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तेज हुई देशी फ्रिज की बिक्री
Auraiya
Updated Mon, 20 May 2013 05:30 AM IST
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औरैया। शहर में जर्जर विद्युत व्यवस्था के चलते घरों में इलेक्ट्रिक से चलने वाले उपकरण बंद पड़े हैं। ऐसे में भीषण गर्मी में देशी फ्रिज यानी घडे़ लोगों के गले को तर कर राहत पहुंचाने में कारगर साबित हो रहे हैं। हालत यह है कि आपूर्ति न आने से इलेक्ट्रानिक दुकानों पर दुकानदार हाथ पर हाथ रखकर बैठने को मजबूर है। इससे उनमें विद्युत विभाग के प्रति आक्रोश व्याप्त है।
पिछले एक साल से अघोषित कटौती की मार झेल रहे शहर के उपभोक्ता बुरी तरह से त्रस्त हो चुके हैं। भीषण गर्मी में सबसे ज्यादा खराब हालत इलेक्ट्रानिक उपकरण बेचने वाले व्यापारियों की है। बढ़ते तापमान में इस बार अच्छी कमाई होने की आस लिए बैठे व्यापारियों की उम्मीदों पर अघोषित विद्युत कटौती ने कुठाराघात कर दिया। इससे इस बार कच्ची मिट्टी के बने देशी फ्रिज बेचने वालों को खासी राहत दिखाई दे रही है। अघोषित कटौती के चलते घड़ों की कीमतों में तो उछाला आया ही बावजूद इसके बिक्री में भी इजाफा हुआ है। मिट्टी गूथकर घड़े का निर्माण करने वाले साजिद ने बताया कि पिछले साल की तुलना में इस बार उन्हें खासी राहत दिखाई दे रही है। विद्युत कटौती होने से उनका व्यापार परवान चढ़ा हुआ है। हालांकि इस बार महंगाई के चलते घड़ाें की कीमतें भी बढ़ी है। बताया कि उनके पास 40 रुपये से लेकर 120 रुपये तक के घड़े हैं। इसमें सबसे ज्यादा मीडियम कीमत 60 रुपये के घड़ों की ज्यादा बिक्री हुई है।
इलेक्ट्रानिक व्यवसायियों की व्यथा
इलेक्ट्रानिक उपकरण विक्रेता विजयकांत पुरवार का कहना है कि अघोषित बिजली कटौती ने इस बार व्यापार को चौपट कर दिया है। भीषण गर्मी पड़ने में इस बार फ्रिजों की अच्छी खासी बिक्री की उम्मीद लगाई थी लेकिन उनकी उम्मीदों पर बुरी तरह से पानी फिर गया। नैना इलेक्ट्रानिक के मालिक कमलकांत वर्मा का कहना था कि मई के आखिरी तक अच्छी खासी फ्रिज, कूलर व एसी की बिक्री हो जाती थी। इस बार बिजली कटौती के चलते इलेक्ट्रानिक उपकरणों का बाजार बुरी तरह से ठंडा है।
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पिछले एक साल से अघोषित कटौती की मार झेल रहे शहर के उपभोक्ता बुरी तरह से त्रस्त हो चुके हैं। भीषण गर्मी में सबसे ज्यादा खराब हालत इलेक्ट्रानिक उपकरण बेचने वाले व्यापारियों की है। बढ़ते तापमान में इस बार अच्छी कमाई होने की आस लिए बैठे व्यापारियों की उम्मीदों पर अघोषित विद्युत कटौती ने कुठाराघात कर दिया। इससे इस बार कच्ची मिट्टी के बने देशी फ्रिज बेचने वालों को खासी राहत दिखाई दे रही है। अघोषित कटौती के चलते घड़ों की कीमतों में तो उछाला आया ही बावजूद इसके बिक्री में भी इजाफा हुआ है। मिट्टी गूथकर घड़े का निर्माण करने वाले साजिद ने बताया कि पिछले साल की तुलना में इस बार उन्हें खासी राहत दिखाई दे रही है। विद्युत कटौती होने से उनका व्यापार परवान चढ़ा हुआ है। हालांकि इस बार महंगाई के चलते घड़ाें की कीमतें भी बढ़ी है। बताया कि उनके पास 40 रुपये से लेकर 120 रुपये तक के घड़े हैं। इसमें सबसे ज्यादा मीडियम कीमत 60 रुपये के घड़ों की ज्यादा बिक्री हुई है।
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इलेक्ट्रानिक व्यवसायियों की व्यथा
इलेक्ट्रानिक उपकरण विक्रेता विजयकांत पुरवार का कहना है कि अघोषित बिजली कटौती ने इस बार व्यापार को चौपट कर दिया है। भीषण गर्मी पड़ने में इस बार फ्रिजों की अच्छी खासी बिक्री की उम्मीद लगाई थी लेकिन उनकी उम्मीदों पर बुरी तरह से पानी फिर गया। नैना इलेक्ट्रानिक के मालिक कमलकांत वर्मा का कहना था कि मई के आखिरी तक अच्छी खासी फ्रिज, कूलर व एसी की बिक्री हो जाती थी। इस बार बिजली कटौती के चलते इलेक्ट्रानिक उपकरणों का बाजार बुरी तरह से ठंडा है।
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