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उठो देव, उठो देव, गुड़ माड़े खाओ ...
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औरैया। देवोत्थान एकादशी का पर्व जिले में परंपरागत व श्रद्धाभाव के साथ मनाई गई। भगवान को झोंपड़ी में बैठाकर उनकी पूजा की गई। इसी पर्व के साथ वैवाहिक कार्यों के साथ अन्य शुभ कार्य भी प्रारंभ हो गए हैं।
देवोत्थान एकादशी के कारण जगह-जगह गन्ने की दुकानें सजीं रहीं। चार महीने तक शयनावस्था में रहने के बाद आज कार्तिक शुक्ल एकादशी को भगवान जाग गए हैं। घरों में आंगन में ईख की झोपड़ी बनाकर उसमें आटे का चौक पूर कर भगवान को विराजमान कराया गया। चौक के समानांतर दो रेखाओं से इस झोपड़ी को पूजा गृह से जोड़ा गया और पांवों के निशान उस पूजा घर तक ले जाए गए। घर के सभी सदस्यों ने विधि विधान से भगवान की पूजा की और बाद में धान डाल कर सभी ने माथा टेका।
पूजा करते समय बुंदेली में भगवान से प्रार्थना की जाती है, उठो देव, उठो देव, गुड़ माड़े खाओ, कुंवारिन के ब्याह कराव। घरों के दरवाजों पर दीये भी जलाए गए और बच्चों ने पटाखे फोड़े। देवोत्थान एकादशी संपन्न हो जाने के बाद विवाह आदि शुभ कार्य प्रारंभ हो गए हैं। हिंदू संस्कृति में देवोत्थान एकादशी के बाद से ही वैवाहिक कार्य होते हैं। कुछ विद्वानों का मत है कि इन चार महीनों के लिए भगवान पाताल लोक जाकर वहां पहरेदारी करते हैं। इसलिए चार महीनों के लिए विवाह आदि शुभ कार्य करना वर्जित माना गया है।
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देवोत्थान एकादशी के कारण जगह-जगह गन्ने की दुकानें सजीं रहीं। चार महीने तक शयनावस्था में रहने के बाद आज कार्तिक शुक्ल एकादशी को भगवान जाग गए हैं। घरों में आंगन में ईख की झोपड़ी बनाकर उसमें आटे का चौक पूर कर भगवान को विराजमान कराया गया। चौक के समानांतर दो रेखाओं से इस झोपड़ी को पूजा गृह से जोड़ा गया और पांवों के निशान उस पूजा घर तक ले जाए गए। घर के सभी सदस्यों ने विधि विधान से भगवान की पूजा की और बाद में धान डाल कर सभी ने माथा टेका।
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पूजा करते समय बुंदेली में भगवान से प्रार्थना की जाती है, उठो देव, उठो देव, गुड़ माड़े खाओ, कुंवारिन के ब्याह कराव। घरों के दरवाजों पर दीये भी जलाए गए और बच्चों ने पटाखे फोड़े। देवोत्थान एकादशी संपन्न हो जाने के बाद विवाह आदि शुभ कार्य प्रारंभ हो गए हैं। हिंदू संस्कृति में देवोत्थान एकादशी के बाद से ही वैवाहिक कार्य होते हैं। कुछ विद्वानों का मत है कि इन चार महीनों के लिए भगवान पाताल लोक जाकर वहां पहरेदारी करते हैं। इसलिए चार महीनों के लिए विवाह आदि शुभ कार्य करना वर्जित माना गया है।
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