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Auraiya News: बाढ़ की तबाही के बाद अब संवरेंगी जिले की चार नदियां
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औरैया। हर साल बाढ़ की विभीषिका बारिश के दिनों में आती है। यह बाढ़ इलाके में जमकर तबाही मचाती है। इससे फसलें जलमग्न होकर नष्ट हो जाती है। साथ ही तेज बहाव से नदियां भी क्षतिग्रस्त हो जाती हैं। पिछले साल आई बाढ़ से क्षतिग्रस्त नदियों की सूरत बदलने को जिला प्रशासन ने योजना बनाई है। योजना के मुताबिक चयनित चार नदियों का मनरेगा के जरिए जीर्णोद्धार किया जाएगा। इससे तटबंध को मजबूती मिलेगी, अबाध्य गति से पानी का बहाव भी हो सकेगा।
जनपद में इटावा व कन्नौज क्षेत्र से दस्तक देने वाली अहनैया, पांडु, सेंगर और अरिंद नदी बहती है। इससे जिले भर के किसान अपनी फसलों की सिंचाई करते हैं। नदियों का जाल जिले में काफी कुछ धान की फसल को मदद देता है। लेकिन इन नदियों की सफाई न होने से अवरोध के बाद बाढ़ की तबाही भी देखने को मिलती है। साल 2024 में आई बाढ़ के बाद कई गांव इसकी चपेट में आए थे। फसलें डूबी थीं। वहीं संपर्क मार्ग डूबकर लापता हो गए थे। जनजीवन अस्त व्यस्त हो गया था। दुश्वारियों से जूझे ग्रामीणों की मदद में जिला प्रशासन के पसीने छूट गए थे।
इस समस्या पर गौर करते हुए अब नदियों के जीर्णोद्धार की तैयारी की गई है। इनमें अहनैया, पांडु, सेंगर व अरिंद नदी को शामिल किया गया है। चयनित नदियों को मनरेगा के जरिए संवारा जाएगा। ग्रामीण स्तर पर काफी संख्या में श्रमिकों को रोजगार मिलेगा। नदियों में पानी कम होने के साथ ही बजट पुख्ता करते हुए कवायद शुरू की जाएगी।
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पांडु नदी को लेकर मिल चुका बजट
बिधूना क्षेत्र से निकली पांडु नदी में बाढ़ की समस्या को लेकर साल 2024 के शुरुआती दौर में सफाई की मांग उठी। शासन की ओर से इस पर एक करोड़ 56 लाख धनराशि अवमुक्त की गई थी। लोकसभा चुनाव से ठीक पहले बजट मिलते ही कार्य का शुभारंभ भी किया गया था। लेकिन बाद में यह काम ठंडे बस्ते में चला गया। अब फिर से इस बजट को खपाते हुए काम शुरू किया जाएगा।
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कोट::
‘जिलाधिकारी के निर्देश पर चार नदियों अहनैया, पांडु, सेंगर और अरिंद नदी का कायाकल्प किया जाएगा। इसके लिए कार्ययोजना तैयार की जा रही है। पांडु नदी को पिछले साल ही बजट मिल चुका है। जल्द ही अन्य काम पूरे कराते हुए सौंदर्यीकरण कराया जाएगा।’-रामसुमेर गौतम, सीडीओ
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जनपद में इटावा व कन्नौज क्षेत्र से दस्तक देने वाली अहनैया, पांडु, सेंगर और अरिंद नदी बहती है। इससे जिले भर के किसान अपनी फसलों की सिंचाई करते हैं। नदियों का जाल जिले में काफी कुछ धान की फसल को मदद देता है। लेकिन इन नदियों की सफाई न होने से अवरोध के बाद बाढ़ की तबाही भी देखने को मिलती है। साल 2024 में आई बाढ़ के बाद कई गांव इसकी चपेट में आए थे। फसलें डूबी थीं। वहीं संपर्क मार्ग डूबकर लापता हो गए थे। जनजीवन अस्त व्यस्त हो गया था। दुश्वारियों से जूझे ग्रामीणों की मदद में जिला प्रशासन के पसीने छूट गए थे।
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इस समस्या पर गौर करते हुए अब नदियों के जीर्णोद्धार की तैयारी की गई है। इनमें अहनैया, पांडु, सेंगर व अरिंद नदी को शामिल किया गया है। चयनित नदियों को मनरेगा के जरिए संवारा जाएगा। ग्रामीण स्तर पर काफी संख्या में श्रमिकों को रोजगार मिलेगा। नदियों में पानी कम होने के साथ ही बजट पुख्ता करते हुए कवायद शुरू की जाएगी।
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पांडु नदी को लेकर मिल चुका बजट
बिधूना क्षेत्र से निकली पांडु नदी में बाढ़ की समस्या को लेकर साल 2024 के शुरुआती दौर में सफाई की मांग उठी। शासन की ओर से इस पर एक करोड़ 56 लाख धनराशि अवमुक्त की गई थी। लोकसभा चुनाव से ठीक पहले बजट मिलते ही कार्य का शुभारंभ भी किया गया था। लेकिन बाद में यह काम ठंडे बस्ते में चला गया। अब फिर से इस बजट को खपाते हुए काम शुरू किया जाएगा।
कोट::
‘जिलाधिकारी के निर्देश पर चार नदियों अहनैया, पांडु, सेंगर और अरिंद नदी का कायाकल्प किया जाएगा। इसके लिए कार्ययोजना तैयार की जा रही है। पांडु नदी को पिछले साल ही बजट मिल चुका है। जल्द ही अन्य काम पूरे कराते हुए सौंदर्यीकरण कराया जाएगा।’-रामसुमेर गौतम, सीडीओ