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Auraiya News: आंखों में बढ़ रही कंप्यूटर विजन सिंड्रोम बीमारी
Sat, 16 May 2026 12:19 AM IST
कानपुर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
संवाद न्यूज एजेंसी, औरैया
Updated Sat, 16 May 2026 12:19 AM IST
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औरैया। स्मार्टफोन, कंप्यूटर और लैपटॉप के अत्यधिक उपयोग से आंखों में कंप्यूटर विजन सिंड्रोम बीमारी हो रही है।
बिधूना स्थित डॉ. राममनोहर लोहिया नेत्र चिकित्सालय में इन दिनों आंखों की समस्या लेकर पहुंचने वाले मरीजों की संख्या बढ़ रही है। हर दिन दो-तीन नए मरीज इस सिंड्रोम के लक्षणों के साथ पहुंच रहे हैं।
चिकित्सकों के अनुसार जब हम घंटों तक डिजिटल स्क्रीन को बिना पलक झपकाए देखते हैं तो आंखों की नमी कम होने लगती है। स्क्रीन से निकलने वाली ब्लू लाइट रेटिना पर बुरा प्रभाव डालती है। नेत्र सर्जन डॉ. जयकिशन ने बताया कि सामान्य तौर पर एक व्यक्ति एक मिनट में 15-20 बार पलकें झपकाता है लेकिन स्क्रीन देखते समय यह दर घटकर मात्र 5-7 बार रह जाती है।
इससे आंखें शुष्क हो जाती हैं। चिकित्सक उपचार के साथ ही ऐसे मरीजों को स्क्रीन टाइम कम करने की सलाह दे रहे हैं। इनमें बच्चों और कामकाजी युवाओं की संख्या सबसे अधिक है।
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इन लक्षणों को न करें नजरंदाज
-आंखों में जलन, खुजली और लालिमा का होना।
-बार-बार सिरदर्द होना और धुंधला दिखाई देना।
-आंखों में भारीपन और पानी आने की समस्या।
-गर्दन, कंधों और पीठ में जकड़न महसूस होना।
-एकाग्रता में कमी आना।
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इन उपायों को अपनाएं
-हर 20 मिनट के काम के बाद, 20 फीट दूर रखी किसी वस्तु को कम से कम 20 सेकंड तक देखें।
- काम के दौरान सचेत रहकर बार-बार पलकें झपकाएं ताकि आंखों में नमी बनी रहे।
-कंप्यूटर या मोबाइल को आंखों से कम से कम 25-30 इंच की दूरी पर रखें और एंटी-ग्लेयर चश्मों का उपयोग करें।
-कमरे की रोशनी स्क्रीन की रोशनी से बहुत कम या बहुत अधिक नहीं होनी चाहिए।
-आंखों में परेशानी महसूस होने पर स्वयं आई-ड्रॉप डालने के बजाय विशेषज्ञ से परामर्श लें।
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बिधूना स्थित डॉ. राममनोहर लोहिया नेत्र चिकित्सालय में इन दिनों आंखों की समस्या लेकर पहुंचने वाले मरीजों की संख्या बढ़ रही है। हर दिन दो-तीन नए मरीज इस सिंड्रोम के लक्षणों के साथ पहुंच रहे हैं।
चिकित्सकों के अनुसार जब हम घंटों तक डिजिटल स्क्रीन को बिना पलक झपकाए देखते हैं तो आंखों की नमी कम होने लगती है। स्क्रीन से निकलने वाली ब्लू लाइट रेटिना पर बुरा प्रभाव डालती है। नेत्र सर्जन डॉ. जयकिशन ने बताया कि सामान्य तौर पर एक व्यक्ति एक मिनट में 15-20 बार पलकें झपकाता है लेकिन स्क्रीन देखते समय यह दर घटकर मात्र 5-7 बार रह जाती है।
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इससे आंखें शुष्क हो जाती हैं। चिकित्सक उपचार के साथ ही ऐसे मरीजों को स्क्रीन टाइम कम करने की सलाह दे रहे हैं। इनमें बच्चों और कामकाजी युवाओं की संख्या सबसे अधिक है।
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इन लक्षणों को न करें नजरंदाज
-आंखों में जलन, खुजली और लालिमा का होना।
-बार-बार सिरदर्द होना और धुंधला दिखाई देना।
-आंखों में भारीपन और पानी आने की समस्या।
-गर्दन, कंधों और पीठ में जकड़न महसूस होना।
-एकाग्रता में कमी आना।
इन उपायों को अपनाएं
-हर 20 मिनट के काम के बाद, 20 फीट दूर रखी किसी वस्तु को कम से कम 20 सेकंड तक देखें।
- काम के दौरान सचेत रहकर बार-बार पलकें झपकाएं ताकि आंखों में नमी बनी रहे।
-कंप्यूटर या मोबाइल को आंखों से कम से कम 25-30 इंच की दूरी पर रखें और एंटी-ग्लेयर चश्मों का उपयोग करें।
-कमरे की रोशनी स्क्रीन की रोशनी से बहुत कम या बहुत अधिक नहीं होनी चाहिए।
-आंखों में परेशानी महसूस होने पर स्वयं आई-ड्रॉप डालने के बजाय विशेषज्ञ से परामर्श लें।