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Auraiya News: किताबों में कमीशन का खेल, अभिभावक परेशान

Wed, 03 Apr 2024 11:11 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Wed, 03 Apr 2024 11:11 PM IST
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Commission game in books, parents worried
संवाद न्यूज एजेंसी
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औरैया। कहने को शिक्षा का अधिकार सभी को है, लेकिन वास्तविक रूप से इस अधिकार से प्राइवेट स्कूल के बच्चे महंगाई के चलते वंचित हो रहे हैं। यहां तक कि कापी किताबों का बोझ मध्यम वर्गीय से लेकर गरीब वर्ग के बच्चों के अभिभावकों पर बोझ बन रही है।
कक्षा एक से लेकर आठ तक की पाठ्य पुस्तक के अलावा लंच बाक्स व पानी की बोतल मिलाकर लगभग पांच से छह हजार रुपये का भारी भरकम खर्च अभिभावकों लिए चुनौती बन रहा। वहीं दुकानों पर 20 फीसद छूट दिखाकर कमीशन का खेल किया जाता है।
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आज के दौर में आज हर चीज महंगी हो चुकी है। फिर शिक्षा के मंदिर कहे जाने वाले विद्यालय भी इससे अछूते नहीं हैं। बुधवार को एनसीआरटी की किताबों की कीमत व तैयार बस्ते पर नजर डाली तो होश उड़ गए। बाजार में सजी नर्सरी से लेकर आठवीं तक की स्टेशनरी की दुकानों पर पांच हजार से लेकर छह हजार रुपये तक बस्ता बनकर तैयार हो रहा है।
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किताबों में स्कूलों का कमीशन भी शामिल
ऐसे में मध्यम वर्गीय परिवार के लोगों के लिए प्राइवेट स्कूल में बच्चों की पढ़ाई करा पाना मुश्किल बना हुआ है। अहम बात यह है कि विभिन्न दुकानों पर बिक रहीं एनसीआरटी की किताबों के अलावा कापियां खरीदने को लेकर दुकानदारों की ओर से 20 से लेकर 25 प्रतिशत तक का कमीशन छोड़कर अभिभावकों से हमदर्दी दिखाई जा रही है। वहीं सूत्रों के अनुसार इस कमीशन का काफी मोटा हिस्सा विद्यालयों को भी दिया जाता है। यदि यही कमीशन विद्यालयों को देने की बजाय दुकान संचालक अभिभावकों को देना शुरू कर दें तो इससे अभिभावकों को काफी राहत मिल सकती है।
स्कूलों की स्टेशनरी की दुकान है चिन्हित
कोई भी दुकानदार इस बात को कहने से कतराता नजर आ रहा है कि वह किसी स्कूल को कमीशन भी देता है। पर इसका अंदाजा भी इस बात से लगाया जा सकता है कि विद्यालयों की ओर से दुकानों को चिन्हित कर उनसे विद्यालय में पढ़ाई जाने वाली किताबों को ही रखने का एग्रीमेंट अंदर ही अंदर हो जाने के बाद भी संबंधित दुकानदार भी वहीं किताबें अपनी दुकान पर रखता है जो उक्त स्कूल में चलतीं हों। ऐसे में आखिरी में अभिभावक ही शोषण का शिकार होकर रह जाता है। स्कूल ले जाने के लिए तैयार बैग को लेकर जब पड़ताल की गई तो स्थिति कुछ इस प्रकार से नजर आई।
कक्षावार कोर्स की कीमत

कक्षा कोर्स की कीमत

नर्सरी लगभग 3000
एलकेजी लगभग 4000
यूकेजी लगभग 3000
कक्षा 1 लगभग 3500
कक्षा 2 लगभग 4000
कक्षा 3 लगभग 5200
कक्षा 4 लगभग 5000
कक्षा 5 लगभग 5500
कक्षा 6 लगभग 5200
कक्षा 7 लगभग 5300
कक्षा 8 लगभग 5700
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तीन विषयों को छोड़कर मंगाई जा रही दूसरे प्रकाशन की पुस्तकें
नर्सरी से लेकर कक्षा आठ तक की पुस्तकों पर नजर डाले तो केवल बलराम कथा गणित व विज्ञान की पुस्तकें ही एनसीआरटी की लगाई गई हैं जबकि हिंदी, अंग्रेजी, संस्कृत,आर्ट, कंप्यूटर, सोशल साइंस आदि किताबें दूसरे प्राइवेट प्रकाशनों की उपयोग में लाई जा रही हैं। ऐसे में दूसरे प्रकाशनों की किताबों में दुकानदार के साथ-साथ विद्यालयों का कमीशन में अच्छा-खासा खेल होता है।

बोले अभिभावक---
पिछले साल के मुकाबले 20 फीसद महंगी हुईं किताबें
फोटो03एयूआरपी 12- अनुराग अग्रवाल
हर साल किताबों के दाम बढ़ने से जेब पर बेवजह का आर्थिक बोझ पड़ता है। पिछली साल की तुलना में इस बार किताबों पर लगभग 20 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। इससे आम आदमी के लिए बच्चों को अब प्राइवेट स्कूलों में पढ़ाना मुश्किल हो रहा है। खासकर प्राइवेट प्रकाशन की पुस्तकों की वजह से महंगाई और ज्यादा है। वहीं दुकानदार अभिभावक को 20 प्रतिशत कमीशन छोड़कर यह जताता है कि उसने तो कुछ कमाया ही नहीं जबकि धरातल की स्थिति तो कुछ और ही है। पहले से ही किताबों पर 40 से 50 प्रतिशत कमीशन तय हो जाता है। ऐसे में 20 प्रतिशत कमीशन छोड़कर हमदर्दी दिखाते हैँ।



फोटो03एयूआरपी 13- शिवम अग्निहोत्री
प्राइवेट स्कूलों में जहां किताबों के दाम तो बढ़े ही हैं। वहीं अन्य मदों के नाम पर भी काफी उगाही होती है। बच्चे को बढ़ाना मजबूरी है। ऐसे में विद्यालय प्रशासन से ज्यादा सवाल करने से बचना भी पड़ता है। पिछली बार की अपेक्षा कक्षा छह, सात व आठ की साइंस, गणित की किताबों में इस बार 40 से 50 रुपये की वृद्धि हुई है। दिनों दिन हो रही महंगाई, मध्यम वर्गीय परिवारों के बच्चों की पढ़ाई पर संकट खड़ा कर रही है।
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