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Auraiya News: कम नंबर आएं तो बिल्कुल न घबराएं, प्रतियोगी परीक्षाओं में ज्ञान बनेगा सफलता का आधार
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औरैया। 10वीं व 12वीं की परीक्षा में कम नंबर आएं तो बिल्कुल भी घबराएं नहीं। भविष्य की रूपरेखा तय करने वाली प्रतियोगी परीक्षाओं में ज्ञान आपकी सफलता का आधार बनेगा। एक बार किसी कारण बस रिजल्ट बिगड़े तो इस पर ध्यान न देते हुए आगे के लिए पुख्ता तैयारी में जुटना चाहिए। आत्महत्या से लेकर अन्य गलत कदम उठाने के बजाय आगे की तैयारी में जुटना चाहिए। अगर इसे समझना और बच्चों को समझाना है तो आप जिले के बेसिक शिक्षा अधिकारी अनिल कुमार व सहायक जिला निर्वाचन अधिकारी रावेंद्र सिंह का उदाहरण दे सकते हैं।
बीएसए अनिल कुमार बताते हैं कि बोर्ड परीक्षाओं के परिणाम महज अंक पत्र व डिग्री जैसे होते हैं। किसी कारण ये परिणाम खराब भी आ सकते हैं, लेकिन असलियत में भविष्य निर्धारण करने वाली प्रतियोगी परीक्षाएं बुद्धिमता के आधार पर होती हैं। यहां बोर्ड परीक्षा के अंक नहीं चलते। प्रतियोगी परीक्षाओं में बेहतर तैयारी बेहतर परिणाम देती है।
57 प्रतिशत अंक आने पर भी नहीं मानी हार: बीएसए
बीएसए ने इसे समझाने के लिए बताया कि उनके 10वीं में 57 प्रतिशत अंक आए। सेकेंड डिवीजन रहे। 12वीं में 60 प्रतिशत अंक आए। वहीं बीए व एमए भी सेकेंड डिवीजन रही, लेकिन इस पर ध्यान न देते हुए प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी इतनी मजबूती से की गई कि उसी का परिणाम है कि आज आज जिले में बीएसए का पद संभाले हुए हैं।
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बताया कि इससे पहले वह अपनी मेहनत और लगन से डिप्टी जेलर और फिर इतिहास के प्रवक्ता की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं। कहा कि उतार चढ़ाव के दौर जीवन में आते रहते हैं, लेकिन इससे डरना या घबराना नहीं है। कहा कि 10वीं में सेकेंड डिवीजन आने पर निराश हो जाते तो बतौर बीएसए सेवा करने का मौका नहीं मिल पाता।
10वीं में आए थे 50 प्रतिशत अंक: सहायक जिला निर्वाचन अधिकारी
वहीं जिले में चुनावी कमान को अक्सर संभालने वाले सहायक जिला निर्वाचन अधिकारी रावेंद्र सिंह ने भी अपना परीक्षा परिणाम साझा किया। उन्होंने बताया कि 10वीं में उनके 50 प्रतिशत अंक आए थे। वहीं 12वीं में 63 प्रतिशत पाकर फर्स्ट डिवीजन रहे। प्रतियोगी परीक्षा पास की। ड्यूटी पर सेवाएं दी और आज अपनी काबिलियत से सेवाओं को विस्तार दे रहे हैं।
बताया कि 10वीं व 12वीं में कम नंबर आने पर हताश और निराश होने की जरूरत नहीं है। क्योंकि प्रतियोगी परीक्षाओं में आपका ज्ञान ही आपके भविष्य की नींव रखता है। इस लिए कम नंबरों की तरफ ध्यान न देकर आगे के भविष्य को बेहतर बनाने के लिए मेरिट को आधार न बनाएं। बल्कि अपने ज्ञान पर भरोसा रखते हुए आगे बढ़े। निश्चित रूप से सफलता आपके कदम चूमेगी।
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बीएसए अनिल कुमार बताते हैं कि बोर्ड परीक्षाओं के परिणाम महज अंक पत्र व डिग्री जैसे होते हैं। किसी कारण ये परिणाम खराब भी आ सकते हैं, लेकिन असलियत में भविष्य निर्धारण करने वाली प्रतियोगी परीक्षाएं बुद्धिमता के आधार पर होती हैं। यहां बोर्ड परीक्षा के अंक नहीं चलते। प्रतियोगी परीक्षाओं में बेहतर तैयारी बेहतर परिणाम देती है।
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57 प्रतिशत अंक आने पर भी नहीं मानी हार: बीएसए
बीएसए ने इसे समझाने के लिए बताया कि उनके 10वीं में 57 प्रतिशत अंक आए। सेकेंड डिवीजन रहे। 12वीं में 60 प्रतिशत अंक आए। वहीं बीए व एमए भी सेकेंड डिवीजन रही, लेकिन इस पर ध्यान न देते हुए प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी इतनी मजबूती से की गई कि उसी का परिणाम है कि आज आज जिले में बीएसए का पद संभाले हुए हैं।
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बताया कि इससे पहले वह अपनी मेहनत और लगन से डिप्टी जेलर और फिर इतिहास के प्रवक्ता की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं। कहा कि उतार चढ़ाव के दौर जीवन में आते रहते हैं, लेकिन इससे डरना या घबराना नहीं है। कहा कि 10वीं में सेकेंड डिवीजन आने पर निराश हो जाते तो बतौर बीएसए सेवा करने का मौका नहीं मिल पाता।
10वीं में आए थे 50 प्रतिशत अंक: सहायक जिला निर्वाचन अधिकारी
वहीं जिले में चुनावी कमान को अक्सर संभालने वाले सहायक जिला निर्वाचन अधिकारी रावेंद्र सिंह ने भी अपना परीक्षा परिणाम साझा किया। उन्होंने बताया कि 10वीं में उनके 50 प्रतिशत अंक आए थे। वहीं 12वीं में 63 प्रतिशत पाकर फर्स्ट डिवीजन रहे। प्रतियोगी परीक्षा पास की। ड्यूटी पर सेवाएं दी और आज अपनी काबिलियत से सेवाओं को विस्तार दे रहे हैं।
बताया कि 10वीं व 12वीं में कम नंबर आने पर हताश और निराश होने की जरूरत नहीं है। क्योंकि प्रतियोगी परीक्षाओं में आपका ज्ञान ही आपके भविष्य की नींव रखता है। इस लिए कम नंबरों की तरफ ध्यान न देकर आगे के भविष्य को बेहतर बनाने के लिए मेरिट को आधार न बनाएं। बल्कि अपने ज्ञान पर भरोसा रखते हुए आगे बढ़े। निश्चित रूप से सफलता आपके कदम चूमेगी।