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उमा ने दिखाई स्वरोजगार की राह

Sun, 01 May 2022 12:55 AM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Sun, 01 May 2022 12:55 AM IST
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aprajita, uma
फोटो-30एयूआरपी-16- किचन गार्डन में सब्जियों के पौधों के साथ उमा। संवाद - फोटो : AURAIYA
दिबियापुर। ब्लाक भाग्यनगर में पाता प्लांट के पास स्थित कुतुबपुर की उमा देवी गांव और क्षेत्र की महिलाओं के लिए मिसाल हैं। वह खुद स्वावलंबी होने के साथ अन्य महिलाओं को स्वरोजगार अपनाने की राह दिखा रही हैं। बकरी पालन, किचन गार्डन के साथ ही उन्होंने महिलाओं का समूह भी बनाया है।
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पाता प्लांट में मजदूरी करने वाले महेश बाबू की पत्नी उमा देवी ने बताया कि करीब पांच वर्ष पहले कृषि विज्ञान केंद्र परवाहा के संपर्क में आईं। केंद्र के डॉ. बृज विकास सिंह ने उन्हें बकरी पालन के लिए प्रेरित किया। बकरी पालन से उन्हें पहले साल ही फायदा हुआ। वर्तमान में उनके पास 50 बकरियां हैं। इससे उन्हें प्रतिवर्ष करीब डेढ़ लाख रुपये का फायदा होता है।
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बताया कि वह अन्य महिलाओं को समझाती हैं कि बकरियां हम लोगों के लिए क्रेडिट कार्ड हैं। जब चाहो तब बेच लो। बकरी का दूध भी 30 से 35 रुपये लीटर बिक जाता है। आज कुतुबपुर और आसपास के गांवों के घरों की महिलाएं बकरियां पालने में रुचि लेने लगी हैं। कई महिलाएं बकरी पालन के बारे में जानकारी करने के लिए उनके पास आती हैं। उमा खुद कक्षा आठ तक पढ़ी हैं, लेकिन बेटा और एक बेटी बीएससी और छोटी बेटी पांचवीं में पढ़ रही है।
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स्वयं सहायता समूह का भी करतीं संचालन
उमा बतातीं हैं कि गांव की महिलाओं को स्वरोजगार व अन्य कई कामों के लिए बाजार से ऋण लेना पड़ता है। इसके एवज में दो से तीन प्रतिशत का ब्याज देना पड़ता था। इसके निदान के लिए गांव की 11 महिलाओं के साथ चार वर्ष पहले साकार विश्वहरि स्वयं सहायता समूह बनाया। पहली बार में 15 हजार रुपये एवं दूसरी बार में एक लाख दस हजार रुपये सरकार से समूह को मिले। जरूरत पड़ने पर समूह की महिलाएं एक प्रतिशत ब्याज पर रुपये लेकर अपना काम चला लेती हैं। उमा इस समूह की अध्यक्ष भी हैं। बताया कि पंचायत में कुल 14 महिला स्वयं सहायता समूह हैं। वह इनके लिए समूह सखी की भी जिम्मेदारी उठाती हैं। समूह सखी का काम समूहों में महिलाओं के बीच सामंजस्य बैठाना है।

किचन गार्डन में उगाईं सब्जियां
गांव के सामने ही गुजरे बंबे की पटरी की अनुपयोगी जमीन पर उमा ने किचन गार्डन बनाया है। इसमें वह कई तरह की सब्जियां उगाती हैं। गेल पाता प्लांट कर्मी उनसे ही सब्जियां खरीद कर ले जाते हैं। उमा ने अचार, आंवले का मुरब्बा, बर्फी आदि बनाने का प्रशिक्षण भी लिया है। वह उन्हें बनाकर भी बेचती हैं।
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