{"_id":"6a36d82d5f78d369170f9b17","slug":"former-mlc-kamlesh-pathak-gets-bail-in-extortion-case-auraiya-news-c-211-1-aur1009-146907-2026-06-20","type":"story","status":"publish","title_hn":"Auraiya News: रंगदारी के मामले में पूर्व एमएलसी कमलेश पाठक को मिली जमानत","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Auraiya News: रंगदारी के मामले में पूर्व एमएलसी कमलेश पाठक को मिली जमानत
विज्ञापन
फोटो -14-कमलेश पाठक। संवाद आर्काइव
औरैया। पूर्व एमएलसी कमलेश पाठक को एक चर्चित रंगदारी मामले में न्यायालय से राहत मिली है। अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट विष्णु शंकर पांडेय की अदालत ने उनकी जमानत अर्जी स्वीकार कर ली है। अदालत ने 50-50 हजार रुपये के निजी मुचलके पर उन्हें जेल से रिहा करने का आदेश दिया है। हालांकि अभी हाल में दर्ज हुए मामले उनकी रिहाई के बीच अवरोध बन सकते हैं।
शहर के मोहल्ला खिड़की साहबराय निवासी बटन कारोबारी राजेश कुमार ने सदर कोतवाली में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। इसमें आरोप लगाया था कि पूर्व एमएलसी कमलेश पाठक जेल में रहते हुए भी प्रतिमाह 50 हजार रुपये की रंगदारी अपने गुर्गे अब्दुल सत्तार व दो अन्य के माध्यम से वसूल रहे हैं। इस मामले में पुलिस ने 7 जनवरी 2026 को प्राथमिकी दर्ज की थी।
शनिवार को जमानत अर्जी पर सुनवाई के दौरान कमलेश पाठक के अधिवक्ता ने तर्क दिया कि उनके मुवक्किल को रंजिशन फंसाया गया है। बचाव पक्ष ने स्पष्ट किया कि कमलेश पाठक 16 मार्च 2020 से सेंट्रल जेल आगरा में न्यायिक अभिरक्षा में बंद हैं। उन्होंने दलील दी कि जेल में रहने के दौरान वादी से संपर्क करना या रंगदारी वसूलना असंभव है। साथ ही यह भी कहा गया कि अभियोजन पक्ष ऐसा कोई साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सका जिससे यह साबित हो सके कि वादी ने कभी कोई रकम कमलेश पाठक तक पहुंचाई हो।
विज्ञापन
मामले की सुनवाई करते हुए न्यायालय ने पाया कि आरोप पत्र में वादी की ओर से लगाए गए आरोपों की पुष्टि के लिए कोई ठोस साक्ष्य मौजूद नहीं है। अदालत ने यह भी गौर किया कि आरोपी विगत छह वर्षों से अधिक समय से जेल में है, ऐसे में रंगदारी के माध्यम या उनसे संपर्क के कोई प्रमाण सामने नहीं आए हैं। साक्ष्यों के अभाव में अदालत ने कमलेश पाठक को जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया है। वहीं, अभियोजन ने जमानत का कड़ा विरोध करते हुए कहा था कि आरोपी के खिलाफ पहले से ही 39 मुकदमे दर्ज हैं और जमानत मिलने पर वह साक्ष्यों को प्रभावित कर सकता है। हालांकि, अदालत ने बचाव पक्ष की दलीलों और दस्तावेजों का अवलोकन करने के बाद जमानत मंजूर कर ली।
तीन दिन पहले गैंगस्टर मामले में खारिज कर दी गई थी याचिका
औरैया। चर्चित दोहरे हत्याकांड में छह साल से आगरा जेल में बंद पूर्व एमएलसी कमलेश पाठक के खिलाफ दोबारा लगाई गई गैंगस्टर के मामले में उनकी जमानत याचिका को तीन दिन पहले 18 जून को खारिज कर दिया गया था। विशेष न्यायाधीश गैंगस्टर प्रभारी महेश कुमार ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद यह फैसला सुनाया। अभियोजन पक्ष ने कमलेश पाठक के 39 मुकदमों के आपराधिक इतिहास का हवाला देते हुए जमानत का कड़ा विरोध किया। वहीं, बचाव पक्ष ने दलील दी कि जेल में रहते हुए रंगदारी वसूलने के आरोप पूरी तरह काल्पनिक बताया था। (संवाद)
जुलाई में आ सकता दोहरे हत्याकांड में फैसला
औरैया। शहर के मोहल्ला नारायनपुर में 15 मार्च 2020 अधिवक्ता मंजुल चौबे व उनकी चचेरी बहन सुधा की हत्या कर दी गई थी। हत्या का आरोप पूर्व एमएलसी कमलेश पाठक उनके भाइयों पूर्व ब्लॉक प्रमुख संतोष पाठक व रामू पाठक समेत 11 के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया। बाद में पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार कर अलग-अलग जेल में भेज दिया था। इसके बाद पुलिस ने सभी आरोपियों के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट में कार्रवाई की। इस मामले में 24 मार्च को एमपी-एमएलए कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कमलेश को छह व अन्य को पांच-पांच साल की सजा सुनाई थी, जिसको हाईकोर्ट में चुनौती दी गई और वहां से उन्हें राहत मिल गई थी, लेकिन अभी हाल में लिखाए गए मुकदमे उनकी राहत के बीच आड़े आ गए थे। अधिवक्ता की माने तो दोहरे हत्याकांड का भी फैसला जुलाई में आ सकता है। अब सभी की नजर इसी फैसले पर टिकी है। (संवाद)
विज्ञापन
शहर के मोहल्ला खिड़की साहबराय निवासी बटन कारोबारी राजेश कुमार ने सदर कोतवाली में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। इसमें आरोप लगाया था कि पूर्व एमएलसी कमलेश पाठक जेल में रहते हुए भी प्रतिमाह 50 हजार रुपये की रंगदारी अपने गुर्गे अब्दुल सत्तार व दो अन्य के माध्यम से वसूल रहे हैं। इस मामले में पुलिस ने 7 जनवरी 2026 को प्राथमिकी दर्ज की थी।
विज्ञापन
शनिवार को जमानत अर्जी पर सुनवाई के दौरान कमलेश पाठक के अधिवक्ता ने तर्क दिया कि उनके मुवक्किल को रंजिशन फंसाया गया है। बचाव पक्ष ने स्पष्ट किया कि कमलेश पाठक 16 मार्च 2020 से सेंट्रल जेल आगरा में न्यायिक अभिरक्षा में बंद हैं। उन्होंने दलील दी कि जेल में रहने के दौरान वादी से संपर्क करना या रंगदारी वसूलना असंभव है। साथ ही यह भी कहा गया कि अभियोजन पक्ष ऐसा कोई साक्ष्य प्रस्तुत नहीं कर सका जिससे यह साबित हो सके कि वादी ने कभी कोई रकम कमलेश पाठक तक पहुंचाई हो।
विज्ञापन
मामले की सुनवाई करते हुए न्यायालय ने पाया कि आरोप पत्र में वादी की ओर से लगाए गए आरोपों की पुष्टि के लिए कोई ठोस साक्ष्य मौजूद नहीं है। अदालत ने यह भी गौर किया कि आरोपी विगत छह वर्षों से अधिक समय से जेल में है, ऐसे में रंगदारी के माध्यम या उनसे संपर्क के कोई प्रमाण सामने नहीं आए हैं। साक्ष्यों के अभाव में अदालत ने कमलेश पाठक को जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया है। वहीं, अभियोजन ने जमानत का कड़ा विरोध करते हुए कहा था कि आरोपी के खिलाफ पहले से ही 39 मुकदमे दर्ज हैं और जमानत मिलने पर वह साक्ष्यों को प्रभावित कर सकता है। हालांकि, अदालत ने बचाव पक्ष की दलीलों और दस्तावेजों का अवलोकन करने के बाद जमानत मंजूर कर ली।
तीन दिन पहले गैंगस्टर मामले में खारिज कर दी गई थी याचिका
औरैया। चर्चित दोहरे हत्याकांड में छह साल से आगरा जेल में बंद पूर्व एमएलसी कमलेश पाठक के खिलाफ दोबारा लगाई गई गैंगस्टर के मामले में उनकी जमानत याचिका को तीन दिन पहले 18 जून को खारिज कर दिया गया था। विशेष न्यायाधीश गैंगस्टर प्रभारी महेश कुमार ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद यह फैसला सुनाया। अभियोजन पक्ष ने कमलेश पाठक के 39 मुकदमों के आपराधिक इतिहास का हवाला देते हुए जमानत का कड़ा विरोध किया। वहीं, बचाव पक्ष ने दलील दी कि जेल में रहते हुए रंगदारी वसूलने के आरोप पूरी तरह काल्पनिक बताया था। (संवाद)
जुलाई में आ सकता दोहरे हत्याकांड में फैसला
औरैया। शहर के मोहल्ला नारायनपुर में 15 मार्च 2020 अधिवक्ता मंजुल चौबे व उनकी चचेरी बहन सुधा की हत्या कर दी गई थी। हत्या का आरोप पूर्व एमएलसी कमलेश पाठक उनके भाइयों पूर्व ब्लॉक प्रमुख संतोष पाठक व रामू पाठक समेत 11 के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया। बाद में पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार कर अलग-अलग जेल में भेज दिया था। इसके बाद पुलिस ने सभी आरोपियों के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट में कार्रवाई की। इस मामले में 24 मार्च को एमपी-एमएलए कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कमलेश को छह व अन्य को पांच-पांच साल की सजा सुनाई थी, जिसको हाईकोर्ट में चुनौती दी गई और वहां से उन्हें राहत मिल गई थी, लेकिन अभी हाल में लिखाए गए मुकदमे उनकी राहत के बीच आड़े आ गए थे। अधिवक्ता की माने तो दोहरे हत्याकांड का भी फैसला जुलाई में आ सकता है। अब सभी की नजर इसी फैसले पर टिकी है। (संवाद)