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14 साल पुराने आवंटन पर फंसा पेंच
Auraiya, Uttar pradesh, India
Updated Tue, 12 Apr 2016 12:24 AM IST
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रविवार देर रात ढहाया गया निर्माण कार्य (फाइल फोटो)
- फोटो : amar ujala beuro
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पुरानी तहसील में बीते दिन गिराया गया अवैध निर्माण जमीन के विवाद में फंस गया है। जमीन पर नगर पालिका और तहसील प्रशासन दोनों दावा ठोंक रहे हैं। ढहाए गए हिस्से की जमीन को पालिका ने 14 साल पहले लाभार्थी को किराए पर उठाया था। पीड़ित ने पालिका प्रशासन को शिकायती पत्र देकर न्याय की गुहार लगाई है।
होमगंज स्थित पुरानी तहसील के पीछे महावीरगंज मोहाल स्थित खाली पड़े 42.5 वर्ग फीट की भूमि को किराए पर लेने के लिए सर्वेश बाबू शुक्ला ने पालिका प्रशासन को एक प्रार्थना पत्र दिया था। इसके सापेक्ष में पालिका प्रशासन ने सर्वेश बाबू शुक्ला पुत्र रीराम शुक्ला निवासी होमगंज/महावीरगंज को 29 दिसंबर 1999 की बोर्ड बैठक में स्वीकृत कर 50 रुपये मासिक किराए पर आवंटित किया गया था। तब से उक्त भूमि पर किराएदार लगातार काबिज है।
लाभार्थी पिछले 14 सालों से नगर पालिका कार्यालय में लगातार किराया भी जमा कर रहा है। खास बात यह है कि 14 सालों से जिस जमीन को नगर पालिका परिषद अपनी बताकर लाभार्थी से किराया वसूल रहा था। उस पर अचानक तहसील प्रशासन ने अपना अधिकार बताते हुए रविवार देर रात निर्मित अस्थाई चबूतरे को ढहा दिया।
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इस बावत पीड़ित सर्वेश शुक्ल ने बताया कि पालिका की ओर से वह उक्त जमीन पर पिछले 14 सालों से काबिज है। जिसका वह मासिक किराया भी जमा करता आया है। इसके बावजूद आज तक तहसील प्रशासन ने इस पर आपत्ति क्यों नहीं उठाई। सबसे अहम बात यह है कि किसी भी अवैध कब्जे को ढहाने से पहले कब्जेदार को नोटिस देने का भी प्रावधान है। तहसील प्रशासन ने नियमों को ताक पर रखकर पूरी कार्रवाई कर डाली। पीड़ित सर्वेश शुक्ला ने इस बावत नगर पालिका प्रशासन को प्रार्थना पत्र देकर इसकी जांच कराए जाने व न्याय दिए जाने की मंाग की है।
तहसील प्रशासन की है जमीन
एसडीएम सदर जितेंद्र श्रीवास्तव से जब बात की गई तो उन्होंने उक्त जमीन को तहसील की जमीन बताया। ऐसे में सवाल यह उठता है कि जब यह जमीन तहसील प्रशासन की थी तो फिर नगर पालिका प्रशासन ने इसे किराए पर कैसे उठा दिया। इसके अलावा पिछले 14 सालों से पालिका आखिर किस बात का किराया वसूल कर रही है। जबकि उसकी वह जगह है ही नहीं। ऐसे में पालिका प्रशासन व तहसील प्रशासन के बीच भूमि का लेकर पेंच फंस गया है।
प्रार्थी की ओर से नगर पालिका प्रशासन को किराए पर उठाए गए एग्रीमेंट की फोटो कापी और किराया जमा करने की रसीदें उपलब्ध कराई हैं। पुराने अभिलेखों को भी खंगाला जा रहा है। साथ ही लेखपाल से भी इसकी जांच कराई जा रही है। रिपोर्ट आने पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
राधा तिवारी, अधिशाषी अधिकारी, नगर पालिका परिषद
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होमगंज स्थित पुरानी तहसील के पीछे महावीरगंज मोहाल स्थित खाली पड़े 42.5 वर्ग फीट की भूमि को किराए पर लेने के लिए सर्वेश बाबू शुक्ला ने पालिका प्रशासन को एक प्रार्थना पत्र दिया था। इसके सापेक्ष में पालिका प्रशासन ने सर्वेश बाबू शुक्ला पुत्र रीराम शुक्ला निवासी होमगंज/महावीरगंज को 29 दिसंबर 1999 की बोर्ड बैठक में स्वीकृत कर 50 रुपये मासिक किराए पर आवंटित किया गया था। तब से उक्त भूमि पर किराएदार लगातार काबिज है।
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लाभार्थी पिछले 14 सालों से नगर पालिका कार्यालय में लगातार किराया भी जमा कर रहा है। खास बात यह है कि 14 सालों से जिस जमीन को नगर पालिका परिषद अपनी बताकर लाभार्थी से किराया वसूल रहा था। उस पर अचानक तहसील प्रशासन ने अपना अधिकार बताते हुए रविवार देर रात निर्मित अस्थाई चबूतरे को ढहा दिया।
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इस बावत पीड़ित सर्वेश शुक्ल ने बताया कि पालिका की ओर से वह उक्त जमीन पर पिछले 14 सालों से काबिज है। जिसका वह मासिक किराया भी जमा करता आया है। इसके बावजूद आज तक तहसील प्रशासन ने इस पर आपत्ति क्यों नहीं उठाई। सबसे अहम बात यह है कि किसी भी अवैध कब्जे को ढहाने से पहले कब्जेदार को नोटिस देने का भी प्रावधान है। तहसील प्रशासन ने नियमों को ताक पर रखकर पूरी कार्रवाई कर डाली। पीड़ित सर्वेश शुक्ला ने इस बावत नगर पालिका प्रशासन को प्रार्थना पत्र देकर इसकी जांच कराए जाने व न्याय दिए जाने की मंाग की है।
तहसील प्रशासन की है जमीन
एसडीएम सदर जितेंद्र श्रीवास्तव से जब बात की गई तो उन्होंने उक्त जमीन को तहसील की जमीन बताया। ऐसे में सवाल यह उठता है कि जब यह जमीन तहसील प्रशासन की थी तो फिर नगर पालिका प्रशासन ने इसे किराए पर कैसे उठा दिया। इसके अलावा पिछले 14 सालों से पालिका आखिर किस बात का किराया वसूल कर रही है। जबकि उसकी वह जगह है ही नहीं। ऐसे में पालिका प्रशासन व तहसील प्रशासन के बीच भूमि का लेकर पेंच फंस गया है।
प्रार्थी की ओर से नगर पालिका प्रशासन को किराए पर उठाए गए एग्रीमेंट की फोटो कापी और किराया जमा करने की रसीदें उपलब्ध कराई हैं। पुराने अभिलेखों को भी खंगाला जा रहा है। साथ ही लेखपाल से भी इसकी जांच कराई जा रही है। रिपोर्ट आने पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
राधा तिवारी, अधिशाषी अधिकारी, नगर पालिका परिषद