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किसानों का हक नहीं मारा जाएगा
Auraiya
Updated Wed, 02 May 2012 12:00 PM IST
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दिबियापुर (औरैया)। औद्योगिक क्षेत्र दिबियापुर में गेल इंडिया लिमिटेड गैस आधारित एवं यूएम पावर कोल आधारित दो पावर प्लांटों के लिए पानी की आपूर्ति के लिए किसानों का हक नहीं मारा जाएगा। नहर, रजवाहों और माइनरों में सीपेज लास को रोककर इससे बचने वाले पानी को गेल एवं यूएम पावर के विद्युत उत्पादन संयंत्र को दिया जाएगा।
सिंचाई खंड औरैया के दिबियापुर स्थित मुख्य कार्यालय पर अमर उजाला से विशेष वार्ता में नवागंतुक अधिशाषी अभियंता बीके निरंजन ने कहा कि उनकी प्राथमिकता टेल तक पानी पहुंचाना है। ताकि जिले का कृषि उत्पादन लक्ष्य पूरा हो सके। सिंचाई खंड औरैया क्षेत्र में मल्हौसी से कंचौसी तक का क्षेत्र आता है। 32.84 किलोमीटर निचली गंगा नहर, 168 किलोमीटर रजवहे और 102 किलोमीटर माइनरें औरैया सिंचाई खंड में आती हैं। बताया कि सीपेज लासेस में होने वाले पानी की बर्बादी को रोक कर ही वर्तमान में एनटीपीसी और गेल संयंत्रों को पानी उपलब्ध कराया जा रहा है। इसके लिए बूढ़ादाना रजवहे के 22.8 किलोमीटर एरिया को पक्का कराया जा चुका है। आने वाले दिनों में कोल आधारित संयंत्र यूएम पावर के लिए 8.2 क्यूबिक फीट प्रति सेकेंड पानी की आवश्यकता होगी। जबकि गेल के गैस आधारित संयंत्र के लिए 17 क्यूबिक फीट प्रति सेकेंड पानी की आवश्यकता होगी।
बताया कि यूएम पावर को पानी देने के लिए मंगलपुर रजवहे के 19 किलोमीटर हिस्से को पक्का कराया जाएगा। वहीं गेल के संयंत्र को पानी देने के लिए बूढ़ादाना रजवहे के 9 किलोमीटर और मुख्य निचली गंगा नहर के कन्हौं से पाता तक के हिस्से को पक्का कराया जाएगा। सीपेज लासेस के चलते होने वाले पानी की बर्बादी को रोका जा सकेगा और इससे बचने वाले पानी को इन संयंत्रों में उपयोग किया जाएगा। नहरों, रजवहों और माइनरों पर होने वाले अतिक्रमण के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि सूची बनाकर जिला प्रशासन की मदद से अतिक्रमण हटवाया जाएगा।
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सिंचाई खंड औरैया के दिबियापुर स्थित मुख्य कार्यालय पर अमर उजाला से विशेष वार्ता में नवागंतुक अधिशाषी अभियंता बीके निरंजन ने कहा कि उनकी प्राथमिकता टेल तक पानी पहुंचाना है। ताकि जिले का कृषि उत्पादन लक्ष्य पूरा हो सके। सिंचाई खंड औरैया क्षेत्र में मल्हौसी से कंचौसी तक का क्षेत्र आता है। 32.84 किलोमीटर निचली गंगा नहर, 168 किलोमीटर रजवहे और 102 किलोमीटर माइनरें औरैया सिंचाई खंड में आती हैं। बताया कि सीपेज लासेस में होने वाले पानी की बर्बादी को रोक कर ही वर्तमान में एनटीपीसी और गेल संयंत्रों को पानी उपलब्ध कराया जा रहा है। इसके लिए बूढ़ादाना रजवहे के 22.8 किलोमीटर एरिया को पक्का कराया जा चुका है। आने वाले दिनों में कोल आधारित संयंत्र यूएम पावर के लिए 8.2 क्यूबिक फीट प्रति सेकेंड पानी की आवश्यकता होगी। जबकि गेल के गैस आधारित संयंत्र के लिए 17 क्यूबिक फीट प्रति सेकेंड पानी की आवश्यकता होगी।
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बताया कि यूएम पावर को पानी देने के लिए मंगलपुर रजवहे के 19 किलोमीटर हिस्से को पक्का कराया जाएगा। वहीं गेल के संयंत्र को पानी देने के लिए बूढ़ादाना रजवहे के 9 किलोमीटर और मुख्य निचली गंगा नहर के कन्हौं से पाता तक के हिस्से को पक्का कराया जाएगा। सीपेज लासेस के चलते होने वाले पानी की बर्बादी को रोका जा सकेगा और इससे बचने वाले पानी को इन संयंत्रों में उपयोग किया जाएगा। नहरों, रजवहों और माइनरों पर होने वाले अतिक्रमण के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि सूची बनाकर जिला प्रशासन की मदद से अतिक्रमण हटवाया जाएगा।
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