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Auraiya News: कर्ज से परेशान किसान ने फंदा लगाया
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सहायल। थाना क्षेत्र के गांव नराही में कर्ज से परेशान किसान ने फंदा लगाकर जान दे दी।
नराही गांव निवासी रामजीत ने बताया कि बड़े भाई आशाराम ( 45) ने घर के बाहर खड़े नीम के पेड़ से फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। उसकी पांच बेटियां और एक आठ साल का बेटा है। मजदूरी करके परिवार चलाता था। बताया कि भाई ने सहायल ग्रामीण बैंक से 50 हजार की किसान क्रेडिट कार्ड पर लोन भी ले रखा था। जिसको जमा करने के लिए लगातार बैंक से सूचनाएं आ रहीं थीं। घर में बेटियों की शादी को लेकर भी परेशान रहता था। उसके हिस्से में लगभग एक बीघा जमीन है। आशाराम की मौत के बाद पत्नी व बेटियों का रो-रोकर बुरा हाल है। वहीं थाना पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी हुई है।
थानाध्यक्ष गंगा दास गौतम ने बताया कि भाई रामजीत की फौती सूचना पर पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
कैसे होगा गुजर बसर. . .
आशाराम की मौत के बाद पांच बेटियों के सिर से पिता का साया उठ गया है। घर की हालत ठीक न होने की वजह से पत्नी और बेटियों का रो-रोकर बुरा हाल है। आशाराम गांव में फूस की झोपड़ी डालकर अपने परिवार के साथ रहता था। उसकी मौत परिवार के भरण पोषण की समस्या खड़ी हो गई है।
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नराही गांव निवासी रामजीत ने बताया कि बड़े भाई आशाराम ( 45) ने घर के बाहर खड़े नीम के पेड़ से फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। उसकी पांच बेटियां और एक आठ साल का बेटा है। मजदूरी करके परिवार चलाता था। बताया कि भाई ने सहायल ग्रामीण बैंक से 50 हजार की किसान क्रेडिट कार्ड पर लोन भी ले रखा था। जिसको जमा करने के लिए लगातार बैंक से सूचनाएं आ रहीं थीं। घर में बेटियों की शादी को लेकर भी परेशान रहता था। उसके हिस्से में लगभग एक बीघा जमीन है। आशाराम की मौत के बाद पत्नी व बेटियों का रो-रोकर बुरा हाल है। वहीं थाना पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी हुई है।
थानाध्यक्ष गंगा दास गौतम ने बताया कि भाई रामजीत की फौती सूचना पर पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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कैसे होगा गुजर बसर. . .
आशाराम की मौत के बाद पांच बेटियों के सिर से पिता का साया उठ गया है। घर की हालत ठीक न होने की वजह से पत्नी और बेटियों का रो-रोकर बुरा हाल है। आशाराम गांव में फूस की झोपड़ी डालकर अपने परिवार के साथ रहता था। उसकी मौत परिवार के भरण पोषण की समस्या खड़ी हो गई है।
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