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Auraiya News: कुपोषण की चपेट में 549 बच्चे, एनआरसी में आधे से ज्यादा बेड खाली

Tue, 02 Dec 2025 11:44 PM IST
Kanpur	 Bureau कानपुर ब्यूरो
Updated Tue, 02 Dec 2025 11:44 PM IST
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549 children are malnourished, more than half the beds in NRC are empty.
औरैया। जिले में कुपोषण की समस्या चिंताजनक होती जा रही है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक जिले में 500 से अधिक बच्चे अति कुपोषित हैं लेकिन मेडिकल कॉलेज के एनआरसी (न्यूट्रिशन रिहैबिलिटेशन सेंटर) में हालात इसके बिल्कुल उलट हैं। यहां बेड खाली पड़े हुए हैं। पिछले साल की तुलना में सुधार हुआ है लेकिन कुपोषण से लड़ाई में यह नाकाफी है।
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स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार जिले में 2826 बच्चे कुपोषित व 549 अति कुपोषित की श्रेणी में आते हैं। इनके उपचार के लिए चिचौली मेडिकल कॉलेज में एनआरसी बना हुआ है। अभी यहां कुपोषण का शिकार मात्र 14 बच्चे ही भर्ती हैं। पिछले माह 32 बच्चों को भर्ती कराया गया था जिन्हें 14 दिन के उपचार के बाद घर भेज दिया गया। अब इनकी मॉनिटरिंग आंगनबाड़ी व आशा वर्कर के जरिए कराई जा रही है। छह महीने पहले तो स्थिति और भी गंभीर थी तब इक्का-दुक्का बच्चे ही एनआरसी पहुंच रहे थे।
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गांवों में घर-घर जाकर कुपोषण के प्रति लोगों को जागरूक किया गया तब जाकर मामूली सुधार हो पाया। एनआरसी चिकित्सकों का कहना है कि अब स्थिति बदली है। जो परिजन अपने बच्चे का यहां से उपचार कराकर जा रहे हैं वह भी लोगों को जागरूक कर रहे हैं। अब हर महीने 30 से अधिक बच्चे भर्ती हो रहे हैं जो पहले की तुलना भी बेहतर है।
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एनआरसी सेंटर में पोषण पुनर्वास के लिए सभी सुविधाएं उपलब्ध हैं। यहां 14 दिन तक बच्चे का संपूर्ण उपचार, संतुलित आहार और नियमित मॉनिटरिंग की जाती है। इसके बावजूद कई परिजन बच्चों को भर्ती नहीं करवा रहे। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का कहना है कि आंगनबाड़ी और आशा वर्कर लगातार घर-घर जाकर ऐसे बच्चों की पहचान कर रही हैं, लेकिन परिजनों की उदासीनता बड़ी चुनौती बन गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि समय पर भर्ती व उपचार न मिलने से कुपोषित बच्चों की सेहत लगातार बिगड़ती है। एनआरसी में समय पर पहुंचने पर बच्चा जल्दी सामान्य स्थिति में आ जाता है। इसके लिए जन-जागरूकता और परिजनों की सक्रिय भागीदारी बेहद जरूरी है।
0 से 5 साल के बच्चों का वजन उनकी उम्र और लिंग के अनुसार अलग-अलग होता है। स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से निर्धारित मानकों के अनुसार एक साल के लड़के का वजन लगभग 10.2 किग्रा और लड़की का 9.5 किग्रा होना चाहिए। दो से पांच साल के बच्चों के लिए लड़कों का वजन 12.3 किग्रा से 16 किग्रा और लड़कियों का 12 किलो से 15 किग्रा तक हो सकता है। तीन से पांच साल के बच्चों में लड़कों का वजन 14 से 17 किग्रा और लड़कियों का 14 से 16 किग्रा तक होना चाहिए। इसी तरह 0 से पांच साल के बच्चों की लंबाई उनकी उम्र, लिंग और आनुवंशिकता के आधार पर अलग-अलग होती है। स्वास्थ्य मंत्रालय की ओर से बच्चों के विकास के लिए कुछ सामान्य दिशा-निर्देश दिए गए हैं। एक नवजात शिशु की औसत लंबाई 46-55 सेमी (18-22 इंच) होती है। एक साल की उम्र तक लंबाई 72-76 सेमी (28-30 इंच) तक बढ़ जाती है। दो साल की उम्र में यह 82-91 सेमी (32-36 इंच) तक हो सकती है। वहीं, पांच वर्ष की उम्र तक लंबाई 100-110 सेमी (39-43 इंच) होनी चाहिए। इससे कम होने पर बच्चा कुपोषित की श्रेणी में आता है।

एनआरसी में सभी सुविधाएं उपलब्ध हैं। घर-घर जाकर आंगनबाड़ी व आशा वर्कर लोगों को कुपोषण के प्रति जागरूक कर रही हैं। पहले की तुलना में अब सुधार देखने को मिल रहा है। बच्चे के साथ परिजन को भी मुफ्त भोजन दिया जा रहा है ताकि उन्हें रुकने में समस्या न आए। लोगों को इसके प्रति जागरूक होने की जरूरत है।
- डॉ. शिशिर पुरी, डिप्टी सीएमओ
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