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Auraiya News: तीन माह की कड़ी मेहनत के बाद सात सदस्यीय टीम ने तैयार की 250 पन्नों की जांच रिपोर्ट

Fri, 05 Jul 2024 11:36 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Fri, 05 Jul 2024 11:36 PM IST
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After three months of hard work, the seven-member team prepared a 250-page investigation report
औरैया। वैसुंधरा ग्राम पंचायत में जोत चकबंदी आकार पत्र 45 में फर्जी आख्या लगाकर करोड़ों रुपये की जमीन पर लोग काबिज हुए। सदर तहसील की सात टीम ने तीन माह कड़ी मेहनत के बाद यह 250 पन्नों की जांच रिपोर्ट तैयार की है। इसमें फर्जीवाड़े के साक्ष्यों को एक-एक करके जुटाया गया है।
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साल 1987-88 में हुई यह करामात अब 37 साल बाद सात सदस्यीय टीम ने जांच करते हुए खोज निकाली। सदर एसडीएम राकेश कुमार समेत तहसीलदार व नायब तहसीलदार समेत अन्य राजस्व कर्मियों ने ग्राम पंचायत वैसुंधरा की खाक छानी। तीन माह तक लगातार चुपचाप अधिकारी से लेकर कर्मचारी साक्ष्य जुटाने में लगे रहे। पुराने कागजातों पर जमीं धूल को हटाते हुए एक बार फिर से देखा गया। जोत चकबंदी आकार पत्र 45 में दर्ज आख्या पूरी तरह से फर्जी पट्टे को लेकर पाई गई। इसके बाद बारी-बारी इन पट्टों पर काबिज लोगों की तलाश शुरू हुई।
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खतौनी भी निकाली गई। वारिसों से लेकर 37 साल के क्रम में कुछ लोगों के देहांत हो जाना पाया गया, लेकिन कड़ी से कड़ी जोड़ते हुए एक-एक साक्ष्य जुटाया गया। तीन माह की इस कवायद में अधिकारियों से लेकर कर्मचारियों ने रोजाना के विभागीय काम भी किए। साथ ही इस जांच में भी खाक छानी। इसके बाद 250 पन्नों की जांच रिपोर्ट तैयार की गई। डीएम व एडीएम के पास यह रिपोर्ट पहुंचने से पहले बार-बार प्रत्येक बिंदु पर जांची परखी गई।
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खुले बाजार में इस जमीन की कीमत 150 करोड़ से ज्यादा की आंकी जा रही है। फिलहाल पूरे मामले में तहसील से लेकर जिले के प्रशासनिक अधिकारी एक्शन मोड में हैं। सरकारी सेंधमारी को लेकर सदर तहसील प्रशासन की यह कवायद सराहनीय साबित हुई है। शासन स्तर से भी इसका संज्ञान लिया गया है।

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पट्टे की क्या होती है पात्रता

- सवा तीन एकड़ से ज्यादा जमीन पात्र के पास नहीं होनी चाहिए।

- आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं होनी चाहिए।
- पात्र उसी ग्राम पंचायत का निवासी होना चाहिए।

- सरकारी नौकरी में नहीं होना चाहिए।
- सवा तीन एकड़ से ज्यादा का आवंटन एक पात्र को नहीं हो सकता।

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इस तरीके से होता है पट्टे का आवंटन
ग्राम पंचायत की भूमि प्रबंधन समिति होती है। इसका अध्यक्ष ग्राम प्रधान तो मंत्री लेखपाल होता है। जहां पट्टे का प्रस्ताव तैयार किया जाता है। इसके पास होने के बाद तहसील के अधिकारियों को संस्तुति के लिए भेजा जाता है। जहां से संस्तुति मिलने के बाद पात्र को असंक्रमणीय जमीन आवंटित कर दी जाती है। जिसे पांच साल बाद संक्रमणीय कर दिया जाता है। चकबंदी अधिकारी के पास पट्टे करने का अधिकार नहीं होता है जबकि इस फर्जीवाड़े में जोत चकबंदी आकार पत्र 45 के चकबंदी के अभिलेखों में फर्जी तरीके से पट्टे की आख्या चढ़ा दी गई। सबसे बड़ी लापरवाही तो इस जमीन को संक्रमणीय करने के दौरान हुई। आंखें बंद करते हुए आदेश चढ़ा दिए गए।
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