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अधिकतम तापमान न घटा तो इस बार एक माह पहले ही पक जाएगी गेंहू की फसल
Updated Sun, 31 Dec 2017 10:05 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
औरैया। दिन के अधिकतम तापमान से किसान पशोपेश में हैं। रबी की फसलों में एकाएक तापमान बढ़ने से असर पड़ रहा है तो मुख्य फसल गेहूं के लिए भी हालात चिंताजनक ही है। दिसंबर पूरा गुजरने को है। मगर अधिकतम तापमान 20 से नीचे नहीं जा रहा है। गेहूं की पूरी फसल के लिए कुल 2200 से 2400 डिग्री तापमान ही चाहिए। मगर तापमान ऐसा ही रहा तो एक माह पहले तक फसल पक जाएगी। इससे पौधो की ग्रोथ भी रुकेगी और बालियों में दाना भी कम बनेगा और कमजोर रहेगा। ऐसे में किसानों के माथे पर चिंताओं के बल पड़े हुए हैं।
दिसंबर में कुल मिलाकर दो या तीन दिन ही घना कोहरा पड़ा जबकि इन दिनों अधिकतम तापमान 20 डिग्री पर ही टिका रहा। दिन में तेज धूप भी निकली, जबकि अममून दिसंबर में अधिकतम तापमान 18 से नीचे चला जाता है। मगर इस बार तापमान 20 से नीचे नहीं जा रहा है और दलहनी व तिलहनी फसलों में 20 डिग्री से नीचे तापमान नही जाएगा तब तक बेहतर उत्पादन नहीं होगा। इस बार खास यह कि अधिकतम तापमान काफी समय तक टिक रहा है। दिन में 12 बजे से अधिकतम तापमान 20 से 22 डिग्री तक हुआ तो वह शाम चार बजे तक टिक रहा है। काफी समय तक मौसम के तापक्रम में बढ़ोतरी नुकसानदायक है। फसलों पर विपरीत प्रभाव पड़ रहा है।
तापमान अगर यही रहा तोे गेहूं की फसल एक माह पहले ही पक जाएगी। गेहूं की फसल अमूमन 20 से 25 अप्रैल तक पक कर तैयार होती है। मगर यही हालात रहे तो मार्च के मध्य या पहले सप्ताह में ही गेहूं की फसल पक सकती है। कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि गेहूं का सामान्य पौधा 90 सेमी से 1.5 मीटर तक होता है। जिसमें भी पांच से आठ सेमी का प्रभाव पड़ेगा।
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क्या कहते विशेषज्ञ
कृषि विज्ञान केंद्र के डा. संदीप बताते हैं कि अगर अचानक तापमान बढ़ता है तो जो गेहूं की वनस्पति अवस्था होती है उसमें समय से पहले ही बाली निकलने लगती है। पौधा बढ़ने से रुक जाता है और बाली छोटी रह जाती है। पैदावार भी कम होती है। दिसंबर में बोई गई फसल का तो बर्बाद होने का खतरा पैदा हो गया है। होली तक तापमान कम रहना फसल के लिए फायदेमंद होता है। गेहूं की फसल के लिए दिसंबर व जनवरी में 20 से नीचे तापमान व फरवरी में 20 तक आसपास तापमान रहना चाहिए। अगर इस समय हल्की बारिश हो जाती तो फसल के लिए फायदेमंद होगी। मगर फिलहाल बारिश की उम्मीद कम दिख रही है।
ऐसे नुकसान को बचाएं किसान
कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि विपरीत मौसम से फसल को बचाने के लिए किसान फसल की हल्की सिंचाई कर सकते हैं, किसान तेज हवा में सिंचाई करने से बचें, जल विलय उर्वरक पोटेशियम सल्फेट का एक एकड़ में तीन किलो का 250 से 300 लीटर पानी का स्प्रे करें। इससे गेहूं के दाने के मोटाई बढ़ेगी। बीमारियों से लड़ने की क्षमता भी मिलेगी।
मटर, चना व अरहर के लिए भी हानिकारक
कृषि वैज्ञानिक बताते हैं कि मटर, अरहर, चना के लिए भी हानिकारक है। ऐसा तापमान रहा तो फरवरी में तापमान और सख्त रुख दिखाएगा। इससे मटर में कीड़ा व चने में फली छेदक व अरहर में कीड़ा लग जाएगा। जिससे फसल बर्बाद होगी।
सब्जियां भी प्रभावित होगी
सब्जियों पर भी इसका विपरीत असर पड़ेगा। सब्जियों का आकार छोटा हो जाएगा। फूल गोभी भी प्रभावित होगी और उसका फूल भी कम बनेगा। इसके अलावा अन्य सब्जियों के उत्पादन पर भी असर पड़ेगा।
फिलहाल 10 जनवरी तक बारिश की उम्मीद नहीं
फसलों में अब बारिश ही अमृत दे सकती है। मगर मौसम वैज्ञानिक संदीप कुमार का कहना है कि जो पूर्वानुमान आया है उससे दस जनवरी तक बारिश नहीं है। कुछ बदली रह सकती है जिसके कारण एक दो दिन कोहरा आ सकता है। बताया कि बारिश होने पर ही फसलों के लिए अच्छा होगा।
तापमान बढ़ना फसल के हानिकारक है। मगर अभी तापमान गिर सकता है। जिससे अधिक दिक्कत नहीं होगी। अगर तापमान बढ़ा तोे समस्या खड़ी हो जाएगी। ऐसे में किसान हवा रुकने पर सिंचाई करें। - विजय कुमार, उप कृषि निदेशक
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औरैया। दिन के अधिकतम तापमान से किसान पशोपेश में हैं। रबी की फसलों में एकाएक तापमान बढ़ने से असर पड़ रहा है तो मुख्य फसल गेहूं के लिए भी हालात चिंताजनक ही है। दिसंबर पूरा गुजरने को है। मगर अधिकतम तापमान 20 से नीचे नहीं जा रहा है। गेहूं की पूरी फसल के लिए कुल 2200 से 2400 डिग्री तापमान ही चाहिए। मगर तापमान ऐसा ही रहा तो एक माह पहले तक फसल पक जाएगी। इससे पौधो की ग्रोथ भी रुकेगी और बालियों में दाना भी कम बनेगा और कमजोर रहेगा। ऐसे में किसानों के माथे पर चिंताओं के बल पड़े हुए हैं।
दिसंबर में कुल मिलाकर दो या तीन दिन ही घना कोहरा पड़ा जबकि इन दिनों अधिकतम तापमान 20 डिग्री पर ही टिका रहा। दिन में तेज धूप भी निकली, जबकि अममून दिसंबर में अधिकतम तापमान 18 से नीचे चला जाता है। मगर इस बार तापमान 20 से नीचे नहीं जा रहा है और दलहनी व तिलहनी फसलों में 20 डिग्री से नीचे तापमान नही जाएगा तब तक बेहतर उत्पादन नहीं होगा। इस बार खास यह कि अधिकतम तापमान काफी समय तक टिक रहा है। दिन में 12 बजे से अधिकतम तापमान 20 से 22 डिग्री तक हुआ तो वह शाम चार बजे तक टिक रहा है। काफी समय तक मौसम के तापक्रम में बढ़ोतरी नुकसानदायक है। फसलों पर विपरीत प्रभाव पड़ रहा है।
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तापमान अगर यही रहा तोे गेहूं की फसल एक माह पहले ही पक जाएगी। गेहूं की फसल अमूमन 20 से 25 अप्रैल तक पक कर तैयार होती है। मगर यही हालात रहे तो मार्च के मध्य या पहले सप्ताह में ही गेहूं की फसल पक सकती है। कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि गेहूं का सामान्य पौधा 90 सेमी से 1.5 मीटर तक होता है। जिसमें भी पांच से आठ सेमी का प्रभाव पड़ेगा।
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क्या कहते विशेषज्ञ
कृषि विज्ञान केंद्र के डा. संदीप बताते हैं कि अगर अचानक तापमान बढ़ता है तो जो गेहूं की वनस्पति अवस्था होती है उसमें समय से पहले ही बाली निकलने लगती है। पौधा बढ़ने से रुक जाता है और बाली छोटी रह जाती है। पैदावार भी कम होती है। दिसंबर में बोई गई फसल का तो बर्बाद होने का खतरा पैदा हो गया है। होली तक तापमान कम रहना फसल के लिए फायदेमंद होता है। गेहूं की फसल के लिए दिसंबर व जनवरी में 20 से नीचे तापमान व फरवरी में 20 तक आसपास तापमान रहना चाहिए। अगर इस समय हल्की बारिश हो जाती तो फसल के लिए फायदेमंद होगी। मगर फिलहाल बारिश की उम्मीद कम दिख रही है।
ऐसे नुकसान को बचाएं किसान
कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि विपरीत मौसम से फसल को बचाने के लिए किसान फसल की हल्की सिंचाई कर सकते हैं, किसान तेज हवा में सिंचाई करने से बचें, जल विलय उर्वरक पोटेशियम सल्फेट का एक एकड़ में तीन किलो का 250 से 300 लीटर पानी का स्प्रे करें। इससे गेहूं के दाने के मोटाई बढ़ेगी। बीमारियों से लड़ने की क्षमता भी मिलेगी।
मटर, चना व अरहर के लिए भी हानिकारक
कृषि वैज्ञानिक बताते हैं कि मटर, अरहर, चना के लिए भी हानिकारक है। ऐसा तापमान रहा तो फरवरी में तापमान और सख्त रुख दिखाएगा। इससे मटर में कीड़ा व चने में फली छेदक व अरहर में कीड़ा लग जाएगा। जिससे फसल बर्बाद होगी।
सब्जियां भी प्रभावित होगी
सब्जियों पर भी इसका विपरीत असर पड़ेगा। सब्जियों का आकार छोटा हो जाएगा। फूल गोभी भी प्रभावित होगी और उसका फूल भी कम बनेगा। इसके अलावा अन्य सब्जियों के उत्पादन पर भी असर पड़ेगा।
फिलहाल 10 जनवरी तक बारिश की उम्मीद नहीं
फसलों में अब बारिश ही अमृत दे सकती है। मगर मौसम वैज्ञानिक संदीप कुमार का कहना है कि जो पूर्वानुमान आया है उससे दस जनवरी तक बारिश नहीं है। कुछ बदली रह सकती है जिसके कारण एक दो दिन कोहरा आ सकता है। बताया कि बारिश होने पर ही फसलों के लिए अच्छा होगा।
तापमान बढ़ना फसल के हानिकारक है। मगर अभी तापमान गिर सकता है। जिससे अधिक दिक्कत नहीं होगी। अगर तापमान बढ़ा तोे समस्या खड़ी हो जाएगी। ऐसे में किसान हवा रुकने पर सिंचाई करें। - विजय कुमार, उप कृषि निदेशक