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बदलेगी 52 साधन सहकारी समितियों की सूरत
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जर्जर स्थिति में भीखमपुर सहकारी समिति।
- फोटो : AURAIYA
औरैया। जिले की साधन सहकारी समितियों के भवनों की कई सालों से मरम्मत नहीं हुई है। भवनों की हालत जर्जर है। ये हाल तब है जबकि 80 सहकारी समितियों में 60 सक्रिय हैं। यहां कर्मियों को भी परेशानी होती है। अब इन समितियों के दिन बहुरने वाले हैं। विभाग ने शासन को 52 सहकारी समितियों के भवनों की मरम्मत और रंगाई पुताई के लिए दस करोड़ रुपये का प्रस्ताव भेजा है।
सात साल से मरम्मत के इंतजार में
दयालपुर स्थित साधन सहकारी समिति भीखमपुर सात साल से बंद पड़ी है। भवन के छज्जे की सरिया बाहर निकल आईं हैं। दीवारें चटक गईं हैं। सहकारिता विभाग के अधिकारियों ने भी कभी यहां आने की जहमत नहीं उठाई। इस समिति से जुड़े किसानों को दूर-दराज की समितियों से खाद लेने जा पड़ रहा है।
बीज भंडार तक ही सीमित हो गया कार्य
सदर ब्लॉक की ग्राम पंचायत अयाना में सहकारी संघ के भवन का निर्माण करीब 20 साल पूर्व कराया गया था। संघ के सचिव संजीव कुमार चतुर्वेदी ने बताया कि यहां बीज का भंडार किया जाता है। इसके अलावा कोई भी कार्य नहीं होता। सचिव संजीव की तैनाती मिहौली संघ पर है। इसके अलावा अयाना, औरैया, देवरपुर, हरचंदपुर, मुरादगंज और भाग्यनगर की भी जिम्मेदारी है।
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इमारत जर्जर, सता रहा हादसे का डर
ग्राम पंचायत सहायल में स्थित सहकारी किसान संघ की इमारत की दीवारों में जगह-जगह दरारे पड़ गईं हैं। संघ के सचिव प्रेम चंद्र राजपूत, व अध्यक्ष जितेंद्र सिंह बरामदे में बैठते हैं। अध्यक्ष जितेंद्र सिंह ने बताया कि कई बार अधिकारियों को इस बारे में बता चुके हैं।
पहले मरम्मत के नाम पर लिए जाते थे दस रुपये
करीब आठ-दस वर्ष पहले तक समितियों के किसानों व सदस्यों से भवनों की मरम्मत के नाम पर दस रुपये लिए जाते थे। दो तीन वर्ष में पर्याप्त धनराशि एकत्र होने पर इन समितियों की मरम्मत और रंगाई पुताई का काम होता था। लेकिन ये व्यवस्था समाप्त होने के बाद ध्यान नहीं दिया गया।
जिले में 80 में 60 सहकारी समितियां सक्रिय हैं। जिसमें 52 भवनों की मरम्मत के लिए शासन को दस करोड़ रुपये का प्रस्ताव भेजा गया है। स्वीकृति मिलने के बाद इन भवनों को दुरुस्त कराया जाएगा। - कमलकांत मिश्रा, एआर कोऑपरेटिव
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सात साल से मरम्मत के इंतजार में
दयालपुर स्थित साधन सहकारी समिति भीखमपुर सात साल से बंद पड़ी है। भवन के छज्जे की सरिया बाहर निकल आईं हैं। दीवारें चटक गईं हैं। सहकारिता विभाग के अधिकारियों ने भी कभी यहां आने की जहमत नहीं उठाई। इस समिति से जुड़े किसानों को दूर-दराज की समितियों से खाद लेने जा पड़ रहा है।
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बीज भंडार तक ही सीमित हो गया कार्य
सदर ब्लॉक की ग्राम पंचायत अयाना में सहकारी संघ के भवन का निर्माण करीब 20 साल पूर्व कराया गया था। संघ के सचिव संजीव कुमार चतुर्वेदी ने बताया कि यहां बीज का भंडार किया जाता है। इसके अलावा कोई भी कार्य नहीं होता। सचिव संजीव की तैनाती मिहौली संघ पर है। इसके अलावा अयाना, औरैया, देवरपुर, हरचंदपुर, मुरादगंज और भाग्यनगर की भी जिम्मेदारी है।
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इमारत जर्जर, सता रहा हादसे का डर
ग्राम पंचायत सहायल में स्थित सहकारी किसान संघ की इमारत की दीवारों में जगह-जगह दरारे पड़ गईं हैं। संघ के सचिव प्रेम चंद्र राजपूत, व अध्यक्ष जितेंद्र सिंह बरामदे में बैठते हैं। अध्यक्ष जितेंद्र सिंह ने बताया कि कई बार अधिकारियों को इस बारे में बता चुके हैं।
पहले मरम्मत के नाम पर लिए जाते थे दस रुपये
करीब आठ-दस वर्ष पहले तक समितियों के किसानों व सदस्यों से भवनों की मरम्मत के नाम पर दस रुपये लिए जाते थे। दो तीन वर्ष में पर्याप्त धनराशि एकत्र होने पर इन समितियों की मरम्मत और रंगाई पुताई का काम होता था। लेकिन ये व्यवस्था समाप्त होने के बाद ध्यान नहीं दिया गया।
जिले में 80 में 60 सहकारी समितियां सक्रिय हैं। जिसमें 52 भवनों की मरम्मत के लिए शासन को दस करोड़ रुपये का प्रस्ताव भेजा गया है। स्वीकृति मिलने के बाद इन भवनों को दुरुस्त कराया जाएगा। - कमलकांत मिश्रा, एआर कोऑपरेटिव