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Auraiya News: ओपीडी के समय में डॉक्टर मरीज छोड़ एमआर से कर रहे मीटिंग

Thu, 06 Jun 2024 11:32 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Thu, 06 Jun 2024 11:32 PM IST
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During OPD time the doctor is leaving the patient and meeting with MR
औरैया। सरकारी अस्पतालों में बाहर की दवा लिखे जाने पर स्पष्ट रूप से प्रतिबंध है। बावजूद इसके मेडिकल काॅलेज में डॉक्टर की शह पर मेडिकल रिप्रिजेंटेटिव (एमआर) का दखल बना हुआ है। खासकर ओपीडी के समय मेडिकल कालेज पहुंच रहे एमआर की वजह से मरीजों को खासा इंतजार करने को मजबूर होना पड़ रहा है।
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चिचौली स्थित मेडिकल कॉलेज में रोजाना एक हजार से अधिक मरीज दिखाने आते हैं। सुबह से शाम तक एमआर अस्पताल परिसर के अलावा दुकानों पर घूमते रहते हैं। यहां खास बात यह है कि एमआर का प्रयास है कि सरकारी दवा के बजाय उनकी ब्रांड की दवा को डॉक्टर मरीजों के लिए लिखे। इससे कि उनके ब्रांड की दवा बाहर से मंगाई जाए। निशुल्क सरकारी दवा के बजाय बाहर की दवा लेकर मरीज अपनी जेब ढीली करें।
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उनकी कंपनी की दवा सरकारी अस्पताल में पहुंचने वाले मरीजों को मिले। स्वास्थ्य सेवाओं में अपना धंधा देख रहे इन एमआर के निशाने पर डॉक्टर हैं। मंशा बस यही है कि डाॅक्टर इनके इशारे पर मरीजों को विशेष कंपनी की दवाएं लिखें। गुरुवार दोपहर बाल रोग विशेषज्ञ सीनियर रेजीडेंट डॉ. एमएच क्रीथेन व डॉ. आरपी सागर बीमार बच्चों को देख रहीं थीं। इसी बीच एक कंपनी के दो एमआर पहुंचे।
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ओपीडी के समय मरीजों को किनारे कर एमआर ने काफी देर तक अपनी कंपनी की दवाओं की खूबी गिनाई। टेबलेट के जरिए विस्तार से जानकारी दी। यह जानकारी तमाम बिंदुओं पर आधारित रही। इस बीच दिखाने को पहुंचे मरीजाें को इंतजार करना पड़ा। सीसीटीवी कैमरों के बीच एक कंपनी के एमआर का इस तरह से मेडिकल कॉलेज में अपनी जुगत भिड़ाना बड़ी बात रही। सारे मानकों को तार-तार किया गया।
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दवा बेचने पर कंपनी देती है उपहार का लालच
सूत्रों के अनुसार दवा कंपनियां डाॅक्टरों को लक्ष्य पूरा कराने के लिए उपहार का लालच देकर दवाएं लिखने के लिए दबाव बनाती हैं। इसके लिए जैसा टारगेट वैसा ही उपहार होता है। इसमें एसी, फ्रीज, कूलर से लेकर कार तक शामिल होती हैं। कई कंपनियां बढ़िया कमीशन, टूर पैकेज का विकल्प देती हैं। डाॅक्टर इन्हीं कंपनियों की दवा बेचने के लिए हामी भर देते हैं। अस्पताल के बाहर मेडिकल स्टोर पर दवाएं रखवा देते हैं।

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बोले जिम्मेदार------
मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में एमआर का पहुंचना बहुत ही गलत है। स्टोर में मरीजों के लिए सरकारी दवा पर्याप्त मात्रा में है। मामले की जानकारी की जाएगी। किसी तरह से मानकों का उल्लंघन नहीं होने दिया जाएगा।
- धर्मेंद्र कुमार, प्रभारी प्राचार्य मेडिकल कॉलेज
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