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Auraiya News: आधी आबादी को महिला थाने पर नहीं भरोसा, साल भर में 46 केस
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औरैया। महिला उत्पीड़न के मामलों की सुनवाई के लिए जिले में महिला थाना है। यहां दर्ज मामलों की संख्या अन्य थानों की अपेक्षा बेहद कम है। महिला थाने में वर्ष 2024 में कुल 46 मामले पंजीकृत किए गए हैं।
अन्य थानों में महिला उत्पीड़न के लगभग इतने ही मामले एक माह में दर्ज हो रहे हैं। महिला थाने की अपेक्षा शिकायतकर्ता अन्य थानों पर अधिक विश्वास जता रहे हैं।
जनपद में महिला थाना कुछ साल सदर ब्लॉक परिसर में चला। जिला मुख्यालय ककोर में अपनी जमीन पर भवन बनने के बाद महिला थाना वहां पहुंच गया। महिला थाना इसलिए बनवाए गए थे कि महिला खुलकर यहां अपनी बात कह सकें। उन्हें शीघ्र न्याय मिल सके।
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जिला मुख्यालय ककोर में बने महिला थाना पर पीड़ित महिलाओं को भरोसा कम हो रहा है। वर्ष 2024 में जनवरी से लेकर दिसंबर तक महज 46 मुकदमे ही यहां दर्ज कराए गए हैं। लगभग हर महीने लगभग तीन से चार मामले पंजीकृत किए गए हैं।
अन्य थानों पर गौर करें तो प्रत्येक थानों में महिला उत्पीड़न व उनकी अन्य समस्याओं को लेकर हर महीने लगभग 30 से 40 मामले दर्ज किए गए हैं।
बताते हैं कि प्रत्येक रविवार को महिला थाने में प्रोजेक्ट नई किरण के तहत महिला उत्पीड़न के मामलों की सुनवाई होती है। दोनों पक्षों को आमने-सामने बैठाकर परिवार को जोड़ने के प्रयास किए जाते है। हर रविवार को 25 से 30 फाइलों पर सुनवाई के लिए लगाया जाता है। कुछ दंपती दोबारा साथ रहने को राजी हो जाते है और जो राजी नहीं होते उन मामलों में आखिरी रास्ता एफआईआर का होता है।
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अन्य थानों में महिला उत्पीड़न के लगभग इतने ही मामले एक माह में दर्ज हो रहे हैं। महिला थाने की अपेक्षा शिकायतकर्ता अन्य थानों पर अधिक विश्वास जता रहे हैं।
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जनपद में महिला थाना कुछ साल सदर ब्लॉक परिसर में चला। जिला मुख्यालय ककोर में अपनी जमीन पर भवन बनने के बाद महिला थाना वहां पहुंच गया। महिला थाना इसलिए बनवाए गए थे कि महिला खुलकर यहां अपनी बात कह सकें। उन्हें शीघ्र न्याय मिल सके।
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जिला मुख्यालय ककोर में बने महिला थाना पर पीड़ित महिलाओं को भरोसा कम हो रहा है। वर्ष 2024 में जनवरी से लेकर दिसंबर तक महज 46 मुकदमे ही यहां दर्ज कराए गए हैं। लगभग हर महीने लगभग तीन से चार मामले पंजीकृत किए गए हैं।
अन्य थानों पर गौर करें तो प्रत्येक थानों में महिला उत्पीड़न व उनकी अन्य समस्याओं को लेकर हर महीने लगभग 30 से 40 मामले दर्ज किए गए हैं।
बताते हैं कि प्रत्येक रविवार को महिला थाने में प्रोजेक्ट नई किरण के तहत महिला उत्पीड़न के मामलों की सुनवाई होती है। दोनों पक्षों को आमने-सामने बैठाकर परिवार को जोड़ने के प्रयास किए जाते है। हर रविवार को 25 से 30 फाइलों पर सुनवाई के लिए लगाया जाता है। कुछ दंपती दोबारा साथ रहने को राजी हो जाते है और जो राजी नहीं होते उन मामलों में आखिरी रास्ता एफआईआर का होता है।