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Auraiya News: नहीं थम रहे घरेलू हिंसा के मामले, हर दूसरे दिन आ रही एक शिकायत
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औरैया। कई कोशिशें और जागरूकता कार्यक्रम के बावजूद भी महिलाओं के प्रति हिंसा के मामले कम होते नहीं दिख रहे हैं। वन स्टॉप सेंटर के रिकार्ड के अनुसार वर्ष 2024-25 में अब तक 29 मामले दर्ज किए जा चुके हैं जो बताता है कि हर दूसरे दिन एक शिकायत लेकर पीड़िता पहुंच रही है।
वन स्टॉप सेंटर (सखी) के उद्देश्य सभी प्रकार की हिंसा से पीड़ित महिलाओं एवं बालिकाओं को एक ही स्थान पर सहायता व सहयोग प्रदान करना है। वर्ष 2020-21 में कुल 39 मामले दर्ज किए गए थे। जिनकी संख्या 2021-22 में बढ़कर 103 जा पहुंची थी। हालांकि 2022-23 में यह संख्या घटकर 92 हो गई थी, लेकिन वर्ष 2023-24 में यह संख्या सबसे अधिक 147 तक पहुंची।
विभागीय अधिकारियों की मानें तो घरेलू हिंसा के सबसे अधिक मामले एक-दूसरे पर शक करने और बात न मानने के चलते सामने आते हैं। वहीं ससुरालियों की ओर से दहेज उत्पीड़न के भी मामले आते हैं। घरेलू हिंसा के मामले में दोनों पक्षों को आमने-सामने बैठाकर काउंसिलिंग कराकर रिश्तों को टूटने से बचाने की भरपूर कोशिश की जाती है। जो मामले नहीं निपटते। उन मामलों को न्यायालय में दायर कर समाधान निकाला जाता है।
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इसका सबसे अधिक असर बच्चों पर पड़ता है। वर्ष 2023-24 में सबसे अधिक 147 मामले वन स्टॉप सेंटर पहुंचे। जिसमें 80 मामलों को निस्तारित किया गया। नौ मामलों में एफआईआर हुई। 39 मामले न्यायालय पहुंचे जबकि 19 मामलों में कार्यवाही चल रही है। इधर वर्ष 2024-25 में अब तक 29 मामले आ चुके हैं। इस प्रकार हर दूसरे दिन एक शिकायत आ रही है। कुल 29 मामलों में 13 का निस्तारण हो चुका है। पांच की एफआईआर कराई जा चुकी है। चार मामले न्यायालय पहुंचे और सात में कार्यवाही चल रही है।
-- -- -- -- -- -- -- इनसेट -- -- -- -- -- -- --
वर्ष - कुल प्रकरण
2021-21 - 39
2021-22 - 103
2022-23 - 92
2023-24 - 147
2024-25 - 29
-- -- -- -- -- -- --
पढ़े-लिखे और अच्छे परिवारों पर भी उत्पीड़न का आरोप
वन स्टॉप सेंटर में पहुंचने वाले मामलों में पढ़े-लिखे, नौकरी पेशा और अच्छे परिवार के लोगों की ओर से महिलाओं को प्रताड़ित किया जाना पाया जा रहा है। एक-दूसरे के प्रति विश्वास न होने, बात न मानने, छोटी-छोटी बातों को लेकर भी मामले संज्ञान में आ रहे है। जिन्हें काउंसलिंग कर आपसी समझौते से परिवारों को जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। यदि दोनों पक्षों के लोग कुछ नम्रता बरतें तो इस तरह के मामलों में कमी देखने को मिलेगी।
- ज्योति तिवारी - केंद्र प्रबंधक
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मामला - एक
गांव वंशी अछल्दा निवासी एक महिला ने पति पर शक जाहिर करते हुए बताया था कि वह घर पर कम रुकते हैं। रात में भी देर से आते हैं। महिला ने पति से मोबाइल दिलाने की मांग की। पति द्वारा नहीं दिलाया जा रहा था। जिस पर महिला को संदेह था। हालांकि दोनों के बीच समझौता हो गया है और अब हंसी-खुशी रह रहे हैं।
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मामला - दो
छछूंद अछल्दा निवासी सास ने बहू के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। आरोप था कि बहू कई दिनों से मायके में है। ससुराल नहीं आ रही है। दोनों पक्षों को बुलाकर आमने-सामने बैठाकर बात सुनी गई। दोनों के बीच समझौता हो गया है।
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वन स्टॉप सेंटर (सखी) के उद्देश्य सभी प्रकार की हिंसा से पीड़ित महिलाओं एवं बालिकाओं को एक ही स्थान पर सहायता व सहयोग प्रदान करना है। वर्ष 2020-21 में कुल 39 मामले दर्ज किए गए थे। जिनकी संख्या 2021-22 में बढ़कर 103 जा पहुंची थी। हालांकि 2022-23 में यह संख्या घटकर 92 हो गई थी, लेकिन वर्ष 2023-24 में यह संख्या सबसे अधिक 147 तक पहुंची।
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विभागीय अधिकारियों की मानें तो घरेलू हिंसा के सबसे अधिक मामले एक-दूसरे पर शक करने और बात न मानने के चलते सामने आते हैं। वहीं ससुरालियों की ओर से दहेज उत्पीड़न के भी मामले आते हैं। घरेलू हिंसा के मामले में दोनों पक्षों को आमने-सामने बैठाकर काउंसिलिंग कराकर रिश्तों को टूटने से बचाने की भरपूर कोशिश की जाती है। जो मामले नहीं निपटते। उन मामलों को न्यायालय में दायर कर समाधान निकाला जाता है।
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इसका सबसे अधिक असर बच्चों पर पड़ता है। वर्ष 2023-24 में सबसे अधिक 147 मामले वन स्टॉप सेंटर पहुंचे। जिसमें 80 मामलों को निस्तारित किया गया। नौ मामलों में एफआईआर हुई। 39 मामले न्यायालय पहुंचे जबकि 19 मामलों में कार्यवाही चल रही है। इधर वर्ष 2024-25 में अब तक 29 मामले आ चुके हैं। इस प्रकार हर दूसरे दिन एक शिकायत आ रही है। कुल 29 मामलों में 13 का निस्तारण हो चुका है। पांच की एफआईआर कराई जा चुकी है। चार मामले न्यायालय पहुंचे और सात में कार्यवाही चल रही है।
वर्ष - कुल प्रकरण
2021-21 - 39
2021-22 - 103
2022-23 - 92
2023-24 - 147
2024-25 - 29
पढ़े-लिखे और अच्छे परिवारों पर भी उत्पीड़न का आरोप
वन स्टॉप सेंटर में पहुंचने वाले मामलों में पढ़े-लिखे, नौकरी पेशा और अच्छे परिवार के लोगों की ओर से महिलाओं को प्रताड़ित किया जाना पाया जा रहा है। एक-दूसरे के प्रति विश्वास न होने, बात न मानने, छोटी-छोटी बातों को लेकर भी मामले संज्ञान में आ रहे है। जिन्हें काउंसलिंग कर आपसी समझौते से परिवारों को जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। यदि दोनों पक्षों के लोग कुछ नम्रता बरतें तो इस तरह के मामलों में कमी देखने को मिलेगी।
- ज्योति तिवारी - केंद्र प्रबंधक
मामला - एक
गांव वंशी अछल्दा निवासी एक महिला ने पति पर शक जाहिर करते हुए बताया था कि वह घर पर कम रुकते हैं। रात में भी देर से आते हैं। महिला ने पति से मोबाइल दिलाने की मांग की। पति द्वारा नहीं दिलाया जा रहा था। जिस पर महिला को संदेह था। हालांकि दोनों के बीच समझौता हो गया है और अब हंसी-खुशी रह रहे हैं।
मामला - दो
छछूंद अछल्दा निवासी सास ने बहू के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। आरोप था कि बहू कई दिनों से मायके में है। ससुराल नहीं आ रही है। दोनों पक्षों को बुलाकर आमने-सामने बैठाकर बात सुनी गई। दोनों के बीच समझौता हो गया है।