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Auraiya News: पर्चा सरकारी, दवाएं बाहरी...कब तक चलेगी नाफरमानी
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औरैया। हाल ही में शासन ने आदेश जारी किया है कि किसी भी सरकारी अस्पताल के डॉक्टर बाहर की दवाएं नहीं लिखेंगे। इसके बाद भी डॉक्टरों की मनमानी जारी है। सरकारी अस्पतालों की स्थिति यह है कि भले ही पर्चा एक रुपये में बन रहा हो लेकिन दवाओं की कीमत हजारों तक पहुंच रही हैं। सरकारी डॉक्टर, सरकारी पर्चे के पीछे बाहर की दवा लिखकर न सिर्फ मेडिकल स्टोर संचालकों को मुनाफा पहुंचा रहे हैं बल्कि अपना कमीशन भी पक्का कर रहे हैं।
यह तब हो रहा है जबकि डॉक्टरों से बाहर की दवा न लिखने को लेकर मेडिकल कॉलेज प्रशासन की ओर से हलफनामा भी लिया जा चुका है। मरीज बाहर की दवा लेने के लिए मजबूर हैं। निशुल्क दवा के बजाय मरीजों को प्राइवेट मेडिकल स्टोरों से मोटी रकम देकर दवा लेनी पड़ रही है। उनके इस दर्द को समझने वाला कोई नहीं है। सूत्रों की माने तो मेडिकल कॉलेज प्रशासन की ओर से कुछ डॉक्टरों को नोटिस भी जारी किए गए थे। बावजूद कोई बदलाव फिलहाल देखने को नहीं मिल रही है।
औरैया के मोहल्ला नरायनपुर चुंगी निवासी पूनम ने बताया कि दो वर्षीय बेटे उत्पल के कान में दर्द था। जिसे दिखाने के लिए मेडिकल कॉलेज आई थीं। यहां पर कुछ दवा तो मेडिकल कॉलेज में ही मिल गईं, लेकिन दो महंगी दवाएं बाहर की लिखी गई हैं। अब उन्हें मेडिकल स्टोर से खरीदना मजबूरी है।
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नसीराबाद गांव निवासी कुसमा देवी ने बताया कि कान में दिक्कत होने पर आए थे। मेडिकल कॉलेज में ड्राॅप नहीं मिले। बाहर के मेडिकल स्टोर से तीन दवाएं खरीदनी पड़ेगीं। पर्चे के पीछे डॉक्टर ने दवाएं लिखी हैं।
औरैया शहर के मोहल्ला पढ़ीनदरवाजा निवासी राजेश ने बताया कि वह मेडिकल कॉलेज में दिखाने आए थे। यहां पर्चे के पीछे चार दवाएं लिख दी गईं जिन्हें बाहर से खरीदना पड़ेगा।
बाहर की दवा डॉक्टरों को नहीं लिखनी चाहिए। कई बार इसके लिए डॉक्टरों को चेतावनी दी जा चुकी है। जिलाधिकारी भी इस पर नाराजगी जता चुके हैं। पूरे मामले की जांच कराई जाएगी। जो भी दोषी होगा उस पर कार्रवाई की जाएगी।- डॉ. पवन कुमार शर्मा, सीएमएस, मेडिकल कॉलेज
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यह तब हो रहा है जबकि डॉक्टरों से बाहर की दवा न लिखने को लेकर मेडिकल कॉलेज प्रशासन की ओर से हलफनामा भी लिया जा चुका है। मरीज बाहर की दवा लेने के लिए मजबूर हैं। निशुल्क दवा के बजाय मरीजों को प्राइवेट मेडिकल स्टोरों से मोटी रकम देकर दवा लेनी पड़ रही है। उनके इस दर्द को समझने वाला कोई नहीं है। सूत्रों की माने तो मेडिकल कॉलेज प्रशासन की ओर से कुछ डॉक्टरों को नोटिस भी जारी किए गए थे। बावजूद कोई बदलाव फिलहाल देखने को नहीं मिल रही है।
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औरैया के मोहल्ला नरायनपुर चुंगी निवासी पूनम ने बताया कि दो वर्षीय बेटे उत्पल के कान में दर्द था। जिसे दिखाने के लिए मेडिकल कॉलेज आई थीं। यहां पर कुछ दवा तो मेडिकल कॉलेज में ही मिल गईं, लेकिन दो महंगी दवाएं बाहर की लिखी गई हैं। अब उन्हें मेडिकल स्टोर से खरीदना मजबूरी है।
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नसीराबाद गांव निवासी कुसमा देवी ने बताया कि कान में दिक्कत होने पर आए थे। मेडिकल कॉलेज में ड्राॅप नहीं मिले। बाहर के मेडिकल स्टोर से तीन दवाएं खरीदनी पड़ेगीं। पर्चे के पीछे डॉक्टर ने दवाएं लिखी हैं।
औरैया शहर के मोहल्ला पढ़ीनदरवाजा निवासी राजेश ने बताया कि वह मेडिकल कॉलेज में दिखाने आए थे। यहां पर्चे के पीछे चार दवाएं लिख दी गईं जिन्हें बाहर से खरीदना पड़ेगा।
बाहर की दवा डॉक्टरों को नहीं लिखनी चाहिए। कई बार इसके लिए डॉक्टरों को चेतावनी दी जा चुकी है। जिलाधिकारी भी इस पर नाराजगी जता चुके हैं। पूरे मामले की जांच कराई जाएगी। जो भी दोषी होगा उस पर कार्रवाई की जाएगी।- डॉ. पवन कुमार शर्मा, सीएमएस, मेडिकल कॉलेज