हे भगवान इतनी उपेक्षा, जीवित रहने पर भोजन नहीं, मरने पर मिट्टी नहीं, शव को नोंच रहे चील-कौवे
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छुट्टा पशुओं की देखभाल को लेकर योगी सरकार भले ही सख्त हो, मगर स्थानीय प्रशासन को इनकी कोई परवाह नहीं है। जिंदा रहने पर तो उनकी बेकद्री हो ही रही है, मरने के बाद भी उनके शव दुर्दशा के शिकार हैं। पशुओं के शव को कहीं कुत्ते नोच रहे हैं तो कहीं चील-कौए खा रहे हैं। ताजा मामला जौनपुर जिले के जलालपुर ब्लॉक के लहंगपुर गोशाला का है। चारा-पानी के लिए तड़पते पशुओं को मरने के बाद ही गड्ढा खोदकर फेंक दिया गया है। कई दिनों से इसमें पड़े पशुओं के शव दुर्गंध से बीमारियां फैलाने का कारण बन रहे हैं।
लहंगपुर गांव स्थित हॉट सेंटर में करीब एक साल पहले अस्थाई गोशाला का निर्माण हुआ था। इसमें फिलहाल 100 पशु रखे गए हैं। चारा, पानी, साफ-सफाई सहित अन्य व्यवस्था प्रधान के माध्यम से की जा रही है। इसके लिए प्रति पशु 30 रुपये प्रतिदिन की दर से भुगतान का प्रावधान है। काफी समय से धन न मिलने से चारे की व्यवस्था प्रभावित है। सबसे बड़ी समस्या पशुओं के उपचार और उनकी सुरक्षा को लेकर है। गोशाला में घुसकर आवारा कुत्ते उन्हें अपना शिकार बनाते रहते हैं। बीमारी के समुचित उपचार के अभाव में एक सप्ताह के अंदर 10 से अधिक पशु दम तोड़ चुके हैं।
पशुओं के शव को गोशाला से सटे गड्ढा खोदकर उसमें डाल दिया गया है। मिट्टी न डाले जाने से इन शवों को कुत्ते नोच रहे हैं। चील-कौवे भी उन्हें अपना आहार बना रहे हैं। शव से उठते दुर्गंध के कारण बीमारी फैलने की आशंका से लोग सहमे हैं। सूचना देने के बाद भी जिम्मेदार कोई सुध नहीं ले रहे। ग्राम प्रधान का कहना है कि एक साल में 40 से अधिक पशु दम तोड़ चुके हैं। दस दिनों के अंदर ही 8-10 पशु की मौत हुई ही। जलालपुर पशु अस्पताल के चिकित्साधिकारी डॉ संजय पांडेय का कहना है कि सूखा चारा खाने से पशु कमजोर पड़ रहे हैं।
इस कारण गोशाला खुलने से अब तक दर्जनों पशु मरे हैं। दो बीमार हैं, जिनका उपचार चल रहा है। वहीं बीडीओ प्रवीण त्रिपाठी का कहना था कि गौशाला में जो भी परेशानियां है, उसे दूर कराने के लिए एडीओ पंचायत को निर्देशित किया गया है। वह मौके पर जाकर समस्याओं का समाधान कराएंगे। इस संबंध में एसडीएम केराकत सीपी पाठक ने कहा कि पशुओं के शव को गड्ढा खोदकर दफनाने का निर्देश है। अगर ऐसा नहीं है तो फिर यह लापरवाही है। मामले की जांच कराएंगे। सम्बन्धित से स्पष्टीकरण लेकर कार्यवाई की जाएगी। सड़क पर घूम रहे पशुओं को भी गोशाला में भेजा जाएगा।