फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Auraiya News ›   auraiya news,Address of the medical store stating with the medicine

50 शैया अस्पताल में बाहर से दवा खरीदने को मजबूर मरीज

Tue, 08 Mar 2022 11:35 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Tue, 08 Mar 2022 11:35 PM IST
विज्ञापन
auraiya news,Address of the medical store stating with the medicine
फोटो-08एयूआरपी-16 बाहर से खरीदी गई दवा दिखाती मीरा देवी। संवाद - फोटो : AURAIYA
औरैया। अगर आप यह सोचकर 50 शैया अस्पताल आ रहे हैं कि यहां आपकी बीमारी की दवाएं मुफ्त में मिल जाएंगी। आपको बाहर से दवा नहीं खरीदनी पड़ेगी।
विज्ञापन

तो यह विचार अपने मन से आप निकाल दें। क्योंकि अस्पताल में आने वाले मरीजों को चिकित्सक अच्छे इलाज के नाम पर निजी कंपनियों की दवाएं लिख रहे हैं। उन्हें यह भी बता रहे हैं कि यह दवा किस मेडिकल स्टोर पर मिलेगी।
सरकार भले ही आम लोगों को मुफ्त इलाज उपलब्ध कराने की दम भरती है लेकिन सरकारी अस्पतालों की व्यवस्था देख कर इस दम का ही दम निकल जाता है।
हालात ये हैं कि 50 शैया अस्पताल की ओपीडी में आए मरीजों को यहां के डॉक्टर अधिकतर दवाएं बाहर की लिख रहे हैं। साथ ही यह भी बताते है कि आपके मर्ज की दवा किस मेडिकल स्टोर में मिलेगी।
विज्ञापन

पड़ताल में यह बात उजागर हुई। मंगलवार को 450 से अधिक पर्चे ओपीडी में बने। मरीज अपने पर्चे लेकर ओपीडी में बैठे मर्ज से संबंधित डॉक्टरों के पास गए। डॉक्टरों ने कुछ दवाएं तो अंदर की लिखी।
विज्ञापन
विज्ञापन

जबकि अधिकांश दवाएं बाहर की लिख दी। हद इस बात की है कि ओपीडी के समय में डॉक्टरों को मरीजों को देखने में समय लगाना चाहिए। वह निजी दवा कंपनियों के एमआर से बात करने में लगाते हैं। उच्चाधिकारी भी सब कुछ जानते हुए खमोश बैठे हुए है।
उपयोगहीन बना जन औषधि केंद्र
जेनेरिक और सस्ती दवाएं मरीजों को मिल सके। इसके लिए अस्पताल परिसर में जन औषधि केंद्र बना हुआ है। लेकिन यहां मरीज दवा लेने नहीं जाते हैं। क्योंकि मरीजों को दवा मिलने का जो पता डॉक्टर बताते हैं। वहीं पर मरीज और उनके तीमारदार दवा लेने पहुंचते हैं। ऐसे में यह जन औषधि केंद्र उपयोगहीन साबित हो रहा है।
करमपुर की रमाकांति ने बताया कि वह आंख दिखाने आई थीं। डॉक्टर ने चार दवाएं लिखी। इनमें से सिर्फ एक दवा ही जन औषधि केंद्र पर मिली, बाकी बाहर मेडिकल स्टोर में मिली। ऐसे में सरकारी अस्पताल का क्या फायदा, जहां दवा बाहर से खरीदनी पड़े।
जलोखर के मनोज ने बताया कि तीन साल की बेटी साक्षी को कुत्ते ने काट लिया था। मंगलवार को अस्पताल में एंटी रेबीज इंजेक्शन लगवाने के लिए आए थेे। मगर, यहां पर डिस्पोजल (सिरिंज) नहीं थी, जो बाहर से खरीद कर लानी पड़ी।
गुमटी मोहल्ला निवासी मीरा देवी ने बताया कि उनकी आंख में समस्या होने पर 50 शैया अस्पताल में दिखाने आई थीं। अस्पताल में दवा नहीं होने पर डॉक्टर ने खुद बोला कि अम्मा ये दवाएं बाहर मेडिकल स्टोर में मिलेगी। वहां से ले लो।

अगर कोई डॉक्टर बाहर की दवाएं लिखता है, तो उसे चेतावनी दी जाएगी। अस्पताल में सभी दवाएं उपलब्ध है। एमआर को ओपीडी के समय आने की मनाही है। इसके बाद भी कोई परिसर में मिलता है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। - डॉ. राजेश मोहन गुप्ता, सीएमएस 50 शैया अस्पताल

फोटो-08एयूआरपी-13 ओपीडी के समय डॉक्टर के कक्ष से बाहर निकलता एमआर । संवाद

फोटो-08एयूआरपी-13 ओपीडी के समय डॉक्टर के कक्ष से बाहर निकलता एमआर । संवाद- फोटो : AURAIYA

फोटो-08एयूआरपी-14 डॉक्टर द्वारा पर्चे में लिखी चार दवाओं के नाम दिखाती रमाकांति। संवाद

फोटो-08एयूआरपी-14 डॉक्टर द्वारा पर्चे में लिखी चार दवाओं के नाम दिखाती रमाकांति। संवाद- फोटो : AURAIYA

फोटो-08एयूआरपी-15 बाहर से डिस्पोजल (सिरिंज) लाकर दिखाते मनोज। संवाद

फोटो-08एयूआरपी-15 बाहर से डिस्पोजल (सिरिंज) लाकर दिखाते मनोज। संवाद- फोटो : AURAIYA

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed