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सवा तीन करोड़ खर्च, अन्ना पशु खेत और सड़क पर
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फोटो 24 एयूआरपी 21- दिल्ली-कोलकाता हाईवे पर छुट्टा घूम रहे अन्ना पशु बनते हैं हादसे का सबब
- फोटो : AURAIYA
औरैया। अन्ना मवेशियों से निजात दिलाने के लिए प्रशासन जिले में तकरीबन सवा तीन करोड़ रुपये खर्च कर चुका है। इसके तहत 41 अस्थायी गोशालाओं का निर्माण कराया गया है। इन गोशालाओं में वर्तमान में 3305 अन्ना मवेशी बंद हैं। इनके चारा पानी व गोशालाओं के रखरखाव पर भी हर महीने अच्छी खासी रकम खर्च हो रही है। इसके बाद भी जिले के वाशिंदों को अन्ना मवेशियों से छुटकारा नहीं मिल रहा है।
एक अनुमान के मुताबिक इतनी कवायद के बाद भी लगभग दस हजार से ज्यादा अन्ना मवेशी अभी भी धमाचौकड़ी मचाए हैं। आए दिन अन्ना मवेशियों के झुंड खेतों में घुसकर किसानों की फसलें बर्बाद कर रहे हैं। प्रमुख बाजारों व सड़कों पर मवेशियों का जमावड़ा रहने से सड़क हादसे हो रहे हैं। हांकने पर ये हमलावर हो रहे हैं, जिससे कई लोगों की जान भी जा चुकी है।
खेतों में खड़ी फसल उजाड़ने और सड़कों पर हादसों का सबब बन रहे अन्ना मवेशियों से निपटने के लिए प्रदेश सरकार ने जिलों में अस्थायी गोशालाओं का निर्माण कराया था। इन गोशालाओं को संचालित कराने की जिम्मेदारी संबंधित ग्राम प्रधान और सचिव को सौंपी गई थीं। गोशालाओं में अन्ना पशुओं के खाने और खुराकी के लिए बजट भी निर्धारित किया गया है। जिले में अब तक अस्थायी गोशालाओं के निर्माण व अन्ना मवेशियों के रखरखा पर तकरीबन सवा तीन करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं, लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है।
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रुरुगंज के किसान रमेशचंद्र गुप्ता ने बताया कि उनकी दो बीघा की गेहूं की फसल को अन्ना मवेशी चट कर गए। रुरुगंज में 40 बीघा चारागाह की जमीन में अवैध कब्जा है। अगर इस कब्जे को खाली कराकर प्रशासन यहां अस्थायी गोशाला बना दें तो क्षेत्र के किसानों को काफी हद तक राहत मिल जाएगी। इसी तरह कई अन्य गांवों के किसानों का भी कहना है कि अन्ना मवेशियों के झुंड उनकी फसलों को नष्ट कर देते हैं। इसके चलते रात-रात भर जागकर खेतों की रखवाली करनी पड़ती है।
उधर, पशु चिकित्साधिकारी केजी सिंह का कहना है कि पशुपालक अपने पशुओं को छुट्टा छोड़ देते हैं, जिससे यह समस्या आ रही है। काफी हद तक अन्ना पशुओं को अस्थायी गोशालाओं में बंद करने का काम किया गया है। उन्होंने पशु पालकों से अपील की है कि वह अपने पशुओं को छुट्टा न छोड़ें।
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एक अनुमान के मुताबिक इतनी कवायद के बाद भी लगभग दस हजार से ज्यादा अन्ना मवेशी अभी भी धमाचौकड़ी मचाए हैं। आए दिन अन्ना मवेशियों के झुंड खेतों में घुसकर किसानों की फसलें बर्बाद कर रहे हैं। प्रमुख बाजारों व सड़कों पर मवेशियों का जमावड़ा रहने से सड़क हादसे हो रहे हैं। हांकने पर ये हमलावर हो रहे हैं, जिससे कई लोगों की जान भी जा चुकी है।
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खेतों में खड़ी फसल उजाड़ने और सड़कों पर हादसों का सबब बन रहे अन्ना मवेशियों से निपटने के लिए प्रदेश सरकार ने जिलों में अस्थायी गोशालाओं का निर्माण कराया था। इन गोशालाओं को संचालित कराने की जिम्मेदारी संबंधित ग्राम प्रधान और सचिव को सौंपी गई थीं। गोशालाओं में अन्ना पशुओं के खाने और खुराकी के लिए बजट भी निर्धारित किया गया है। जिले में अब तक अस्थायी गोशालाओं के निर्माण व अन्ना मवेशियों के रखरखा पर तकरीबन सवा तीन करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं, लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है।
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रुरुगंज के किसान रमेशचंद्र गुप्ता ने बताया कि उनकी दो बीघा की गेहूं की फसल को अन्ना मवेशी चट कर गए। रुरुगंज में 40 बीघा चारागाह की जमीन में अवैध कब्जा है। अगर इस कब्जे को खाली कराकर प्रशासन यहां अस्थायी गोशाला बना दें तो क्षेत्र के किसानों को काफी हद तक राहत मिल जाएगी। इसी तरह कई अन्य गांवों के किसानों का भी कहना है कि अन्ना मवेशियों के झुंड उनकी फसलों को नष्ट कर देते हैं। इसके चलते रात-रात भर जागकर खेतों की रखवाली करनी पड़ती है।
उधर, पशु चिकित्साधिकारी केजी सिंह का कहना है कि पशुपालक अपने पशुओं को छुट्टा छोड़ देते हैं, जिससे यह समस्या आ रही है। काफी हद तक अन्ना पशुओं को अस्थायी गोशालाओं में बंद करने का काम किया गया है। उन्होंने पशु पालकों से अपील की है कि वह अपने पशुओं को छुट्टा न छोड़ें।