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लखनऊ भेजी गई पंचनद बांध की प्रोजेक्ट रिपोर्ट
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वह स्थान जहां पंचनद बांध योजना का बनाया गया है प्रस्ताव।
- फोटो : AURAIYA
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औरैया। जुहीखा के पास पंचनद बांध बनाकर बुंदेलखंड में हरियाली लाई जा सकती है। इस प्रोजेक्ट की रिपोर्ट को स्थानीय सिंचाई विभाग के अफसरों ने लखनऊ भेज दिया। यहां से रिपोर्ट दिल्ली भेजी जाएगी। फिर बजट मिलते ही निर्माण शुरू हो जाएगा। इस प्रोजेक्ट को लेकर सांसद डॉ. रामशंकर कठेरिया पूरी तरह से आश्वस्त दिख रहे हैं।
राज्य में सिंचाई, विद्युत और बुंदेलखंड के सूखे की त्रासदी को दृष्टिगत रखते हुए इस दिशा में पहला कदम क्षेत्रीय विधायक और तत्कालीन राजस्व मंत्री दिवगंत गौरीशंकर ने उठाया था।
उन्होंने जुहीखा के समीप बांध बनाकर तीन नहरें औरैया, कानपुर देहात और चकरनगर क्षेत्रों में निकालने का प्रस्ताव तत्कालीन कांग्रेस मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी को भेजा था। इसे तत्कालीन मुख्यमंत्री नारायण दत्त ने केंद्र में भिजवाया था। इसके बाद केंद्र सरकार ने पांच सदस्यीय विशेषज्ञों की टीम को भेजकर सर्वे कराया था। पांच साल बाद टीम ने रिपोर्ट दी, लेकिन तब तक नारायण दत्त की सरकार जा चुकी थी। इसके बाद यह योजना ठंडे बस्ते में चली गई।
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क्षेत्रीय जनता और समाजसेवियों के आग्रह पर सांसद रहे रघुराज शाक्य ने पंचनद बांध योजना का मुद्दा उठाया। उनका तर्क था कि इस बांध से बुंदेलखंड में हरियाली लाई जा सकती है। पंचनद बांध से नहरों के माध्यम से जालौन के रास्ते पूरे बुंदेलखंड को सिंचाई का विकल्प देने का सर्वे सरकार द्वारा करवाया गया। उस दौरान मध्य प्रदेश सरकार ने राज्य में पानी की कमी का अंदेशा जताते हुए ऐतराज जताया। इस पर मामला एक बार फिर खटाई में पड़ गया। बाद में इटावा सांसद प्रेमदास कठेरिया ने संसद में एक बार फिर गतिरोधक को कम करते हुए तीन नहरों के अतिरिक्त दो अन्य नहरें राजस्थान और मध्यप्रदेश के सूखा प्रभावित क्षेत्रों में निकलवाने का सुझाव रखा। जिस पर दोनों राज्यों के गृहसचिवों स्तर पर सहमति भी बन गई। मगर अफसोस केंद्र सरकार पंचनद बांध परियोजना की दिशा में काम करती नहीं दिखी। इसके बाद अब फिर इस मुद्दे को इटावा सांसद डॉ. रामशंकर कठेरिया ने उठाया है। (संवाद)
बेहाल किसानों को मिल सकती है राहत
पर्यावरण विद बृजेश दीक्षित ने बताया कि पंचनद में यमुना, चंबल, सिंध, पहुज, क्वारी नदियां मिलती है। इसका पानी जुहीखा के पास एकत्र किया जा सकता है। लिफ्ट योजना से बुंदेलखंड को सिंचाई के लिए पानी दिया जा सकता है। इससे वहां सूखे की मार से बेहाल किसानों को प्राकृतिक वर्षा पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा और गन्ना, गेहूं, धान जैसी फसलों के साथ-साथ बागवानी एवं सब्जियों की फसलें भी लहलहा उठेंगी।
पंचनद बांध के लिए 3011.85 करोड़ रुपये की डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) मुख्य अभियंता समिति लखनऊ को भेजी है। संस्तुति के बाद प्रोजेक्ट को केंद्रीय जल आयोग नई दिल्ली को भेजा जाएगा। वहां से संस्तुति के बाद पंचनद बैराज का निर्माण कार्य शुरू होगा।
रवि शंकर मिश्रा, एक्सईएन, सिंचाई खंड औरैया
पंचनद बांध को लेकर केंद्र व राज्य की सरकार गंभीर है। लखनऊ से जल्द ही संस्तुति के बाद दिल्ली में संस्तुति दिलाई जाएगी। इसके बाद बैराज का निर्माण कार्य शुरू होने की उम्मीद है।
डॉ.रामशंकर कठेरिया, सांसद
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राज्य में सिंचाई, विद्युत और बुंदेलखंड के सूखे की त्रासदी को दृष्टिगत रखते हुए इस दिशा में पहला कदम क्षेत्रीय विधायक और तत्कालीन राजस्व मंत्री दिवगंत गौरीशंकर ने उठाया था।
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उन्होंने जुहीखा के समीप बांध बनाकर तीन नहरें औरैया, कानपुर देहात और चकरनगर क्षेत्रों में निकालने का प्रस्ताव तत्कालीन कांग्रेस मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी को भेजा था। इसे तत्कालीन मुख्यमंत्री नारायण दत्त ने केंद्र में भिजवाया था। इसके बाद केंद्र सरकार ने पांच सदस्यीय विशेषज्ञों की टीम को भेजकर सर्वे कराया था। पांच साल बाद टीम ने रिपोर्ट दी, लेकिन तब तक नारायण दत्त की सरकार जा चुकी थी। इसके बाद यह योजना ठंडे बस्ते में चली गई।
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क्षेत्रीय जनता और समाजसेवियों के आग्रह पर सांसद रहे रघुराज शाक्य ने पंचनद बांध योजना का मुद्दा उठाया। उनका तर्क था कि इस बांध से बुंदेलखंड में हरियाली लाई जा सकती है। पंचनद बांध से नहरों के माध्यम से जालौन के रास्ते पूरे बुंदेलखंड को सिंचाई का विकल्प देने का सर्वे सरकार द्वारा करवाया गया। उस दौरान मध्य प्रदेश सरकार ने राज्य में पानी की कमी का अंदेशा जताते हुए ऐतराज जताया। इस पर मामला एक बार फिर खटाई में पड़ गया। बाद में इटावा सांसद प्रेमदास कठेरिया ने संसद में एक बार फिर गतिरोधक को कम करते हुए तीन नहरों के अतिरिक्त दो अन्य नहरें राजस्थान और मध्यप्रदेश के सूखा प्रभावित क्षेत्रों में निकलवाने का सुझाव रखा। जिस पर दोनों राज्यों के गृहसचिवों स्तर पर सहमति भी बन गई। मगर अफसोस केंद्र सरकार पंचनद बांध परियोजना की दिशा में काम करती नहीं दिखी। इसके बाद अब फिर इस मुद्दे को इटावा सांसद डॉ. रामशंकर कठेरिया ने उठाया है। (संवाद)
बेहाल किसानों को मिल सकती है राहत
पर्यावरण विद बृजेश दीक्षित ने बताया कि पंचनद में यमुना, चंबल, सिंध, पहुज, क्वारी नदियां मिलती है। इसका पानी जुहीखा के पास एकत्र किया जा सकता है। लिफ्ट योजना से बुंदेलखंड को सिंचाई के लिए पानी दिया जा सकता है। इससे वहां सूखे की मार से बेहाल किसानों को प्राकृतिक वर्षा पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा और गन्ना, गेहूं, धान जैसी फसलों के साथ-साथ बागवानी एवं सब्जियों की फसलें भी लहलहा उठेंगी।
पंचनद बांध के लिए 3011.85 करोड़ रुपये की डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) मुख्य अभियंता समिति लखनऊ को भेजी है। संस्तुति के बाद प्रोजेक्ट को केंद्रीय जल आयोग नई दिल्ली को भेजा जाएगा। वहां से संस्तुति के बाद पंचनद बैराज का निर्माण कार्य शुरू होगा।
रवि शंकर मिश्रा, एक्सईएन, सिंचाई खंड औरैया
पंचनद बांध को लेकर केंद्र व राज्य की सरकार गंभीर है। लखनऊ से जल्द ही संस्तुति के बाद दिल्ली में संस्तुति दिलाई जाएगी। इसके बाद बैराज का निर्माण कार्य शुरू होने की उम्मीद है।
डॉ.रामशंकर कठेरिया, सांसद