तैयार हो गई है। एक दिसंबर को इस कंपनी के शुभारंभ को लेकर पूजन होने जा रहा है। वहीं प्लास्टिक उत्पाद की दो अन्य फैक्टरियां भी बनकर तैयार हैं।
प्लास्टिक सिटी में बड़ी इकाई की बात करें तो रिस्टोर हेल्थ मेडीकेयर प्राइवेट लिमिटेड की ओर से वाहन स्क्रैप सेंटर बड़ी सौगात है। ये प्रदेश का सबसे बड़ा वाहन स्क्रैप सेंटर है। प्लास्टिक सिटी में यह इकाई बनकर तैयार है। इसके शुभ मुहूर्त का इंतजार किया जा रहा है। जरूरी मशीनें भी जुटा ली गई हैं। कंपनी के सुपरवाइजर संदीप राजपूत का कहना है कि सेंटर में एक दिन में 400 वाहन स्क्रैप करने की क्षमता होगी। जिस सड़क पर प्लास्टिक सिटी बसी है, वह ककोर को कंचौसी से जोड़ती है। यह सड़क पहले लोक निर्माण विभाग के अधीन थी। बाद में प्लास्टिक सिटी बनाए जाने के चलते इसे यूपीएसआईडीसी को दे दिया गया है। इसके बाद यूपीएसआईडीसी ने करीब एक किलोमीटर सड़क का निर्माण भी एक दशक पहले कराया। अब दोनों विभाग एक दूसरे पर सड़क निर्माण की जिम्मेदारी डाल रहे हैं। इससे अब तक काम लटका हुआ है।
फैक्टरी बनकर तैयार हो गई है। मशीनें लगाई जा रही हैं। 30 नवंबर को पूजन के बाद कंपनी संचालन की तैयारी है। प्लास्टिक सिटी की जर्जर मुख्य सड़क को दुरुस्त नहीं किया जा सका है। ये ही सबसे बड़ा संकट है।- आशुतोष दुबे
एक दिसंबर को एमबीएफ इंडस्ट्रीज के शुभारंभ का शुभ मुहूर्त है। प्लास्टिक सिटी की मुख्य सड़क के गड्ढों को ठीक नहीं किया जा सका है। मालढुलाई में दिक्कत होगी। बस यही गड्ढेदार सड़क कारोबार में रोड़ा बनी है।- गौरव दुबे
प्लास्टिक सिटी में इकाइयों का निर्माण तेजी से चल रहा है। कुछ का शुभारंभ होने जा रहा है। गड्ढों में तब्दील मुख्य सड़क को लेकर डीएम के जरिए मंडलायुक्त तक समस्या पहुंचाई गई है। जल्द ही इस समस्या कुछ समाधान निकाला जाएगा।-दुर्गेश कुमार, जीएम डीआईसी
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औरैया-दिबियापुर रोड से कंचौसी के बीच सड़क के पास उप्र राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण (तत्कालीन यूपीएसआईडीसी) ने वर्ष 2006 में 331.58 एकड़ जमीन औद्योगिक क्षेत्र के लिए निर्धारित की थी। वर्ष 2012 में तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने इसे प्लास्टिक सिटी का नाम दिया। सूबे में औद्योगीकरण का माहौल बनने पर यहां इकाइयों की स्थापना शुरू हुई। परियोजना की शुरुआत के 19 साल बाद करीब 10 इकाइयां उत्पादन के लिए तैयार हो चुकी हैं। वहीं कुछ में अभी काम चल रहा है लेकिन प्लास्टिक सिटी की मुख्य सड़क गहरे गड्ढों में तब्दील है। तकरीबन एक किलोमीटर लंबी सड़क इतनी बदहाल है कि उद्यमी इकाइयों के संचालन की हिम्मत नहीं जुटा पा रहे हैं। उन्हें डर है कि इस बदहाल सड़क से फैक्टरी तक कच्चे माल की आपूर्ति और फिर तैयार उत्पादों को भेजना कड़ी चुनौती होगी।
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यूपीएसआईडीसी ने प्लास्टिक सिटी की स्थापना के दौरान एक दशक पहले इस सड़क का निर्माण कराया था। साल दर साल वाहनों के आवागमन के बीच सड़क जर्जर हो गई। उद्योग बंधु की बैठकों में उद्यमियों की ओर से लगातार इस सड़क की बदहाली का मुद्दा उठाया जा रहा था। इस मसले को लेकर एक साल पहले नवंबर 2024 में उद्यमियों की मांग पर पीडब्ल्यूडी की ओर से शासन में सड़क निर्माण का प्रस्ताव भेजा गया था। हालांकि आज तक यह प्रस्ताव स्वीकृत नहीं हो सका।
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प्लास्टिक सिटी में स्टील फैबि्रकेशन की बड़ी इकाइयां लग चुकी हैं। हर्षिता इंटरप्राइजेज की ओर से लगी 40 करोड़ लागत वाली इस इकाई में 70 से ज्यादा कर्मचारी काम करेंगे। इस इकाई में स्टील फैबि्रकेशन का काम होगा। ग्रिल से लेकर बर्तन, खिड़कियां व घरेलू सामग्री इस इकाई में तैयार होगी। वहीं फार्मा क्राफ्ट इंडिया की ओर से 48 करोड़ की इकाई भी तैयार हो चुकी है। यहां पर भी 100 के करीब लोगों को रोजगार मुहैया होगा। इलेक्ट्रॉनिक कचरे के निस्तारण के लिए तैयार हो रही 40 करोड़ की इकाई एएमएस कंप्लीट आईटी सॉल्यूशन कंपनी में ई-वेस्ट को रिसाइकिल किया जाएगा। धरातल पर इस कंपनी की बुनियाद तैयार हो चुकी है। फर्नीचर की 10 करोड़ की कंपनी एमबीएफ इंडस्ट्रीज बनकर तैयार हो गई है। एक दिसंबर को इस कंपनी के शुभारंभ को लेकर पूजन होने जा रहा है। वहीं प्लास्टिक उत्पाद की दो अन्य फैक्टरियां भी बनकर तैयार हैं।
प्लास्टिक सिटी में बड़ी इकाई की बात करें तो रिस्टोर हेल्थ मेडीकेयर प्राइवेट लिमिटेड की ओर से वाहन स्क्रैप सेंटर बड़ी सौगात है। ये प्रदेश का सबसे बड़ा वाहन स्क्रैप सेंटर है। प्लास्टिक सिटी में यह इकाई बनकर तैयार है। इसके शुभ मुहूर्त का इंतजार किया जा रहा है। जरूरी मशीनें भी जुटा ली गई हैं। कंपनी के सुपरवाइजर संदीप राजपूत का कहना है कि सेंटर में एक दिन में 400 वाहन स्क्रैप करने की क्षमता होगी। जिस सड़क पर प्लास्टिक सिटी बसी है, वह ककोर को कंचौसी से जोड़ती है। यह सड़क पहले लोक निर्माण विभाग के अधीन थी। बाद में प्लास्टिक सिटी बनाए जाने के चलते इसे यूपीएसआईडीसी को दे दिया गया है। इसके बाद यूपीएसआईडीसी ने करीब एक किलोमीटर सड़क का निर्माण भी एक दशक पहले कराया। अब दोनों विभाग एक दूसरे पर सड़क निर्माण की जिम्मेदारी डाल रहे हैं। इससे अब तक काम लटका हुआ है।
फैक्टरी बनकर तैयार हो गई है। मशीनें लगाई जा रही हैं। 30 नवंबर को पूजन के बाद कंपनी संचालन की तैयारी है। प्लास्टिक सिटी की जर्जर मुख्य सड़क को दुरुस्त नहीं किया जा सका है। ये ही सबसे बड़ा संकट है।- आशुतोष दुबे
एक दिसंबर को एमबीएफ इंडस्ट्रीज के शुभारंभ का शुभ मुहूर्त है। प्लास्टिक सिटी की मुख्य सड़क के गड्ढों को ठीक नहीं किया जा सका है। मालढुलाई में दिक्कत होगी। बस यही गड्ढेदार सड़क कारोबार में रोड़ा बनी है।- गौरव दुबे
प्लास्टिक सिटी में इकाइयों का निर्माण तेजी से चल रहा है। कुछ का शुभारंभ होने जा रहा है। गड्ढों में तब्दील मुख्य सड़क को लेकर डीएम के जरिए मंडलायुक्त तक समस्या पहुंचाई गई है। जल्द ही इस समस्या कुछ समाधान निकाला जाएगा।-दुर्गेश कुमार, जीएम डीआईसी