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जिले में 450 गायों का कृत्रिम गर्भाधान
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औरैया। अन्ना गोवंश की समस्या से निपटने के लिए शासन ने नई पहल शुरू की है। पशु पालन विभाग में कृत्रिम गर्भाधान के प्रयास शुरू हुए हैं, जिससे अन्ना सांड़ों की समस्या से निजात मिल सके। पशु चिकित्साधिकारी केजी सिंह ने बताया कि जिले के औरैया, अजीतमल, भाग्यनगर, अछल्दा, एरवाकटरा, बिधूना व सहार ब्लॉक में पहले चरण में 450 गायों का कृत्रिम गर्भाधान कराया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि आवारा पशुओं में ज्यादातर बछड़ों की संख्या देखने को मिली है। गोवंश का विशेष ख्याल रखने के कारण पशु चिकित्सा विभाग ने साहीवाल नस्ल का सीमन तैयार किया है, जिसमें कृत्रिम गर्भाधान से सिर्फ बछिया ही पैदा होगी।
इस संबंध में जिला पशु चिकित्साधिकारी केजी सिंह ने बताया कि पहले सीमन में यह व्यवस्था नहीं होती थी कि गाय में बछिया या भैंस में पड़वा होगा। सरकार ने नस्ल सुधारने के लिए नई व्यवस्था शुरू की है। पहले चरण में गोपालकों को 300 रुपये प्रति सीमन के हिसाब से दिया जा रहा है। इस सीमन से केवल बछिया ही होगी। जबकि यही सीमन प्राइवेट कंपनी नमस्ते इंडिया, डेफ आदि 1200 रुपये में बेच रही हैं। किसानों को सहूलियत देने के उद्देश्य से सरकार ने यह व्यवस्था सुनिश्चित की है। इससे किसानों को 900 रुपये की बचत होगी। जिला पशु चिकित्साधिकारी केजी सिंह ने बताया कि 2200 गोवंश के लिए सीमन प्राप्त हुआ है, जिसमें करीब 450 किसान गायों में प्रयोग कर चुके हैं। सीमन खत्म होने की स्थिति में और डिमांड शासन को भेजी जाएगी।
जिले में 40 से अधिक अस्थायी गोशालाओं का निर्माण कराया गया है, लेकिन इसके बाद भी लोगों को अन्ना मवेशियों से निजात नहीं मिल रही है। अस्थायी गोशालाओं में अतिरिक्त बोझ बढ़ने से प्रशासन को चारे की समस्या का सामना करना पड़ रहा है।
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इस संबंध में जिला पशु चिकित्साधिकारी केजी सिंह ने बताया कि पहले सीमन में यह व्यवस्था नहीं होती थी कि गाय में बछिया या भैंस में पड़वा होगा। सरकार ने नस्ल सुधारने के लिए नई व्यवस्था शुरू की है। पहले चरण में गोपालकों को 300 रुपये प्रति सीमन के हिसाब से दिया जा रहा है। इस सीमन से केवल बछिया ही होगी। जबकि यही सीमन प्राइवेट कंपनी नमस्ते इंडिया, डेफ आदि 1200 रुपये में बेच रही हैं। किसानों को सहूलियत देने के उद्देश्य से सरकार ने यह व्यवस्था सुनिश्चित की है। इससे किसानों को 900 रुपये की बचत होगी। जिला पशु चिकित्साधिकारी केजी सिंह ने बताया कि 2200 गोवंश के लिए सीमन प्राप्त हुआ है, जिसमें करीब 450 किसान गायों में प्रयोग कर चुके हैं। सीमन खत्म होने की स्थिति में और डिमांड शासन को भेजी जाएगी।
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जिले में 40 से अधिक अस्थायी गोशालाओं का निर्माण कराया गया है, लेकिन इसके बाद भी लोगों को अन्ना मवेशियों से निजात नहीं मिल रही है। अस्थायी गोशालाओं में अतिरिक्त बोझ बढ़ने से प्रशासन को चारे की समस्या का सामना करना पड़ रहा है।
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