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बेमौसम सब्जियों की खेती करके अतिरिक्त कमाई करेंगे किसान
Updated Sun, 24 Dec 2017 10:37 PM IST
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अमर उजाला ब्यूरो
औरैया। जिले के किसान पहली बार आलू के साथ बेमौसम सब्जियों की खेती करेंगे। खेतों पर आलू के आसपास सब्जियों की बुवाई की जाएगी। आलू के पौधे कद्दू, लौकी, करेला व तरोई के लिए सुरक्षा कवच बनते हुए उन्हें मौसम की मार से बचाएंगे। इससे सब्जियों में ठंड, कोहरा व बूंदाबांदी का असर नहीं पड़ेगा। वैसे इन फसलों की बुर्वाई मार्च में की जाती है तब मई तक यह फसलें तैयार हो जाती हैं। लेकिन इस बार गर्मियों की फसल सर्दी में लहलहाएगी।
कृषि विज्ञान केंद्र की मदद से दिसंबर के आखिरी तक सब्जियों की बुवाई होगी। बेमौसम सब्जियों में खासतौर पर सावधानी बरतनी होगी। लौकी के बीज तीन से चार मीटर की दूरी बनाकर लाइन वार डालने होंगे। आलू के पौधों से एक से डेढ़ मीटर दूरी देनी होगी। वहीं, कद्दू के बीज लाइन वार दो-दो मीटर की दूरी पर डालने होंगे। कद्दू के पौधे तेजी से फैलते हैं। इसके लिए आलू के पौधों से दो से ढाई मीटर दूरी देनी होगी। तरोई के बीज लाइन वार एक-एक मीटर पर डालने होंगे। आलू से दूरी ढाई मीटर तक होनी चाहिए। इससे सब्जियों के पौधे बड़े होने पर आपस में उलझेंगे नहीं।
ये होंगे फायदे
-सब्जियों में अलग से लागत नहीं लगानी होगी।
-आलू की सिंचाई से सब्जियों को पानी मिलेगा।
-आलू में डाली गई खाद सब्जियों के काम आएगी।
-बेमौसम सब्जियों के चार गुना बढ़कर दाम मिलेंगे।
मिलेगा प्रशिक्षण
कृषि वैज्ञानिक उद्यान डा. एके सिंह ने किसानों को खेती करने के तरीके बताए। बुर्वाई से लेकर फसल की सुरक्षा करना तक बताया गया। उन्होंने कहा, बेमौसम सब्जियों की मांग ज्यादा होती है। इस कारण दाम भी कई गुना बढ़कर मिलते हैं। बताया कि इसी तरह सप्ताह भर किसानों को प्रशिक्षण दिया जाएगा।
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औरैया। जिले के किसान पहली बार आलू के साथ बेमौसम सब्जियों की खेती करेंगे। खेतों पर आलू के आसपास सब्जियों की बुवाई की जाएगी। आलू के पौधे कद्दू, लौकी, करेला व तरोई के लिए सुरक्षा कवच बनते हुए उन्हें मौसम की मार से बचाएंगे। इससे सब्जियों में ठंड, कोहरा व बूंदाबांदी का असर नहीं पड़ेगा। वैसे इन फसलों की बुर्वाई मार्च में की जाती है तब मई तक यह फसलें तैयार हो जाती हैं। लेकिन इस बार गर्मियों की फसल सर्दी में लहलहाएगी।
कृषि विज्ञान केंद्र की मदद से दिसंबर के आखिरी तक सब्जियों की बुवाई होगी। बेमौसम सब्जियों में खासतौर पर सावधानी बरतनी होगी। लौकी के बीज तीन से चार मीटर की दूरी बनाकर लाइन वार डालने होंगे। आलू के पौधों से एक से डेढ़ मीटर दूरी देनी होगी। वहीं, कद्दू के बीज लाइन वार दो-दो मीटर की दूरी पर डालने होंगे। कद्दू के पौधे तेजी से फैलते हैं। इसके लिए आलू के पौधों से दो से ढाई मीटर दूरी देनी होगी। तरोई के बीज लाइन वार एक-एक मीटर पर डालने होंगे। आलू से दूरी ढाई मीटर तक होनी चाहिए। इससे सब्जियों के पौधे बड़े होने पर आपस में उलझेंगे नहीं।
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ये होंगे फायदे
-सब्जियों में अलग से लागत नहीं लगानी होगी।
-आलू की सिंचाई से सब्जियों को पानी मिलेगा।
-आलू में डाली गई खाद सब्जियों के काम आएगी।
-बेमौसम सब्जियों के चार गुना बढ़कर दाम मिलेंगे।
मिलेगा प्रशिक्षण
कृषि वैज्ञानिक उद्यान डा. एके सिंह ने किसानों को खेती करने के तरीके बताए। बुर्वाई से लेकर फसल की सुरक्षा करना तक बताया गया। उन्होंने कहा, बेमौसम सब्जियों की मांग ज्यादा होती है। इस कारण दाम भी कई गुना बढ़कर मिलते हैं। बताया कि इसी तरह सप्ताह भर किसानों को प्रशिक्षण दिया जाएगा।
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