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Auraiya News: आरटीआई से खुला फर्जी मेडिकल रिपोर्ट का फर्जीवाड़ा
Wed, 18 Jun 2025 11:37 PM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
Updated Wed, 18 Jun 2025 11:37 PM IST
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बिधूना (औरैया)। न्यायालय के आदेश पर मंगलवार को बिधूना थाने में आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय सैफई के तत्कालीन मुख्य चिकित्साधिकारी (सीएमओ), तत्कालीन उपनिरीक्षक समेत तीन पर फर्जी मेडिकल रिपोर्ट व साक्ष्य तैयार करने के आरोप में रिपोर्ट दर्ज की गई है।
केस दर्ज कराने वाले देवेंद्र का कहना है कि मेडिकल रिपोर्ट के फर्जीवाड़े का खुलासा सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत अस्पताल से मांगी गई सूचना से हुआ है। उनका कहना है कि महिला की मेडिकल रिपोर्ट फर्जी है, जबकि इस मामले में उनके बेटे को जेल भेज दिया गया है।
मुकदमे के वादी बिधूना फीडर रोड निवासी देवेंद्र सिंह यादव ने बताया कि 19 जून 2023 को उनका रामनरेश के परिवार से बंटवारे को लेकर विवाद हुआ था। बाद में रामनरेश पक्ष के लोगों ने उनके बेटे अश्वनी समेत अन्य परिजनों पर रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
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उनका आरोप है कि मामले में 19 नवंबर को झूठी मेडिकल रिपोर्ट तैयार कर सैफई आयुर्विज्ञान के तत्कालीन मुख्य चिकित्साधिकारी विवेक चौधरी, तत्कालीन उपनिरीक्षक भोला रस्तोगी व रामनरेश ने बेटे पर हत्या की कोशिश की धारा बढ़वा दी थी। इससे बेटे को जेल हो गई।
देवेंद्र सिंह ने बताया कि बेटे के जेल जाने के बाद उन्होंने आरटीआई के तहत अस्पताल से सूचना मांगी। इसके बाद पता चला कि रामनरेश की पत्नी उर्मिला ने 20 जून को सीएचसी बिधूना में पर्चा (संख्या 1924) बनवाया था। फिर उन्हें सैफई रेफर किया गया।
आरोप है कि रिम्स अस्पताल में चिकित्सक ने न तो महिला को भर्ती किया न सीटी स्कैन कराया। वहां पर बने पर्चे की वैधता चार जुलाई तक थी। इसके बाद भी डॉक्टर ने 30 अगस्त तक उनका इलाज किया। 21 जून को पीड़िता की एक्सरे रिपोर्ट में सिर में दाई ओर खून का थक्का होना पाया गया।
वहीं, सीएचसी में बाईं ओर सिर में चोट होना पाया गया था। ऐसे में महिला की फर्जी रिपोर्ट के आधार पर बेटे पर मारपीट के दौरान हत्या की कोशिश की धारा बढ़ाकर जेल भिजवा दिया गया। मामले में बिधूना अपराध निरीक्षक जितेंद्र पाल सिंह ने बताया कि दोनों पक्षों के बयान दर्ज कर कार्रवाई की जाएगी।
उधर, आरोपी रामनरेश के बेटे पंकज ने बताया कि बंटवारे के विवाद में विरोधियों द्वारा मारपीट की गई थी। इसमें मां उर्मिला को गंभीर चोटें आई थीं। विपक्षियों द्वारा लगाए जा रहे आरोप झूठे हैं।
मामले की न्यायालय के आदेश का सम्मान करते हुए पूरी पारदर्शिता से जांच कराई जाएगी। जांच के बाद जो भी तथ्य सामने आएंगे उनके आधार पर कार्रवाई की जाएगी।
- प्रो. एसपी सिंह, चिकित्सा अधीक्षक, उप्र ग्रामीण आयुर्विज्ञान विवि सैफई।
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केस दर्ज कराने वाले देवेंद्र का कहना है कि मेडिकल रिपोर्ट के फर्जीवाड़े का खुलासा सूचना के अधिकार (आरटीआई) के तहत अस्पताल से मांगी गई सूचना से हुआ है। उनका कहना है कि महिला की मेडिकल रिपोर्ट फर्जी है, जबकि इस मामले में उनके बेटे को जेल भेज दिया गया है।
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मुकदमे के वादी बिधूना फीडर रोड निवासी देवेंद्र सिंह यादव ने बताया कि 19 जून 2023 को उनका रामनरेश के परिवार से बंटवारे को लेकर विवाद हुआ था। बाद में रामनरेश पक्ष के लोगों ने उनके बेटे अश्वनी समेत अन्य परिजनों पर रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
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उनका आरोप है कि मामले में 19 नवंबर को झूठी मेडिकल रिपोर्ट तैयार कर सैफई आयुर्विज्ञान के तत्कालीन मुख्य चिकित्साधिकारी विवेक चौधरी, तत्कालीन उपनिरीक्षक भोला रस्तोगी व रामनरेश ने बेटे पर हत्या की कोशिश की धारा बढ़वा दी थी। इससे बेटे को जेल हो गई।
देवेंद्र सिंह ने बताया कि बेटे के जेल जाने के बाद उन्होंने आरटीआई के तहत अस्पताल से सूचना मांगी। इसके बाद पता चला कि रामनरेश की पत्नी उर्मिला ने 20 जून को सीएचसी बिधूना में पर्चा (संख्या 1924) बनवाया था। फिर उन्हें सैफई रेफर किया गया।
आरोप है कि रिम्स अस्पताल में चिकित्सक ने न तो महिला को भर्ती किया न सीटी स्कैन कराया। वहां पर बने पर्चे की वैधता चार जुलाई तक थी। इसके बाद भी डॉक्टर ने 30 अगस्त तक उनका इलाज किया। 21 जून को पीड़िता की एक्सरे रिपोर्ट में सिर में दाई ओर खून का थक्का होना पाया गया।
वहीं, सीएचसी में बाईं ओर सिर में चोट होना पाया गया था। ऐसे में महिला की फर्जी रिपोर्ट के आधार पर बेटे पर मारपीट के दौरान हत्या की कोशिश की धारा बढ़ाकर जेल भिजवा दिया गया। मामले में बिधूना अपराध निरीक्षक जितेंद्र पाल सिंह ने बताया कि दोनों पक्षों के बयान दर्ज कर कार्रवाई की जाएगी।
उधर, आरोपी रामनरेश के बेटे पंकज ने बताया कि बंटवारे के विवाद में विरोधियों द्वारा मारपीट की गई थी। इसमें मां उर्मिला को गंभीर चोटें आई थीं। विपक्षियों द्वारा लगाए जा रहे आरोप झूठे हैं।
मामले की न्यायालय के आदेश का सम्मान करते हुए पूरी पारदर्शिता से जांच कराई जाएगी। जांच के बाद जो भी तथ्य सामने आएंगे उनके आधार पर कार्रवाई की जाएगी।
- प्रो. एसपी सिंह, चिकित्सा अधीक्षक, उप्र ग्रामीण आयुर्विज्ञान विवि सैफई।