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बैंक की तानाशाही, लोगों पर आफत आई
auraiya,amar ujala beauro
Updated Fri, 18 Nov 2016 11:48 PM IST
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बैंक के अंदर लाइन में खड़े लोग
- फोटो : अमर उजाला
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स्थान-तिर्वा चौराहा। सेंट्रल बैंक। हालात-सुबह सात बजे से लाइन में लगे लोग। उम्मीद- शायद आज उनके नोट बदल जाएं। लेकिन सुबह से लेकर शाम तक लाइन में लगने के बाद भी करेंसी न होने की बात कहकर बैंक कर्मियों ने लोगों को हटा दिया।
यह घटनाक्रम बेला की सेंट्रल बैंक में एक दिन का नही है। रोज ऐसा ही सीन इस बैंक में देखने को मिल रहा है। कस्बे व आसपास ग्रामीणों की एक मात्र इस बैंक में लोग रोज सुबह सात बजे से लग जाते हैं। मगर बैंक हर रोज करेंसी न होने का रोना रोकर लोगो को लौटा देती है। किसी कि किस्मत हो या पहचान हो तो ही भले यहां नये नोट लोगों को मिल रहे हैं। लाइन में लगे हरिराम का दर्द है कि घर में चूल्हा जलाने को भी रुपये नही है।
आज चौथे दिन वह फिर उम्मीद लेकर आए कि उनके नोट बदल जाये तो वह घर में शाम के खाने की व्यवस्था कर सकें। मेवालाल जो कि अनाज देकर कुछ दिनों से अपने घर का चूल्हा जा रहे हैं। आज भी दिन भर बर्बाद करने के बाद उन्हें निराश ही लगी।
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पति बीमार हाथ में धेला नही
बेला ग्रामीण क्षेत्र की रहने वाली पानकुमारी के पति किशोरी लाल कुछ दिनों से बीमार हैं। घर में सुबह शाम खाने के भी रुपये नही बचे हैं, पति की दवायें कहां से लाएं। वह तीन दिन से लगातार बैंक आ रही है। बैंक कर्मियों से गिड़गिड़ा रही है मगर बैंक कर्मी पसीज नही रहे। आज भी वह आंखों में आंसू लेकर घर लौटी। उसे चिंता सता रही कि वह पति की दवाओं के लिए किसके आगे हाथ फैलाए।
खाद, बीज न मिला तो सब बर्बाद
उदय प्रताप के तीन दिन लाइन में ही गुजर गये। कब दिन होता कब सवेरा वह जान ही नही पा रहा। तीन दिन से उसे निराशा ही हाथ लग रही। आज जब वह लाइन में खड़ा था तो चक्कर खाकर गिर गया। लोगों ने उठाया तो वह रो पड़ा कि उसके खेत में बुवाई होनी है। रुपये न होने से वह खाद बीज नही ले पा रहा है। धान की फसल में भी उसे घाटा हुआ। यह फसल भी हाथ से जा रही है।
बैंक कर्मियों पर मील वालों को रुपये देने का आरोप
बैंक की लाइन में कई दिनों से लाइन में लग कर नोट बदलवाने आ रहे ग्रामीण किसानों ने आरोप लगाया है कि कुछ मील वाले आते हैं तो बैंक कर्मी उन्हें सीधे बैग में रुपये दे देते हैं जबकि उन्हें करेंसी न होने की बात कहकर लौटाया जा रहा है। ग्रामीण ने डीएम से जांच कराने की मांग की है।
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यह घटनाक्रम बेला की सेंट्रल बैंक में एक दिन का नही है। रोज ऐसा ही सीन इस बैंक में देखने को मिल रहा है। कस्बे व आसपास ग्रामीणों की एक मात्र इस बैंक में लोग रोज सुबह सात बजे से लग जाते हैं। मगर बैंक हर रोज करेंसी न होने का रोना रोकर लोगो को लौटा देती है। किसी कि किस्मत हो या पहचान हो तो ही भले यहां नये नोट लोगों को मिल रहे हैं। लाइन में लगे हरिराम का दर्द है कि घर में चूल्हा जलाने को भी रुपये नही है।
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आज चौथे दिन वह फिर उम्मीद लेकर आए कि उनके नोट बदल जाये तो वह घर में शाम के खाने की व्यवस्था कर सकें। मेवालाल जो कि अनाज देकर कुछ दिनों से अपने घर का चूल्हा जा रहे हैं। आज भी दिन भर बर्बाद करने के बाद उन्हें निराश ही लगी।
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पति बीमार हाथ में धेला नही
बेला ग्रामीण क्षेत्र की रहने वाली पानकुमारी के पति किशोरी लाल कुछ दिनों से बीमार हैं। घर में सुबह शाम खाने के भी रुपये नही बचे हैं, पति की दवायें कहां से लाएं। वह तीन दिन से लगातार बैंक आ रही है। बैंक कर्मियों से गिड़गिड़ा रही है मगर बैंक कर्मी पसीज नही रहे। आज भी वह आंखों में आंसू लेकर घर लौटी। उसे चिंता सता रही कि वह पति की दवाओं के लिए किसके आगे हाथ फैलाए।
खाद, बीज न मिला तो सब बर्बाद
उदय प्रताप के तीन दिन लाइन में ही गुजर गये। कब दिन होता कब सवेरा वह जान ही नही पा रहा। तीन दिन से उसे निराशा ही हाथ लग रही। आज जब वह लाइन में खड़ा था तो चक्कर खाकर गिर गया। लोगों ने उठाया तो वह रो पड़ा कि उसके खेत में बुवाई होनी है। रुपये न होने से वह खाद बीज नही ले पा रहा है। धान की फसल में भी उसे घाटा हुआ। यह फसल भी हाथ से जा रही है।
बैंक कर्मियों पर मील वालों को रुपये देने का आरोप
बैंक की लाइन में कई दिनों से लाइन में लग कर नोट बदलवाने आ रहे ग्रामीण किसानों ने आरोप लगाया है कि कुछ मील वाले आते हैं तो बैंक कर्मी उन्हें सीधे बैग में रुपये दे देते हैं जबकि उन्हें करेंसी न होने की बात कहकर लौटाया जा रहा है। ग्रामीण ने डीएम से जांच कराने की मांग की है।