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‘डकैतों’ से कम नहीं है ‘अन्ना’ का आतंक
Updated Thu, 28 Dec 2017 12:13 AM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
उरई। एक वक्त था, जब बुंदेलखंड में डकैत गिरोह का खौफ छाया रहता था। उस वक्त डकैत गांव और घरों में धावा बोलकर किसानों का सब कुछ लूट ले जाते थे। आज कहना गलत न होगा कि डकैतों की जगह अब अन्ना जानवरों ने ले ली है। दर्जनों की संख्या में झुंड बनाकर घूमते अन्ना जानवर खेतों में घुसकर किसानों की फसल तबाह कर रहे हैं। कभी लोग डकैतों के डर से रतजगा किया करते थे, तो आज अन्ना जानवर उन्हें सर्द रातों में खेतों पर डेरा डालने को मजबूर किए हुए हैं। अक्सर दैवीय आपदाओं से घिरा रहने वाला जनपद का किसान इस वक्त अन्ना जानवरों की समस्या से जूझ रहा है।
प्रशासन ही नहीं बल्कि प्रदेश सरकार तक किसानों को भरोसा दिला चुकी है कि अन्ना जानवरों की समस्या से निपटने के लिए गौशाला, कांजी हाउस आदि तैयार किए जाएंगे। लेकिन हुआ कुछ भी नहीं। समस्या से निपटने के लिए किसानों को स्वयं ही कमर कसनी पड़ रही है। जनपद में लाख अन्ना जानवरों के सामने सैकड़ों किसान बेबस नजर आते हैं। यूं तो अन्ना जानवरों के लिए जिले में गौशालाएं और कांजी हाउस भी कभी नजर आया करते थे, लेकिन आज सब कागजों पर है और अन्ना जानवर हाईवे व खेतों में नजर आ रहे हैं।
पशु विभाग के आंकड़ों पर नजर डालें तो जिले की पांच में से तीन तो बंद पड़ी है, सिर्फ दो चालू है, लेकिन उनके हाल भी बदहाल है। कांजी हाउस तो पूरे जनपद में एक भी नहीं है। गौशालाओं के लिए पांच सालों से कोई बजट भी नहीं आया है। किसानों की स्थिति यह है कि उन्हें हाथों में लाठी-डंडे लेकर दिन के वक्त ही नहीं बल्कि रातों को भी खेतों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। दिन के वक्त महिलाएं भी खेतों में रखवाली करती नजर आती हैं। इन सर्द रातों में अलाव जलाकर किसान पहरेदारी को मजबूर है।
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इसके अलावा कुछ स्थानों पर हजारों रुपये खर्च कर लोहे के कंटीले तार भी लगाए जा रहें हैं। कुछ किसानों ने फसलों को बचाने के लिए खेतों के चारों ओर टट्टर की चहारदीवारी खड़ी करनी शुरू कर दी है। जिला पशु पालन विभाग के अधिकारी डॉ आरपी सिंह ने बताया कि गौशालाएं खोलने के लिए नया शासनादेश आया है। इस पर काम भी तेजी से चल रहा है। एक बार नई गौशालाएं खुल जाएंगी तो अन्ना जानवरों की समस्या का समाधान भी हो जाएगा।
अन्ना जानवरों से प्रभावित गांव
वैसे तो पूरे जनपद में ही अन्ना जानवरों का आतंक है। लेकिन सबसे अधिक असर डकोर ब्लाक के कुसमिलिया, मुहम्मदाबाद, राहिया, बंदौली, कुकरगांव, वोहदपुरा, मौखरी, कालपी ब्लाक के ऊसरगांव, आटा, चुर्खी, मुसमरिया, माधौगढ़ ब्लाक के धमना, कुरसेड़ा, चितौरा, हरौली, सरावन रामपुर ाब्लाक के बुढ़नपुरा, विजदुंआ, बेलपुरा, ऊमरी, नरौल, कुठौंद ब्लाक के अजीतापुर, अब्दुल्लापुर, कुरौली, उआवली, कंजारी, शेखपुर अहीर, नदीगांव, रेंढर, बंगरा, गढ़ेना गणेशनगर, कुठौंदा आदि गांव अन्ना जानवरों से बुरी तरह प्रभावित हैं।
डाकू लूटते थे जेवर-नगदी तो अब जानवर लूट रहे किसानों की फसलें
समस्या से निपटने के लिए जूझते दिख रहे किसान
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उरई। एक वक्त था, जब बुंदेलखंड में डकैत गिरोह का खौफ छाया रहता था। उस वक्त डकैत गांव और घरों में धावा बोलकर किसानों का सब कुछ लूट ले जाते थे। आज कहना गलत न होगा कि डकैतों की जगह अब अन्ना जानवरों ने ले ली है। दर्जनों की संख्या में झुंड बनाकर घूमते अन्ना जानवर खेतों में घुसकर किसानों की फसल तबाह कर रहे हैं। कभी लोग डकैतों के डर से रतजगा किया करते थे, तो आज अन्ना जानवर उन्हें सर्द रातों में खेतों पर डेरा डालने को मजबूर किए हुए हैं। अक्सर दैवीय आपदाओं से घिरा रहने वाला जनपद का किसान इस वक्त अन्ना जानवरों की समस्या से जूझ रहा है।
प्रशासन ही नहीं बल्कि प्रदेश सरकार तक किसानों को भरोसा दिला चुकी है कि अन्ना जानवरों की समस्या से निपटने के लिए गौशाला, कांजी हाउस आदि तैयार किए जाएंगे। लेकिन हुआ कुछ भी नहीं। समस्या से निपटने के लिए किसानों को स्वयं ही कमर कसनी पड़ रही है। जनपद में लाख अन्ना जानवरों के सामने सैकड़ों किसान बेबस नजर आते हैं। यूं तो अन्ना जानवरों के लिए जिले में गौशालाएं और कांजी हाउस भी कभी नजर आया करते थे, लेकिन आज सब कागजों पर है और अन्ना जानवर हाईवे व खेतों में नजर आ रहे हैं।
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पशु विभाग के आंकड़ों पर नजर डालें तो जिले की पांच में से तीन तो बंद पड़ी है, सिर्फ दो चालू है, लेकिन उनके हाल भी बदहाल है। कांजी हाउस तो पूरे जनपद में एक भी नहीं है। गौशालाओं के लिए पांच सालों से कोई बजट भी नहीं आया है। किसानों की स्थिति यह है कि उन्हें हाथों में लाठी-डंडे लेकर दिन के वक्त ही नहीं बल्कि रातों को भी खेतों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। दिन के वक्त महिलाएं भी खेतों में रखवाली करती नजर आती हैं। इन सर्द रातों में अलाव जलाकर किसान पहरेदारी को मजबूर है।
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इसके अलावा कुछ स्थानों पर हजारों रुपये खर्च कर लोहे के कंटीले तार भी लगाए जा रहें हैं। कुछ किसानों ने फसलों को बचाने के लिए खेतों के चारों ओर टट्टर की चहारदीवारी खड़ी करनी शुरू कर दी है। जिला पशु पालन विभाग के अधिकारी डॉ आरपी सिंह ने बताया कि गौशालाएं खोलने के लिए नया शासनादेश आया है। इस पर काम भी तेजी से चल रहा है। एक बार नई गौशालाएं खुल जाएंगी तो अन्ना जानवरों की समस्या का समाधान भी हो जाएगा।
अन्ना जानवरों से प्रभावित गांव
वैसे तो पूरे जनपद में ही अन्ना जानवरों का आतंक है। लेकिन सबसे अधिक असर डकोर ब्लाक के कुसमिलिया, मुहम्मदाबाद, राहिया, बंदौली, कुकरगांव, वोहदपुरा, मौखरी, कालपी ब्लाक के ऊसरगांव, आटा, चुर्खी, मुसमरिया, माधौगढ़ ब्लाक के धमना, कुरसेड़ा, चितौरा, हरौली, सरावन रामपुर ाब्लाक के बुढ़नपुरा, विजदुंआ, बेलपुरा, ऊमरी, नरौल, कुठौंद ब्लाक के अजीतापुर, अब्दुल्लापुर, कुरौली, उआवली, कंजारी, शेखपुर अहीर, नदीगांव, रेंढर, बंगरा, गढ़ेना गणेशनगर, कुठौंदा आदि गांव अन्ना जानवरों से बुरी तरह प्रभावित हैं।
डाकू लूटते थे जेवर-नगदी तो अब जानवर लूट रहे किसानों की फसलें
समस्या से निपटने के लिए जूझते दिख रहे किसान